PM MODI Israel Visit : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय दो दिन की इज़राइल यात्रा पर हैं. यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नेतन्यहू के साथ पीएम मोदी का भी इजराइल की संसद को संबोधित करने का कार्य्रक्रम था. जैसे ही पीएम मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू संसद के सत्र के संयुक्त सत्र को संबोधित करने के लिए बैठे और बोलना शुरु किया संसद भवन में बैठे सभी विपक्षी सांसदों ने सदन से वॉक आउट कर दिया. इसे इजराइली पीएम बेंजमिन नेतन्याहू और पीएम मोदी के अपमान के तौर पर देखा गया लेकिन बाद में ये साफ किया गया कि विपक्षी सांसदों का उद्देश्य विदेशी मेहमान नरेंद्र मोदी का अपमान करना नहीं बल्कि ये सब इज़राइल की अंदरूनी राजनीति से जुड़ा था.
इजराइल की संसद में विरोध प्रदर्शन 👇
इजराइली संसद में जैसे ही मोदी का नाम पुकारा गया, वहां के विपक्ष ने बॉयकॉट कर दिया.
पूरा विपक्ष अपनी कुर्सी से उठा और संसद से बाहर चला गया.
दरअसल, ये विरोध इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का था, क्योंकि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के… pic.twitter.com/KJoj7jg43V
— Ranvijay Singh (@ranvijaylive) February 26, 2026
इजराइली विपक्ष ने क्यों किया विरोध
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इज़राइल की संसद (Knesset) में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन से ठीक पहले इजराइल की विपक्षी पार्टी याइर लैपिड के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने वॉकआउट किया. विपक्ष ने स्पीकर के साथ-साथ बीएम बेंजामिन नेतन्याहू की स्पीच का भी बहिष्कार किया.
बताया जा रहा है कि विपक्ष की नाराजगी के पीछे की मुख्य वजह चीफ जस्टिस को इस कार्यक्रम में ना बुलाना था. इज़राइल में परंपरा के मुताबिक किसी कार्यक्रम में जब संसद का संयुक्त सत्र बुलाया गया हो और पक्ष-विपक्ष के सभी सदस्य संसद में मौजूद हो तो सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (Isaac Amit / Yitzhak Amit) को इसमें बुलाया जाता है,लेकिन इस बार प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इस विशेष सत्र में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को आमंत्रित नहीं किया था.
चीफ जस्टिस की गैर मौजूदगी को विपक्ष ने माना अपमान
विपक्ष ने इसे संवैधानिक अपमान और न्यायपालिका के साथ चल रहे विवाद का हिस्सा बताया. उन्होंने कहा कि अगर चीफ जस्टिस को नहीं बुलाया जाता तो वे मोदी के भाषण का भी बहिष्कार कर सकते थे. बाद में विपक्षी नेता याइर लैपिड खुद मोदी का स्वागत करने लौटे और स्पष्ट कहा कि “यह विरोध आपसे (मोदी) संबंधित नहीं है, यह हमारी घरेलू राजनीति का मामला है”.
पीएम मोदी और नेतन्याहू की मौजूदगी के बावजूद संसद भवन में विपक्ष की कुर्सियां खाली रहीं. लोगों ने बीच-बीच में पीएम मोदी के नाम को लेकर तालियां भी बजाई और नारे भी लगाये .
भारत में भी पीएम की इजराइल यात्रा का विरोध
प्रधानमंत्री मोदी की इजराइल यात्रा का भारत में भी विरोध हो रहा है, खासकर वामपंथी पार्टियाँ जैसे CPI-M, CPI-ML ने पीएम मोदी की इजराइल यात्रा का विरोध किया है. वामपंथी पार्टियों का कहना है कि पीएम मोदी की यात्रा फिलिस्तीन के समर्थन को कमजोर करती है और गाजा में इज़राइल के द्वारा किये गये हिंसक कार्रवाइयों (जिनमें “नरसंहार” भी शामिल हैं) को समर्थन देती है.
हलांकि पीएम मोदी ने इस यात्रा को दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है. यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने आतंकवाद की निंदा की और दोनों देशों की दोस्ती पर जोर दिया है.
Deeply touched by the warm welcome extended by my friend, PM Netanyahu. May the India-Israel friendship continue to soar higher! 🇮🇳 🇮🇱@netanyahu pic.twitter.com/zl6Flj9wpz
— Narendra Modi (@narendramodi) February 25, 2026

