RBI Monetary Policy: शुक्रवार को भारतीय रिज़र्व बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है. मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी के इस फैसले के बाद अब रेपो रेट 5.25% हो गई है. आरबीआई फिलहाल भारत की रिकॉर्ड-कम महंगाई को गिरते रुपये और 8% से ज़्यादा GDP ग्रोथ रेट के साथ बैलेंस करने की कोशिश कर रही है.
ब्लूमबर्ग के सर्वे में शामिल 44 इकोनॉमिस्ट में से ज़्यादातर को उम्मीद थी कि RBI शुक्रवार को अपने बेंचमार्क रीपरचेज रेट में चौथाई पॉइंट की कटौती करके इसे 5.25% कर देगा, क्योंकि महंगाई 4% के टारगेट से काफी नीचे है. लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था के तेज़ी से बढ़ने और रुपये के डॉलर के मुकाबले 90 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिरने के साथ, RBI के रुकने के भी कई कारण थे—जैसा कि सिटीग्रुप इंक., स्टैंडर्ड चार्टर्ड पीएलसी और स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ने अनुमान लगाया था.
RBI MPC के आज के फैसले के मुख्य बिंदु
भारत की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी द्वारा 3-5 दिसंबर की मीटिंग में लिए गए खास फैसलों पर एक नज़र:
RBI ने बेंचमार्क रीपरचेज रेट में 25 bps की कटौती करके इसे 5.25% कर दिया.
RBI ने आगे भी मॉनेटरी पॉलिसी का न्यूट्रल रुख बनाए रखा है.
RBI ने भारत की GDP ग्रोथ रेट पहले के 6.8% के मुकाबले 7.3% रहने का अनुमान लगाया है.
RBI ने FY26 में भारत की महंगाई दर पहले के 2.6% के मुकाबले 2% रहने का अनुमान लगाया है.
RBI Monetary Policy: क्यों मुश्किल लग रहा था रेपो रेट में कटौती का होना
पिछली दो मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग में रेपो रेट में कोई बदलाव न करने के बाद, RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पिछले महीने रेपो रेट में कटौती का रास्ता खोलते हुए कहा कि इसमें कटौती की “पक्की गुंजाइश” है. हालांकि, अगर तब से ऑफिशियल डेटा को देखे तो पता चला है कि भारतीय अर्थव्यवस्था 50% US टैरिफ के बावजूद मज़बूत साबित हो रही है, जबकि रुपया गिर रहा है.
स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के चीफ़ इकोनॉमिक एडवाइज़र और प्राइम मिनिस्टर की इकोनॉमिक एडवाइज़री काउंसिल के मेंबर सौम्या कांति घोष ने कहा कि इसके चलते, RBI के रेपो रेट में कटौती की उम्मीदें “कमज़ोर पड़ती दिख रही हैं,” और सेंट्रल बैंक लंबे समय तक यथा स्थिति बनाए रखने के दौर में जा रहा है.
पिछली MPC मीटिंग के बाद से रुपये में आई गिरावट ने शुक्रवार के फ़ैसले का अंदाज़ा लगाना और मुश्किल कर दिया है. भारत-US ट्रेड डील को लेकर अनिश्चितता के बीच RBI ने इस हफ़्ते करेंसी का ज़ोरदार बचाव करने के बाद इसे डॉलर के मुकाबले 90 के पार जाने दिया है.

