Hormuz Strait Crisis : ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के कारण बंद पड़े Strait of Hormuz से भारत अपने दो एलपीजी से भरे जहाज शिवालिक और नंदादेवी को सुरक्षित निकालने में सफल रहा है. इन जहाजों के भारत पहुंचने से कुछ राहत की उम्मीद जरूर जगी है लेकिन सवाल यह है कि क्या इनसे देश में संभावित एलपीजी संकट खत्म हो जाएगा?
A WIN FOR INDIA! 🚢🇮🇳✅
The LPG blockade is breaking! Tankers Shivalik & Nanda Devi have crossed the Strait of Hormuz carrying 92,700 MT of gas.
That’s enough for 65 LAKH cylinders. Coming to Mundra & Kandla on March 16. 📉🔥#LPGShortage #India #IranWar pic.twitter.com/i0Qow83Meh— Rana Saha (@TheRanaSaha) March 14, 2026
Hormuz Strait Crisis : 92,700 मीट्रिक टन LPG लेकर आ रहे हैं दो जहाज
मंत्रालय के अनुसार भारतीय झंडे वाले इन दोनों जहाजों को 14 मार्च को ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से निकलने की अनुमति दी थी. इसके बाद दोनों जहाज भारत की ओर रवाना हो गए.
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शिवालिक जहाज गुजरात के Mundra Port पहुंच रहा है।
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नंदादेवी जहाज गुजरात के Kandla Port पर डॉक करेगा.
मिनिस्ट्री ऑफ पोर्ट, शिपिंग एंड वाटरवेज के स्पेशल सेक्रेटरी Rajesh Kumar के मुताबिक दोनों जहाजों पर कुल 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी लदी हुई है.
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शिवालिक पर लगभग 45,000 मीट्रिक टन LPG
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नंदादेवी पर लगभग 47,700 मीट्रिक टन LPG
भारत में कितनी है LPG की रोजाना खपत?
भारत में एलपीजी की औसत दैनिक खपत करीब 7,500 से 8,000 मीट्रिक टन है। इस हिसाब से अगर दोनों जहाजों की कुल गैस को देखें तो यह देश की जरूरतों के लिए लगभग 12 से 13 दिन तक ही पर्याप्त हो सकती है. इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि इन जहाजों से कुछ समय के लिए राहत जरूर मिल सकती है लेकिन इससे लंबे समय के लिए संकट खत्म नहीं होगा.
अभी भी 22 भारतीय जहाज फंसे
फारस की खाड़ी में भारत के झंडे वाले करीब 22 जहाज अभी भी फंसे हुए हैं, जो अभी तक होर्मुज स्ट्रेट से बाहर नहीं निकल पाए हैं. यदि इन जहाजों को भी सुरक्षित रास्ता मिल जाता है, तो भारत की गैस आपूर्ति सामान्य होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा.
घरेलू उत्पादन भी बढ़ा
सरकार के अनुसार भारत में एलपीजी उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई है. पहले देश में करीब 1.158 मिलियन टन प्रति माह गैस का उत्पादन होता था, जो अब बढ़कर लगभग 1.5 मिलियन टन प्रति माह हो गया है.
उत्पादन में लगभग 28% वृद्धि के कारण भारत अपनी जरूरतों का कुछ हिस्सा खुद पूरा कर पा रहा है, जिससे कम से कम 15 दिन तक सप्लाई संभाली जा सकती है.30 साल में 6 गुना बढ़ी LPG की खपत
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में पिछले तीन दशकों में रसोई गैस की खपत में भारी बढ़ोतरी हुई है।
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1998-99: 446 हजार मीट्रिक टन
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2025-26: 2,754 हजार मीट्रिक टन
यानी खपत करीब 6 गुना बढ़ चुकी है. शहरी क्षेत्रों में एलपीजी का इस्तेमाल ज्यादा है, जबकि ग्रामीण इलाकों में अभी भी इसकी खपत अपेक्षाकृत कम है.
क्या कहती है मौजूदा स्थिति?
विशेषज्ञों के मुताबिक, शिवालिक और नंदादेवी से आई गैस से देश में तत्काल राहत जरूर मिलेगी, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है. असली राहत तभी मिलेगी जब होर्मुज स्ट्रेट से बाकी भारतीय जहाज भी सुरक्षित बाहर निकल सकें और मध्य पूर्व से गैस की सप्लाई फिर से सामान्य हो जाए.
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