चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से कड़ी फटकार, कल तक भुगतान करने का आदेश

Rajpal Yadav Cheque Bounce Case नई दिल्ली : चेक बाउंस के मामलों में फंसे अभिनेता राजपाल यादव की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 5 अक्टूबर को अदालत के पिछले आदेश का पालन नहीं करने पर अभिनेता को कड़ी फटकार लगाई. सुनवाई के दौरान राजपाल यादव की ओर से केवल 50 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट की फोटोकॉपी पेश किए जाने पर भी अदालत ने सवाल उठाए. कोर्ट ने अब भुगतान के लिए उन्हें एक और अंतिम मौका दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि भुगतान 6 अक्टूबर तक किया जाए और मामले को 7 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सबसे पहले लिया जाएगा. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता को उसकी रकम मिल सके, इसलिए फिलहाल याचिका खारिज करने के बजाय अभिनेता को अंतिम अवसर दिया जा रहा है.

Rajpal Yadav Cheque Bounce Case:50 लाख के डिमांड ड्राफ्ट की फोटोकॉपी पर कोर्ट नाराज

सोमवार की सुनवाई में राजपाल यादव के वकील ने अदालत के सामने 50 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट की फोटोकॉपी पेश की. वकील की ओर से बताया गया कि ड्राफ्ट बैंक में प्रोसेस हो रहा है.

इस पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने दस्तावेज की वास्तविकता को लेकर सवाल उठाया. अदालत ने पूछा कि यह वास्तव में भुगतान का दस्तावेज है या नहीं, इसे कैसे सत्यापित किया जाए. कोर्ट का कहना था कि जब पहले से रकम जमा करने का स्पष्ट निर्देश दिया जा चुका है तो केवल प्रक्रिया में होने की जानकारी पर्याप्त नहीं है.

जस्टिस जॉयमाल्या बागची की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से अभिनेता के रवैये पर भी कोर्ट ने सवाल उठाए. इसके बाद राजपाल यादव के वकील की एक टिप्पणी पर जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.

अदालत ने टिप्पणी की कि इस तरह के रवैये को स्वीकार नहीं किया जा सकता और कहा कि “इस अहंकार को उसकी सही जगह पर रखना होगा”. जस्टिस बागची ने कहा कि आपकी सही जगह जेल है. जस्टिस बागची ने यह भी कहा कि अदालत के सामने कब और कैसे बोलना है, इसका ध्यान रखा जाना चाहिए.

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में राजपाल यादव की जगह जेल हो सकती है. हालांकि, अदालत ने तत्काल याचिका खारिज नहीं की, क्योंकि ऐसा होने पर शिकायतकर्ता के लिए रकम की वसूली प्रभावित हो सकती थी.

कोर्ट ने क्यों नहीं खारिज की राजपाल यादव की याचिका?

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान संकेत दिया कि वह अभिनेता की याचिका खारिज करने पर विचार कर रहा है लेकिन अदालत ने शिकायतकर्ता के हित को ध्यान में रखते हुए फिलहाल एक और मौका देने का फैसला किया.

अदालत की चिंता यह थी कि यदि याचिका तुरंत खारिज कर दी गई तो शिकायतकर्ता को बकाया रकम मिलने की संभावना प्रभावित हो सकती है. इसलिए कोर्ट ने भुगतान को प्राथमिकता देते हुए राजपाल यादव को अंतिम अवसर दिया.

7.5 करोड़ रुपये का विवाद क्या है?

यह मामला मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े चेक बाउंस के मामलों का है. विवाद की शुरुआत फिल्म निर्माण से जुड़े वित्तीय लेनदेन से हुई थी. रिपोर्टों के मुताबिक, राजपाल यादव और उनकी पत्नी से जुड़ी फिल्म निर्माण गतिविधियों के लिए कंपनी से करीब 5 करोड़ रुपये की रकम ली गई थी.

बाद में भुगतान को लेकर विवाद हुआ और सुरक्षा के तौर पर दिए गए चेक बाउंस होने के बाद मामला अदालत पहुंचा. समय के साथ ब्याज, लागत और अन्य देनदारियों के कारण विवादित रकम बढ़ती गई.

राजपाल यादव के खिलाफ इस मामले में सात चेक बाउंस मामलों में दोषसिद्धि हुई है. दिल्ली हाईकोर्ट ने जुलाई 2026 में उन्हें तीन महीने की जेल की सजा सुनाई थी. इसके बाद अभिनेता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.

सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी दी थी राहत

सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर में राजपाल यादव को तत्काल जेल जाने से अंतरिम राहत दी थी, लेकिन इसके लिए रकम जमा करने की शर्त रखी गई थी. 8 सितंबर को अदालत ने उन्हें अदालत की रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपये जमा करने की शर्त पर सरेंडर से राहत दी थी.

इसके बाद 15 सितंबर को अदालत ने दो सप्ताह का अतिरिक्त समय देते हुए 2 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया था. 5 अक्टूबर की सुनवाई में अदालत ने पाया कि उस निर्देश का भी पूरी तरह पालन नहीं हुआ.

बैंक में 50 लाख का ड्राफ्ट, लेकिन कोर्ट को चाहिए भुगतान

राजपाल यादव की ओर से अदालत में 50 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट की कॉपी पेश की गई.उनके वकील ने बताया कि ड्राफ्ट बैंक में प्रोसेस हो रहा है.

लेकिन अदालत ने साफ कर दिया कि केवल भुगतान की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी पर्याप्त नहीं है.कोर्ट के निर्देश के मुताबिक अब 6 अक्टूबर तक भुगतान की कार्रवाई पूरी करनी होगी. इसके बाद 7 अक्टूबर को मामले की अगली सुनवाई होगी.

अब 7 अक्टूबर की सुनवाई अहम

सुप्रीम कोर्ट ने मामले को 7 अक्टूबर को पहले केस के तौर पर सूचीबद्ध किया है. इसका मतलब है कि अगली सुनवाई में अदालत सबसे पहले यह देखेगी कि राजपाल यादव ने 6 अक्टूबर तक भुगतान संबंधी निर्देश का पालन किया या नहीं.

मौजूदा स्थिति में अदालत ने अभिनेता को एक और मौका जरूर दिया है,लेकिन सुनवाई के दौरान अदालत की सख्त टिप्पणियों से साफ है कि भुगतान संबंधी आदेश के अनुपालन को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है.

राजपाल यादव की याचिका पर आगे क्या होता है और उनकी अंतरिम राहत जारी रहती है या नहीं, यह अगली सुनवाई में स्पष्ट होगा. फिलहाल अदालत का मुख्य जोर शिकायतकर्ता को बकाया रकम दिलाने और अपने आदेश के अनुपालन पर है.

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