Nijjar murder case Canada नई दिल्ली : लगभग तीन साल पहले खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर भारत और कनाडा के बीच शुरू हुआ कूटनीतिक विवाद अब एक नए और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है. कनाडा की जांच एजेंसियों की ताजा जानकारी और अमेरिका में दायर एक हालिया आरोपपत्र ने पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के उन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें उन्होंने भारतीय सरकारी एजेंसियों के इस हत्याकांड में शामिल होने का दावा किया था.
#US authorities exposed #india by saying, “Lawrence Bishnoi, Goldy Brar directed the killing of #Khalistani extremist #Nijjar”
The Nijjar case has proved that India-based, #RAW-linked criminal networks operate beyond India’s borders#Khalistan pic.twitter.com/1p4rQqyvgM— Mustafa Safdar Baig (@MustafaaBaig) July 8, 2026
Nijjar murder case Canada:भारत के खिलाफ नहीं मिला कोई सबूत
ताजा घटनाक्रम के अनुसार, कनाडाई जांच में भारतीय सरकारी अधिकारियों की प्रत्यक्ष संलिप्तता के समर्थन में कोई भी ठोस सबूत नहीं मिलने की बात आधिकारिक तौर पर सामने आई है. इसके विपरीत, अमेरिका के न्याय विभाग द्वारा दायर किया गया अभियोग पूरी कहानी को एक अलग दिशा दे रहा है, जिसमें कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसके सहयोगी गोल्डी बराड़ को इस हत्या की साजिश का मुख्य सूत्रधार बताया गया है.
JUST IN:🇮🇳🇨🇦 No Indian Govt official link found in Nijjar killing, Canadan Authorities pic.twitter.com/ZGLadACDoU
— Asia Nexus (@nexusasian) July 8, 2026
क्या कहा था जस्टिन ट्रूडो ने?
गौरतलब है कि सितंबर 2023 में कनाडा की संसद में तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने एक सनसनीखेज दावा किया था. उन्होंने कहा था कि कनाडाई सुरक्षा एजेंसियां ऐसी “विश्वसनीय आशंकाओं” की जांच कर रही हैं, जो भारतीय एजेंटों और हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बीच संभावित संबंध का संकेत देती हैं. भारत सरकार ने उस समय भी इन आरोपों को “बेबुनियाद” और “राजनीति से प्रेरित” बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया था. अब कनाडाई एजेंसियों की अपनी ही रिपोर्ट ने ट्रूडो के दावों की हवा निकाल दी है.
कनाडा की जांच में क्या आया सामने?
समाचार एजेंसी रायटर्स के मुताबिक कनाडा की जांच से जुड़े उच्चाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब तक भारतीय सरकारी अधिकारियों की भूमिका साबित करने वाला कोई भी पुख्ता या प्रत्यक्ष साक्ष्य हाथ नहीं लगा है. इसके साथ ही यह भी साफ किया गया है कि इस संवेदनशील मामले की जांच के दौरान भारत सरकार की ओर से कनाडाई एजेंसियों को आवश्यक सहयोग भी प्रदान किया गया. इस नए मोड़ के बाद ट्रूडो सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर किए गए दावों की साख पर बड़े सवाल उठ रहे हैं.
अमेरिका के आरोपपत्र में क्या है?
अमेरिकी न्याय विभाग ने लॉस एंजिलिस की संघीय अदालत में जो आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल किया है, वह इस पूरे मामले की सच्चाई को साफ करता है. इस आरोपपत्र में मुख्य रुप से कहा गया है :-
जेल से रची गई साजिश: कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई ने भारत की जेल में बंद रहते हुए भी मोबाइल फोन के जरिए इस पूरी हत्या की साजिश का सफल संचालन किया.
गोल्डी बराड़ की भूमिका: बिश्नोई के करीबी सहयोगी गोल्डी बराड़ ने उत्तरी अमेरिका (कनाडा और अमेरिका) में इस पूरे ऑपरेशन को जमीन पर उतारने और लॉजिस्टिक्स संभालने में मुख्य भूमिका निभाई.
ठिकानों की रेकी: हत्या को अंजाम देने के लिए हमलावरों तक हरदीप सिंह निज्जर की तस्वीरें, उसकी दैनिक गतिविधियां और उसके सटीक ठिकानों की जानकारी पहुंचाई गई थी.
भारतीय सरकार का नाम नहीं
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण और ध्यान देने योग्य बात यह है कि अमेरिकी अभियोग (Indictment) में भारतीय सरकार या उसकी किसी भी खुफिया व सुरक्षा एजेंसी पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है. कानूनी विशेषज्ञों और कूटनीतिज्ञों का मानना है कि यही तथ्य कनाडा के तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व के जल्दबाजी में लगाए गए आरोपों और वर्तमान वास्तविक जांच के बीच के विशाल अंतर को उजागर करता है.
भारत-कनाडा संबंधों पर पड़ा था गहरा असर
याद दिला दें कि निज्जर हत्याकांड के बाद दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक रूप से मधुर रहे द्विपक्षीय संबंधों में अभूतपूर्व कड़वाहट आ गई थी. विवाद इस हद तक बढ़ा कि दोनों देशों ने एक-दूसरे के वरिष्ठ राजनयिकों को निष्कासित कर दिया, व्यापारिक वार्ताएं अनिश्चितकाल के लिए रोक दी गईं और रिश्ते कई दशकों के सबसे निचले स्तर पर चले गए थे. हालांकि, कनाडा में नई सरकार के आने के बाद से दोनों पक्षों की ओर से कूटनीतिक संबंधों को सुधारने और इन्हें पुनः सामान्य पटरी पर लाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं.
राजनीतिक और कूटनीतिक महत्व
यदि अंतिम जांच रिपोर्ट में भी भारतीय सरकारी भूमिका के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिलता है, तो यह मामला महज एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रहेगा. जानकारों का कहना है कि यह 2023 में तत्कालीन ट्रूडो सरकार द्वारा लगाए गए अपरिपक्व राजनीतिक आरोपों और उससे जनित वैश्विक कूटनीतिक संकट की एक व्यापक समीक्षा का विषय बनेगा. बहरहाल, यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि इस हत्याकांड की आपराधिक जांच अभी पूरी तरह बंद नहीं हुई है और कई आरोपों की जांच कनाडाई और अमेरिकी न्यायिक प्रक्रिया के चल रही है.फिलहाल इतना तो साफ हो गया है कि भारत को लेकर लगाया गया नेगेटिव राजनीतिक नैरेटिव पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है.

