अभिषेक झा,ब्यूरो चीफ
पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले आरजेडी विधायक सुधाकर सिंह ने नोटिस का जवाब दे दिया है.पार्टी ने सीएम पर टिप्पणी करने की वजह से सुधाकर सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया था. सुधाकर सिंह ने पांच पन्ने का जवाब पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी को भेज दिया है.
अपनी पार्टी को कठघड़े में खड़ा किया
अपने जवाब में सुधाकर सिंह ने अपनी पार्टी आरजेडी को तो कठघड़े में खड़ा किया ही साथ ही जेडीयू को भी लपेटे में ले लिया है. राजद विधायक सुधाकर सिंह ने अपने जवाब में लिखा है कि हमें जो नोटिस दिया गया उससे राजद की ए-टू-जेड नीति की पुष्टि नहीं हो रही. अकेले चिन्हित कर नोटिस दिया गया. हमने मंडी कानून को लेकर सवाल उठाया जो कि राजद के एजेंडे में है. जब हमने सवाल उठाया तो पार्टी मेरे साथ खड़ी नहीं हुई. आखिर किस राजनीतिक दबाव में ऐसा किया गया?
सारे आरोप निराधार हैं
नोटिस के जवाब में सुधाकर सिंह ने लिखा है कि मुझ पर आरोप है कि सीएम पर टिप्पणी करने से राजद के राष्ट्रीय अधिवेशन में पारित प्रस्ताव का उल्लंघन हुआ है.यह आरोप बिलकुल निराधार है क्योंकि नीतीश कुमार जेडीयू के नेता हैं .राजद के राष्ट्रीय अधिवेशन में किसी अन्य राजनीतिक दल या उसके सदस्य से संबंधित ना कोई चर्चा हुई और ना ही कोई प्रस्ताव पारित हुआ था. राष्ट्रीय अधिवेशन में पारित प्रस्ताव में राजद के किसी भी कार्यकर्ता को अन्य दल के कार्यकर्ताओं पर टिप्पणी करने के लिए न तो मना किया गया और ना ही रोक लगाई गई थी. ऐसे में स्पष्ट होता है कि जेडीयू नेता नीतीश कुमार से संबंधित मेरे किसी बयान से राष्ट्रीय अधिवेशन में पारित प्रस्ताव की अवहेलना नहीं हुई. हमने नीतिगत मामलों पर सवाल उठाए थे. इसको विस्तार से समझा जाएगा तो स्पष्ट मालूम होगा.
नीतीश कुमार ने विधानसभा में पिटवाया था राजद के विधायकों को
नोटिस के जवाब में सुधाकर सिंह ने लिखा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 2006 में मंडी कानून खत्म करने का बिल बिहार विधानसभा में लेकर आए थे. तब राजद के विधायकों ने विधानसभा में प्रतिरोध दर्ज किया था. जब बिहार विधानसभा के भीतर बात नहीं सुनी गई तो सदन से वाकआउट किया गया था. जैसे हाल फिलहाल में पुलिस कानून के खिलाफ राजद विधायकों ने विधानसभा के भीतर प्रतिरोध किया था. दोनों मामलों में बस अंतर इतना था कि 2006 के मंडी कानून समाप्त करने के समय विधायकों की पिटाई नहीं हुई थी. वहीं पुलिस कानून का विरोध करने पर सदन के भीतर एवं बाहर विधायकों की पुलिस द्वारा जबर्दस्त पिटाई की गई थी. यहां तक कि महिला विधायकों को घसीट कर पीटा गया था.
राजद के किए काम को नजरअंदाज करते हैं नीतीश कुमार
इतना ही नहीं महागठबंधन में रहते हुए भी हाल में नीतीश कुमार ने तेजस्वी यादव की उपस्थिति में सार्वजनिक मंच से यह कहा कि 2005 से पहले कुछ था क्या …? जो विकास हुआ है वह 2005 के बाद हुआ है. उनका यह बार-बार ऐसा कहना राजद के द्वारा किए गए विकास को नकारना है. साथ ही राजद कार्यकर्ताओं के लिए असहज स्थिति पैदा करने वाली है.
किसी ने मेरा साथ नहीं दिया
2022 में नई राजनीतिक परिस्थिति में नीतीश कुमार के नेतृत्व में महागठबंधन की सरकार बनी .नेतृत्व द्वारा मेरी अनिच्छा के बावजूद मुझे कृषि मंत्री बनाने का फैसला इस आश्वासन के साथ लिया कि घोषित नीतियों पर कार्य करने के अवसर मिलेंगे. लेकिन विभाग में व्याप्त विसंगतियों एवं मंडी कानून पर बढ़ने की मेरी मंशा पर अधिकारियों द्वारा अवरोध पैदा किया जाता रहा. जिसकी चर्चा हमने कैबिनेट की मीटिंग में की थी. ऐसी परिस्थिति में मुझे पार्टी के नेताओं से अपेक्षा थी कि नीतियों-सिद्धांतों पर आधारित मेरे बयानों का बचाव किया जाएगा. लेकिन अफसोस के साथ यहां कहना पड़ रहा है कि किसी राजनीतिक दबाव में मेरा बचाव नहीं किया गया जबकि मुझे पार्टी की तरफ से कम से कम नैतिक समर्थन की जरूरत तो थी ही. उल्टे मेरे विचारों एवं सिद्धांत पर पार्टी का समर्थन नहीं मिलना मुझे चिंतित अवश्य कर रहा है लेकिन भविष्य के लिए विचलित नहीं कर रहा.
जीवन पर्यंत लड़ाई लड़ता रहूंगा
मुझे आशा है कि भविष्य में राजद अपने उद्देश्य-सिद्धांतों पर पार्टी के भीतर व्यापक विचार विमर्श के जरिए वर्तमान सरकार के मुखिया के सामने अपना पक्ष मजबूती से जरूर रखेगा. अगर दूसरे राजनीतिक दल के किसी नेता पर मेरे द्वारा की गई किसी टिप्पणी से किसी तरह की असहमति थी तो मुझे निजी तौर पर या आधिकारिक तौर पर सूचित किया जा सकता था. इस पत्र से पहले मुझे कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली. मुझे अकेले चिन्हित करके नोटिस भेजना न्याय संगत प्रतीत नहीं होता है. न ही यह हमारी पार्टी के ए टू जेड की नीति की पुष्टि करता है. अंत में सुधाकर सिंह ने लिखा है कि मैं पूरी मजबूती और दृढ़ संकल्प के साथ यह लड़ाई जीवन पर्यंत लड़ता रहूंगा.

