Tuesday, January 27, 2026

वीर सावरकर के नाम पर अवार्ड के लिए चुने जाने पर भड़के शशि थरुर,बोले अवार्ड लेने का सवाल ही नहीं उठता

Shashi Tharoor :  पिछले कुछ समय से केरल से आने वाले कांग्रेस के इलिट नेता शशि थरुर भाजपा के साथ नजदीकिया बढ़ाते दिखाई देते रहे हैं. कांग्रेस की बैठक से नदारत लेकिन कई मौके पर प्रधानमंत्री मोदी के इर्द गिर्द नजर आते रहे हैं. शशि थरुर समय समय पर पीएम मोदी की तारीफ करते भी नजर आते हैं. ऐसे में मीडिया में ये चर्चा जम कर होती है कि शशि थरुर अब कांग्रेस की जगह भाजपा से अधिक नजदीक हो रहे हैं लेकिन बुधवार को एक ऐसा मामला सामने आ गया, जहां शशि थरुर फंसे हुए नजर आ रहे हैं.

Shashi Tharoor को वीर सावरकर के नाम पर अवार्ड ?   

शशि थरुर को लेकर  खबर सामने आई कि एक निजी संस्था ‘हाईरेंज रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी इंडिया’ ने  इन्हें अपनी संस्था के प्रतिष्ठित आवर्ड “वीर सावरकर अंतराष्ट्रीय इंपेक्ट आवर्ड 2025” के लिए चुना है. आयोजकों की ओर से दावा किया गया कि शशि थरूर उन छह लोगों में शामिल हैं, जिन्हें यह पुरस्कार दिया जाएगा. अवॉर्ड समारोह 10 दिसंबर यानी आज ही दिल्ली के एनडीएमसी कन्वेंशन हॉल में आयोजित किया जा रहा है. इस कार्यक्रम का उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कर रहे हैं, वहीं जम्मू-कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहेंगे.

 अवार्ड के नाम पर भड़के शशि थरुर 

कांग्रेस की पार्टी लाइन के मुताबिक हमेशा वीर सावरकर की खिलाफत करने वाले शशि थरुर से जब इस अवार्ड के बारे में पूछा गया को थरुर भड़क गये. उन्होंने कहा कि वो ना तो इस पुरस्कार को स्वीकार कर रहे हैं और न ही इस कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे हैं. संसद परिसर में पत्रकारों के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘मुझे कुछ नहीं मिल रहा है. मुझे इसके बारे में कल ही पता चला और मैं कोई पुरस्कार लेने वहां नहीं जा रहा हूं.’

सावरकर के नाम पर दिये जा रहे अवार्ड पर थरुर की सफाई

शशि थरूर ने बुधवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट लिखा जिसमें बताया कि उन्हें इस अवॉर्ड के बारे में सिर्फ मीडिया रिपोर्ट्स से जानकारी मिली. वो भी तब जब वो केरल में स्थानीय निकाय चुनावों के सिलसिले में व्यस्त थे. अपने ट्वीट मे उन्होंने साफ किया कि इस पुरस्कार के बारे में ना तो उन्हें कोई पूर्व सूचना दी गई और न ही किसी ने उनसे इसकी स्वीकृति ली. शशि थरूर ने कार्यक्रम के आयोजकों के रवैये को ‘गैर-जिम्मेदाराना’ बताया और कहा कि ऐसी किसी चीज के लिए उनका नाम सार्वजनिक करने से पहले उनसे अनुमति ना लेना पूरी तरह से गलत है.

थरुर में अपने लंबे पोस्ट मे लिखा कि उन्हें इस पुरस्कार की प्रकृति, उसे देने वाली संस्था और उसके पीछे के उद्देश्य को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है. जब तक उन्हें जानकारी दी नहीं जाती है , तब तक इस पुरस्कार को स्वीकार करने या समारोह में शामिल होने का सवाल ही पैदा नहीं होता. थरुर ने कहा कि पूरे मामले में उन्हें अंधेरे में रखा गया और  अचानक उनका नाम सार्वजनिक तौर पर घोषित कर दिया गया.

दरअसल ‘हाईरेंज रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी इंडिया’ के आयोजकों की तरफ से ये दावा किया गया था कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शशि थरूर को उनके व्यापक प्रभाव और योगदान को देखते हुए इस पुरस्कार के लिए चयन गया है. संस्था ने थरुर के साथ और विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले पांच हस्तियों को भी सम्मानित करने के लिए चुना है.

कांग्रेस के भीतर मचा घमासान

खबर के सामने आने के बाद कांग्रेस के भीतर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है. केरल के एक प्रमुख अखबार मनोरमा ने  कांग्रेस नेता के. मुरलीधरन के वाले से लिखा है कि ‘कांग्रेस पार्टी का कोई भी नेता सावरकर के नाम से जुड़े किसी भी पुरस्कार को स्वीकार नहीं करेगा.’ मुरलीधरन के इस बयान को शशि थरूर के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है.

शशि थरुर के लिए कांग्रेस में दोधारी तलवार

शशि थरुर पिछले काफी समय से लगातार अपने कुछ बयानों को लेकर कांग्रेस पार्टी के अंदर असहजता का कारण भी बने हुए हैं. खासकर जब-जब उन्होंने पीएम मोदी की नीतियों और कदमों की सार्वजनिक सराहना की है. ऐसे में जैसे ही वीर सावरकर ( जिन्हें भाजपा अपना रोड मॉडल मानती है) के नाम से जुड़े पुरस्कार के लिए थरुर का नाम आया तो  राजनीतिक गलियारों में ये सवाल उठने लगा कि क्या थरूर इस पुरस्कार को स्वीकार करेंगे ? वीर सावरकर जहां भाजपा के रोल मॉडल हैं, वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों उन्हें आजादी की लड़ाई में देश के लिए लड़ने वालों के खिलाफ काम करने वाला व्यक्ति मानती है. वीर सावरकर की कांग्रेस ने हमेशा ‘माफीवीर’ कहकर खिलाफत की है. ऐसे में शुरु से ही कांग्रेस की राजनीति कर रहे थरुर के लिए ये पुस्कार उनकी विचारधारा के खिलाफ है,और पूरे वजूद पर सवाल उठाने के लिए काफी है. यही कारण है कि थरुर ने पुरस्कार के लिए नाम आने पर इसे सिरे से नकार दिया है. अब देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस पर कैसे रियेक्ट करती है.

Latest news

Related news