भारतीय सेना की बढ़ेगी ताकत,भारत फिर रुस से खरीदेगा S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम

S-400 Air Defense Missile , नई दिल्ली : भारत की रक्षा क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने आज एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई डिफेंस एक्युजेशन काउंसिल (DAC) की अहम बैठक में करीब 2.38 लाख करोड़ रुपये के रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. इस महा-डील में सबसे महत्वपूर्ण फैसला भारतीय वायुसेना के लिए रूस से S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की अतिरिक्त बैटरी की खरीद को लेकर लिया गया है.

S-400 के साथ वायुसेना को मिलेंगे ‘आसमान के रक्षक’

भारत ने साल 2018 में रूस के साथ 5 स्क्वाड्रन S-400 खरीदने के लिए 40,000 करोड़ की डील की थी. अब रक्षा मंत्रालय ने इसकी अतिरिक्त बैटरी को मंजूरी देकर वायुसेना के सुरक्षा कवच को और अभेद्य बना दिया है. इसके अलावा बैठक में निम्नलिखित बड़े फैसले लिए गए:

  • मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट: वायुसेना के पुराने हो रहे AN-32 और IL-76 बेड़े की जगह अब नए मध्यम परिवहन विमान शामिल किए जाएंगे।

  • रिमोटली पायलटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट: यह ड्रोन आक्रामक कार्रवाई के साथ-साथ स्टील्थ इंटेलिजेंस और निगरानी में मदद करेंगे।

  • Su-30 इंजन ओवरहाउल: सुखोई-30 लड़ाकू विमानों के इंजन एग्रीगेट्स के ओवरहाउल के प्रस्ताव को भी हरी झंडी मिली है।

भारतीय सेना के लिए ‘धनुष’ और आधुनिक सर्विलांस

केवल वायुसेना ही नहीं, बल्कि थल सेना के बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए भी कई महत्वपूर्ण हथियारों की खरीद पर मुहर लगी है . रक्षा मंत्रालय की बैठक में इन हथियारों की खरीद पर मुहर लगी है.

  1. धनुष गन सिस्टम: यह आर्टिलरी की ताकत बढ़ाएगा, जिससे सेना दुर्गम इलाकों में सटीक निशाना साध सकेगी.

  2. एयर डिफेंस ट्रैक्ड सिस्टम: सेना को रियल-टाइम वायु रक्षा नियंत्रण और रिपोर्टिंग क्षमता प्रदान करेगा.

  3. हाई कैपेसिटी रेडियो रिले: कठिन परिस्थितियों में भी निर्बाध और भरोसेमंद संचार सुनिश्चित करेगा.

  4. रनवे इंडिपेंडेंट एरियल सर्विलांस: बिना रनवे के भी टोही गतिविधियों को अंजाम दिया जा सकेगा.

तटरक्षक बल (Coast Guard) को मिलेंगे हाई-स्पीड व्हीकल्स

समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए DAC ने भारतीय तटरक्षक बल के लिए हेवी ड्यूटी एयर कुशन व्हीकल्स की खरीद को मंजूरी दी है.  इन वाहनों का उपयोग हाई-स्पीड तटीय पेट्रोलिंग और बचाव अभियानों में होगा. इसके साथ ही कर्मियों और लॉजिस्टिक को तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पहुंचाने में मदद मिलेगी. उम्मीद की जा रही है कि सरकार का ये  फैसला भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और रक्षा क्षेत्र में मजबूती की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा. 

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