Wednesday, February 18, 2026

प्रयाग से बिना पवित्र स्नान किये वापस लौटे शंकराचार्य कहा उन्हें पुष्पवर्षा नहीं, बस दुर्व्यवहार पर ‘क्षमा याचना’ चाहिए थी.

Shankaracharya controversy : माध के महीने में होने वाले पुण्य स्नान के लिए संगम नगरी प्रयाग पहुंचे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अब संगम तट स जा चुके हैं. मौनी अमावस्या पर प्रमुख धार्मिक स्नान  के लिए संगम तट पर पहुंचे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद  पिछले 10 दिनों से धरने पर बैठे थे. फिर माघ माह के समापन के बाद धरना खत्म करने का निर्णय लिय़ा और वहां से चले गये हैं.  संगम से जाने के समय भावुक अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि संगम ते तट पर उनके साथ जो कुछ हुआ उसने उन्हें झकझोर कर रख दिया है. उन्हें बस अब न्याय का इंतजार रहेगा.

Shankaracharya controversy पर बोले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, भारी मन से जा रहा हूं….

10 दिनों तक संगम तट पर विरोध में बैठने के बाद शंकराचार्य ने कहा कि उन्हें ‘पुष्प वर्षा और सम्मान नहीं, बल्कि बटुकों और संन्यासियों के साथ हुए दुर्व्यवहार पर ‘क्षमा याचना’ चाहिए थी.’

‘मन व्यथित है, शब्द साथ नहीं दे रहे हैं’

स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद ने प्रयाग छोड़ते हुए पत्रकारों से बात की . उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि  “प्रयाग में जो कुछ घटित हुआ उसने भीतर तक झकझोर दिया है. आज मन इतना व्यथित है कि बिना स्नान किए ही यहां से विदा ले रहे हैं. अन्याय को हमने अस्वीकार कर दिया है और अब केवल न्याय की प्रतीक्षा करेंगे.”

शंकराचार्य के सामने प्रशासन ने रखा था प्रस्ताव

पिछले दस दिन से लगातार दोनो तरफ की बयानबाजी के बाद जब शंकराचार्य ने संगम तट छोड़ने का बात कही, तब सूत्रों के मुताबिक प्रशासन ने उनके सामने प्रस्ताव रखा कि अगर वो चाहे तो प्रशासन उन्हें पालती में बैठाकर ससम्मान स्नान के लिए ले जाने के लिए तैयार है. विवाद वाले दिन जितने अधिकारी मौजूद थे, सभी स्नान के समय उनके स्वागत के लिए मौजूद रहेंगे,  उनके ऊपर पुष्प वर्षा की जाएगी लेकिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद ने प्रशासन के प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि जो कुछ कहा जा रहा है उसमें ‘क्षमा’ का कोई शब्द नहीं था. उन्होंने कहा कि अगर आप अपनी गलती के लिए क्षमा याचना कर सकते हैं, तब तो ठीक है; वरना पुष्प वर्षा वाला कोई भी प्रस्ताव मंजूर नहीं. असली मुद्दा हमारे बटुकों, संन्यासियों और साधुओं के साथ हुआ दुर्व्यवहार है, उसके लिए आपको क्षमा मांगनी चाहिये.”

स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद के साथ क्यों हुआ विवाद ?

माघ मेले में जैसी की परंपरा रही है, साधु-संत प्रयाग में त्रवेणी के तट पर पवित्र स्नान के लिए जुटते हैं. इस साल भी साधु संन्यासियों के साथ-साथ हजारों लोग माध मेले के दौरान मौनी अमावस्या के मौके पर स्नान के लिए पहुंचे. शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद भी अपने 300 से  अधिक शिष्यों के साथ संगट तट पर पहुंचे. परंपरा के अनुसार शंकराचार्य अपनी पालकी में सवार होकर संगम के तट पर पहुंचते हैं लेकिन इस बार प्रशासन ने अत्यधिक भीड़ की बात कहकर शंकराचार्य को पालकी समेत स्नान के लिए जाने से मना कर दिया. इसके बाद प्रशासन और साधु संतों के बीच विवाद हो गया और प्रशासन ने बल प्रयोग करते हुए साधु संतों को साथ मारपीट कर डाली. छोटे उम्र के बटुक साधकों को भी जम कर मारा पीटा.

18 जनवरी को हुई इस घटना से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद काफी आहत थे और प्रशासन से अपनी गलती मानने की मांग कर करते हुए घरने पर बैठ गये. उन्होंने शर्त रखा कि जब तक प्रशासन उनसे अपने व्यवहार के लिए  मांफी नहीं मांग लेता है, तब तक वो धरने पर रहेंगे. इस मामले को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद की प्रशासन के साथ ऐसी ठनी की प्रशासन ने उन्हें एक के बाद एक 2 नोटिस भेज दिया और कहा गया कि वो खुद को शंकराचार्य साबित करें. मामला मुख्यमंत्री तक पहुंच गया और स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद ने आरोप लगाया  कि उनके साथ प्रशासन ये दुर्व्यवहार सीएम योगी के निर्देश पर कर रहा है.पिछले 10 दिन से प्रयाग में शंकराचार्य के साथ प्रशासन का विवाद चल रहा था. आखिरकार विवाद नहीं सुलझा और शंकराचार्य संगम तट से बिना स्नान किये अपने आश्रम के लिए लौट गये हैं.

 

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