Ranchi student protest suspended रांची : झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और धांधली के खिलाफ कई दिनों से चल रहा छात्र आंदोलन फिलहाल दो महीने के लिए स्थगित कर दिया गया है. JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच ने सरकार को जांच पूरी करने के लिए 60 दिनों का समय दिया है. छात्रों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर तय समय में निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच पूरी नहीं हुई, तो वे दोबारा बड़ी संख्या में रांची पहुंचेंगे और आंदोलन को और तेज किया जाएगा. उस समय CBI जांच की मांग आंदोलन का प्रमुख मुद्दा होगी.
Ranchi student protest suspended:सरकार को 60 दिन का अल्टीमेटम
छात्र संगठनों की कोर कमेटी की बैठक में आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने का फैसला लिया गया. छात्रों का कहना है कि सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों पर कार्रवाई शुरू की है और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच का दायरा भी बढ़ाया गया है. ऐसे में सरकार को जांच पूरी करने का अवसर दिया जाना चाहिए.
JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच ने कहा है कि अगले दो महीने सरकार के लिए परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जांच को निष्पक्ष तरीके से पूरा करने की कसौटी होंगे. यदि इस अवधि में संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती है, तो छात्र फिर रांची में जुटेंगे.
22 भर्ती परीक्षाएं रद्द, 17 परीक्षाओं की जांच
छात्र आंदोलन के बीच झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं को लेकर बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने 22 प्रतियोगी परीक्षाएं रद्द करने का निर्णय लिया है. इनमें JSSC-CGL परीक्षा भी शामिल है. इसके अलावा 17 परीक्षाओं, उनके परिणाम और नियुक्तियों की जांच CID को सौंपी गई है. छह अन्य भर्ती परीक्षाओं को फिलहाल स्थगित किया गया है.
JSSC-CGL परीक्षा विज्ञापन संख्या 10/2023 के तहत 1,932 पदों के लिए आयोजित की गई थी. परीक्षा रद्द होने से उन अभ्यर्थियों में भी असमंजस पैदा हुआ है, जो चयन प्रक्रिया पूरी कर चुके थे. रिपोर्ट के मुताबिक करीब 2,627 अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया में सफलता हासिल की थी.
45 भर्ती प्रक्रियाओं की जांच के लिए बनी टीम
सरकार की कार्रवाई के साथ ही जांच का दायरा भी बड़ा किया गया है. ADG CID मनोज कौशिक के नेतृत्व में सात IPS अधिकारियों की टीम जांच कर रही है. इस टीम में 12 DSP समेत करीब 50 पुलिस अधिकारी शामिल हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक टीम को करीब 45 भर्ती प्रक्रियाओं की जांच करनी है और दो महीने के भीतर रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है. इसके अलावा JPSC-JSSC में परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए वरिष्ठ IAS अधिकारी अमिताभ कौशिक की अध्यक्षता में एक अलग समिति बनाई गई है, जिसे सुधारों पर अपनी रिपोर्ट देने के लिए दो महीने का समय दिया गया है.
यही वजह है कि छात्रों ने भी फिलहाल सरकार को 60 दिन का समय देने का फैसला किया है. यानी आंदोलन स्थगित करने के पीछे एक तरह से सरकार की जांच और सुधार प्रक्रिया को परखने की रणनीति है.
आंदोलन की शुरुआत क्यों हुई थी?
JPSC और JSSC की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों ने जुलाई के अंत में रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया था. छात्रों की प्रमुख मांगों में भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच, कथित पेपर लीक और OMR से जुड़ी गड़बड़ियों की जांच तथा भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार शामिल थे.
आंदोलन के दौरान छात्रों ने CBI जांच की मांग को लगातार प्रमुखता से उठाया. कई दौर की सरकार-छात्र वार्ता के बावजूद शुरुआती चरण में कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया था. बाद में आंदोलन और तेज हुआ तथा छात्रों ने विधानसभा मार्च और मुख्यमंत्री आवास के घेराव जैसे कार्यक्रमों की चेतावनी भी दी थी.
भूख हड़ताल और बढ़ा दबाव
आंदोलन के दौरान छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने भी भूख हड़ताल किया. उन्होंने 16 दिन तक अनशन किया. सरकार की ओर से JSSC-CGL समेत कई परीक्षाओं को रद्द किए जाने के बाद उन्होंने भूख हड़ताल समाप्त कर दी, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन को पूरी तरह खत्म नहीं माना जाना चाहिए.
महतो ने आगे भी ऐसी भर्ती व्यवस्था की मांग की है, जिसमें पेपर लीक और दूसरी अनियमितताओं की कोई गुंजाइश न हो. उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी के लिए समिति, पूरी प्रक्रिया के ऑडिट और जरूरत पड़ने पर कानून बनाने की मांग भी उठाई है.
सरकार के सामने क्या हैं चुनौतियां?
सरकार के सामने अगले 60 दिन बेहद अहम हैं. एक तरफ रद्द की गई परीक्षाओं और उनके भविष्य को लेकर अभ्यर्थियों में असमंजस है, वहीं दूसरी तरफ कथित अनियमितताओं की जांच को समयबद्ध और निष्पक्ष तरीके से पूरा करने की चुनौती है.
छात्रों की नजर अब जांच रिपोर्ट और परीक्षा व्यवस्था में होने वाले सुधारों पर रहेगी. अगर सरकार की कार्रवाई से छात्र संतुष्ट नहीं हुए तो दो महीने बाद रांची में आंदोलन दोबारा जोर पकड़ सकता है. इस लिए ये कहना सही होगा कि फिलहाल आंदोलन थमा जरूर है, लेकिन JPSC-JSSC परीक्षा विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.

