‘मैं कभी नहीं चाहती थी कि राजीव गांधी प्रधानमंत्री बनें’:सोनिया गांधी ने खोले दिल के राज

Sonia Gandhi Book :  कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी अपनी आने वाली किताब  ‘बिलॉन्गिंग – ए जर्नी ऑफ लव’ को लेकर इन दिनों खूब चर्चा में हैं. दावा है कि इस किताब के जरिये सोनिया गांधी गांधी परिवार और अपने जीवन के उन अनजाने और अनसुने किस्सों को सामने लायेंगी, जिसके बारे में अब तक लोग अपने अपने नजरिये से बातें करते रहे हैं. किताब के लॉन्च से पहले उन्होंने एक वीडियो संदेश में अपने जीवन, राजीव गांधी के साथ रिश्ते और सार्वजनिक जीवन से जुड़े अनुभव साझा किए हैं. इस दौरान उन्होंने एक अहम बात कही कि वह कभी नहीं चाहती थीं कि राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री बनें. 

सोनिया गांधी का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें उनके निजी जीवन और राजनीति के बीच के उस संबंध की झलक मिलती है, जिसका असर उनके परिवार पर भी पड़ा. उन्होंने यह भी बताया कि अपनी कहानी खुद लिखने की जरूरत उन्हें क्यों महसूस हुई और किस तरह उनके बारे में वर्षों तक ऐसी बातें लिखी गईं, जिन्हें वह सही नहीं मानतीं.

10 नवंबर को लॉन्च होगी ‘बिलॉन्गिंग – ए जर्नी ऑफ लव’

सोनिया गांधी की किताब ‘बिलॉन्गिंग – ए जर्नी ऑफ लव’ 10 नवंबर को लॉन्च होने वाली है. किताब के आने से पहले उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो साझा कर इसके पीछे की सोच के बारे में बताया.

सोनिया गांधी ने अपने पोस्ट के कैप्शन में लिखा कि जब किताब सामने आएगी, तो कुछ चर्चा और विवाद होना स्वाभाविक है. उन्होंने कहा कि दशकों तक दूसरे लोग उनकी कहानी सुनाते और लिखते रहे हैं, लेकिन अब अपनी बात रखने की बारी उनकी है.

उनके इस संदेश से साफ है कि किताब का उद्देश्य केवल जीवन की घटनाओं को दर्ज करना नहीं, बल्कि उन अनुभवों को भी सामने लाना है, जिन्हें सोनिया गांधी अपने नजरिए से महत्वपूर्ण मानती हैं.

‘मेरे बारे में बहुत कुछ लिखा गया, लेकिन सब सही नहीं था’

अपनी कहानी खुद लिखने के अनुभव के बारे में पूछे गए सवाल पर सोनिया गांधी ने कहा कि उनके जीवन के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है. हालांकि, उनके मुताबिक, उन बातों में कई ऐसी थीं जो पूरी तरह सही नहीं थीं.

उन्होंने बताया कि कुछ घटनाओं को गढ़कर पेश किया गया, जबकि कुछ बातों को बढ़ा-चढ़ाकर लिखा गया. इसी वजह से उन्हें लगा कि अब उन्हें अपनी जिंदगी की घटनाओं और अनुभवों को खुद सामने रखना चाहिए.

सोनिया गांधी के मुताबिक, वह चाहती थीं कि तथ्यों और घटनाओं को उसी तरह बताया जाए, जैसे उन्होंने उन्हें अनुभव किया. उनके लिए यह अपनी छवि का बचाव करने से ज्यादा अपनी कहानी को अपने शब्दों में दर्ज करने का प्रयास है.

‘यह मेरा वर्जन नहीं, मेरी कहानी है’

सोनिया गांधी ने अपनी किताब को लेकर एक और महत्वपूर्ण बात कही. उन्होंने इसे केवल अपना पक्ष या किसी विवाद का जवाब देने की कोशिश बताने के बजाय अपनी कहानी कहा.

उनका मानना है कि हर व्यक्ति के अपने विचार और धारणाएं होती हैं. किताब पढ़ने के बाद संभव है कि कुछ लोगों की उनके बारे में राय बदल जाए, जबकि कुछ लोग पहले से ज्यादा नकारात्मक राय बना लें। लेकिन सार्वजनिक जीवन में ऐसा होना स्वाभाविक है.

सोनिया गांधी के इस बयान से संकेत मिलता है कि वह किताब के जरिए पाठकों के सामने अपने अनुभव रखना चाहती हैं, न कि हर व्यक्ति को अपनी राय बदलने के लिए मजबूर करना.

उनके अनुसार, जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक जीवन में होता है, तो उसके बारे में तरह-तरह की बातें कही जाती हैं. ऐसे में अपनी कहानी खुद बताना उनके लिए एक जरूरी कदम बन गया.

राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने के खिलाफ क्यों थीं सोनिया गांधी?

सोनिया गांधी के वीडियो में सबसे अधिक चर्चा उनके उस बयान को लेकर है, जिसमें उन्होंने कहा कि वह कभी नहीं चाहती थीं कि राजीव गांधी भारत के प्रधानमंत्री बनें.

राजीव गांधी का प्रधानमंत्री बनना उनके परिवार के जीवन का एक बड़ा मोड़ था. राजनीति में उनकी भूमिका और देश की जिम्मेदारी ने उनके निजी जीवन को भी प्रभावित किया. सोनिया गांधी के इस खुलासे से यह समझने का अवसर मिलता है कि उस दौर को उन्होंने किस नजरिए से देखा था.

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में सोनिया गांधी ने इस वीडियो में विस्तार से यह नहीं बताया कि वह राजीव गांधी को प्रधानमंत्री बनते हुए क्यों नहीं देखना चाहती थीं. इस बयान के पीछे की पूरी वजह और उससे जुड़ी परिस्थितियों को समझने के लिए किताब के प्रकाशित होने तक इंतजार करना होगा.

किताब में इस विषय पर क्या विस्तार से लिखा गया है, यह उसके सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा.

कैंब्रिज के ग्रीक रेस्टोरेंट में शुरू हुई थी प्रेम कहानी

सोनिया गांधी ने अपने एक अन्य वीडियो संदेश में राजीव गांधी के साथ पहली मुलाकात और अपनी प्रेम कहानी की शुरुआत का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि उनकी प्रेम कहानी कैंब्रिज के एक छोटे से ग्रीक रेस्टोरेंट में शुरू हुई थी.

उन्होंने एक्स पर साझा किए गए संदेश में कहा कि राजीव गांधी और उन्होंने मिलकर प्यार, हंसी और यादों से भरी एक दुनिया बनाई. सोनिया गांधी के अनुसार, 10 नवंबर को वह अपनी उस दुनिया के कुछ हिस्सों को पाठकों के साथ साझा करेंगी.

यह प्रसंग किताब के निजी और भावनात्मक पक्ष की ओर इशारा करता है. जहां सार्वजनिक जीवन में गांधी परिवार का राजनीतिक इतिहास अक्सर चर्चा में रहता है, वहीं इस किताब के माध्यम से सोनिया गांधी अपने रिश्ते, यादों और व्यक्तिगत अनुभवों को सामने लाने की तैयारी कर रही हैं.

किताब से क्या उम्मीद की जा रही है?

सोनिया गांधी लंबे समय से भारतीय राजनीति की महत्वपूर्ण शख्सियत रही हैं. राजीव गांधी से विवाह के बाद उनका जीवन धीरे-धीरे देश की राजनीति और सार्वजनिक जिम्मेदारियों से जुड़ता गया. राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने, उनके कार्यकाल और बाद में उनके निधन के बाद परिवार के जीवन में आए बदलाव भारतीय राजनीतिक इतिहास के अहम हिस्से रहे हैं.

ऐसे में ‘बिलॉन्गिंग – ए जर्नी ऑफ लव’ को लेकर लोगों की दिलचस्पी स्वाभाविक है. पाठक यह जानना चाहेंगे कि सोनिया गांधी अपने निजी जीवन, राजीव गांधी के साथ रिश्ते और राजनीति से जुड़े अनुभवों को किस तरह याद करती हैं.

हालांकि, किताब की वास्तविक विषयवस्तु और उसमें किए गए विस्तृत खुलासों के बारे में अंतिम निष्कर्ष उसके प्रकाशन के बाद ही निकाला जा सकेगा.

10 नवंबर का इंतजार 

सोनिया गांधी के वीडियो संदेशों ने किताब के लॉन्च से पहले ही चर्चा शुरू कर दी है. खास तौर पर राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने को लेकर उनका बयान और कैंब्रिज में पहली मुलाकात का प्रसंग लोगों का ध्यान खींच रहा है.

अब देखना होगा कि किताब में सोनिया गांधी अपने जीवन के किन अन्य पहलुओं पर विस्तार से बात करती हैं और क्या वह उन घटनाओं के बारे में भी जानकारी देती हैं, जिनके बारे में उन्होंने सार्वजनिक रूप से बहुत कम कहा है, खास कर गांधी परिवार मके सदस्यों के साथ उनके संबंध और स्व.प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी , संजय गांधी के साथ उनके संबंध के बारे में लोगों को जानने की उत्सुकता होगी.

फिलहाल, उनका संदेश स्पष्ट है—दशकों तक दूसरों के नजरिए से सामने आई कहानी के बाद अब वह अपने अनुभवों को अपने शब्दों में पाठकों तक पहुंचाना चाहती हैं.

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