Sunday, June 28, 2026
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Sambhal mosque row: स्थानीय अदालत ने जामा मस्जिद मामले की सुनवाई 5 मार्च को करेगी, हाईकोर्ट ने लगाई 25 फरवरी तक सुनवाई पर रोक

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Sambhal mosque row: संभल की एक स्थानीय अदालत ने मुगलकालीन शाही जामा मस्जिद और उसके सर्वेक्षण से संबंधित मामले में अगली सुनवाई की तारीख 5 मार्च तय की है.

मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के सुनवाई पर रोक का आदेश दाखिल किया

मुस्लिम पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील शकील अहमद वारी ने संवाददाताओं को बताया कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की एक प्रति दाखिल की है, जिसमें सभी निचली अदालतों को अगले आदेश तक किसी भी पूजा स्थल के सर्वेक्षण की मांग करने वाले नए मुकदमों पर विचार न करने का निर्देश दिया गया है. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार शकील अहमद वारी ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने सभी निचली अदालतों को अगले आदेश तक किसी भी पूजा स्थल के सर्वेक्षण की मांग करने वाले नए मुकदमों पर विचार न करने का निर्देश दिया है. हमने उक्त आदेश की एक प्रति अदालत में दाखिल की है, जिसने सुनवाई की अगली तारीख 5 मार्च तय की है.”

हिंदू पक्ष के इस दावे पर कि मस्जिद प्राचीन हरिहर मंदिर के ऊपर बनाई गई थी, वारी ने कहा कि अदालत इस पर फैसला करेगी. उन्होंने कहा, “हम अदालत में साबित करेंगे कि यह हरिहर मंदिर नहीं बल्कि जामा मस्जिद थी. हमारे पास सारे सबूत हैं.”

Sambhal mosque row: हिंदू पक्ष ने भी आवेदन दायर किया

हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील गोपाल शर्मा ने पुष्टि की कि अदालत 5 मार्च को मामले की सुनवाई करेगी.
उन्होंने कहा, “हमने अदालत में एक आवेदन दायर कर मांग की है कि अब उन्हें जवाब देने का मौका नहीं मिलना चाहिए. अब मामले की सुनवाई 5 मार्च को होगी.”

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई 25 फरवरी तक सुनवाई पर रोक

इस बीच बुधवार को ही संभल के मंदिर मस्जिद विवाद को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी सुनवाई हुई. इस सुनवाई में हाईकोर्ट ने संभल के जिला कोर्ट में चल रहे मुकदमे की सुनवाई पर 25 फरवरी तक रोक लगा दी है.
हाईकोर्ट ने संभल की शाही जामा मस्जिद की इंतजामियां कमेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए रोक लगाई है. इसके साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सभी पक्षकारों को 4 हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है. जिसके बाद 2 हफ्ते में मस्जिद कमेटी अपना प्रत्युत्तर दाखिल करेगी.

संभल मस्जिद मामला क्या है

शाही जामा मस्जिद का सर्वेक्षण 19 नवंबर को एक अदालत के आदेश के बाद किया गया था. यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जैन द्वारा दायर एक याचिका पर आया था, जिसमें दावा किया गया था कि इस स्थल पर पहले एक मंदिर था.
24 नवंबर को जब मस्जिद का फिर से सर्वेक्षण किया जा रहा था, तब हिंसा भड़क उठी. प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प में चार लोग मारे गए और अन्य घायल हो गए. पुलिस के अनुसार, इस घटना में उनके 29 कर्मचारी घायल हो गए.
हिंसा के बाद, 29 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने संभल ट्रायल कोर्ट को शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण से संबंधित कोई भी आदेश पारित न करने का आदेश दिया था, साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को हिंसा प्रभावित शहर में शांति और सद्भाव बनाए रखने का निर्देश दिया था.

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