अमेरिका-ईरान युद्ध ने किया शेयर बाजार का बुरा हाल,निवेशकों के डूबे  8 लाख करोड़ 

Share Market Crash नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर बढ़े सैन्य तनाव का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने के लिए मिला है. बुधवार को घरेलू बाजार में भारी बिकवाली के चलते बीएसई सेंसेक्स करीब 1900 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी 50 में भी 500 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई. बाजार में आई इस तेज गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में करीब 8 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई.

वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव,कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. बाजार में डर का माहौल साफ दिखाई दिया और अधिकांश सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए.

Share Market Crash:बुधवार को शेयर बाजार का कारोबार

बुधवार सुबह निफ्टी 50 24,259 के स्तर पर खुला, लेकिन दिनभर बिकवाली का दबाव बना रहा. दोपहर तक यह करीब 500 अंक टूटकर 23,897 के आसपास पहुंच गया.

वहीं बीएसई सेंसेक्स 77,816 अंक पर खुला, लेकिन लगातार गिरावट के बाद यह 76,302.46 तक फिसल गया. दिन के अंत तक सेंसेक्स में करीब 1900 अंकों की गिरावट दर्ज की गई.

निवेशकों के 8 लाख करोड़ रुपये स्वाहा

बाजार में आई इस बड़ी गिरावट का असर कंपनियों के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) पर भी पड़ा. बीएसई के आंकड़ों के अनुसार, सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप एक ही दिन में करीब 480 लाख करोड़ रुपये से घटकर 472 लाख करोड़ रुपये रह गया. यानी निवेशकों की कुल संपत्ति में लगभग 8 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई.

सबसे ज्यादा दबाव तेल एवं गैस, ऑटो, एफएमसीजी, ऊर्जा और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों पर देखने को मिला.

शेयर बाजार में गिरावट की 5 बड़ी वजहें
1. अमेरिका-ईरान युद्ध का दोबारा भड़कना

अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समाप्त होने और दोनों देशों के बीच फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू होने से वैश्विक निवेशकों में जोखिम बढ़ गया. इसका असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर पड़ा.

2. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल

युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में लगभग 6 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई. भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए बढ़ती कीमतें अर्थव्यवस्था और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ाती हैं.

3. कंपनियों के तिमाही नतीजों को लेकर चिंता

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका है. इससे अप्रैल-जून तिमाही (Q1 FY27) के कॉर्पोरेट नतीजे कमजोर रहने का डर निवेशकों में बढ़ गया है.

4. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं बढ़ते वैश्विक जोखिम और कमजोर होते रुपये के कारण विदेशी निवेश का प्रवाह कम हुआ है.

5. इंडिया VIX में तेज उछाल

बाजार में बढ़ती अनिश्चितता का असर India VIX पर भी दिखा, जिसमें 5 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई. VIX में उछाल आमतौर पर बाजार में बढ़ते डर और उतार-चढ़ाव का संकेत माना जाता है.

आगे क्या रहेगी बाजार की दिशा?

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मध्य-पूर्व में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. इसके अलावा विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, रुपये की चाल और आगामी तिमाही नतीजों पर भी बाजार की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी. फिलहाल निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय बाजार की स्थिति पर नजर रखते हुए सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है.

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