प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दोपहर चंडीगढ़ पहुंचे, पीएम ने यहां शिरोमणि अकाली दल के संरक्षक प्रकाश सिंह बादल के अंतिम दर्शन किए और उन्हें श्रद्धांजलि दी. सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने बादल को पंथ रतन फख्र-ए-कौम यानी प्राइड ऑफ दी फेथ की उपाधि से सम्मानित किया था. बादल का पार्थिव शरीर आज अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है. पूर्व सीएम बादल का अंतिम संस्कार गुरुवार को उनके गांव बादल में किया जाएगा.
#WATCH चंडीगढ़: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिरोमणि अकाली दल के संरक्षक प्रकाश सिंह बादल को श्रद्धांजलि दी। pic.twitter.com/tjNaD2F7Vv
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 26, 2023
पीएम ने ट्वीट कर जताया था दुख
इससे पहले पीएम मोदी ने ट्वीट कर बादल को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा था- “श्री प्रकाश सिंह बादल जी के निधन से अत्यंत दु:ख हुआ. वह भारतीय राजनीति की एक महान हस्ती थे, और एक उल्लेखनीय राजनेता थे जिन्होंने हमारे देश के लिए बहुत योगदान दिया. उन्होंने पंजाब की प्रगति के लिए अथक परिश्रम किया और कठिन समय में राज्य को सहारा दिया.“
Extremely saddened by the passing away of Shri Parkash Singh Badal Ji. He was a colossal figure of Indian politics, and a remarkable statesman who contributed greatly to our nation. He worked tirelessly for the progress of Punjab and anchored the state through critical times. pic.twitter.com/scx2K7KMCq
— Narendra Modi (@narendramodi) April 25, 2023
सभी पार्टियों के नेताओं ने बादल के निधन पर जताया दुख
पीएम के अलावा, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह, बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत तमाम राजनीतिक हस्तियों ने बादल के निधन पर दुख जताया और उन्हें श्रद्धांजलि दी है.
पंजाब के पांच बार के मुख्यमंत्री रहे बादल
मंगलवार (25 अप्रैल) को मोहाली के एक अस्पताल में रात आठ बजे प्रकाश सिंह बादल निधन हो गया. वो 95 साल के थे. प्रकाश सिंह बादल का जन्म 8 दिसंबर 1927 को पंजाब के बठिंडा के अबुल खुराना गांव में हुआ. बादल ने लाहौर के फॉरमैन क्रिश्चियन कॉलेज से स्नातक की डिग्री ली. उन्हेंने अपना पहला चुनाव कांग्रेस के टिकट पर सन 1957 में लड़ा. मलोट से कांग्रेस विधायक बन वो पंजाब विधानसभा में पहुंचे. फिर 1969 में उन्होंने अकाली दल के टिकट पर गिद्दड़बाहा विधानसभा सीट से चुनाव जीता और लगातार 1992 तक जीतते रहे. बादल ने अपना राजनीतिक सफर पंजाब के बठिंडा जिले के बादल गांव के सरपंच के तौर पर शुरु किया था. वह पांच बार के मुख्यमंत्री बने. साल 1992 में उन्होंने खुद ही चुनाव न लड़ने का एलान कर दिया था.
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