CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, वोटर लिस्ट विवाद में ऑडिट की मांग

सुप्रीम कोर्ट में एक पिटीशन फाइल की गई है जिसमें चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार CEC Gyanesh Kumar के खिलाफ एक्शन लेने की मांग की गई है. ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि उन्होंने बाकी दो इलेक्शन कमिश्नरों की मंज़ूरी के बिना इलेक्टोरल रोल्स के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर फैसले लिए.

SIR में लाखों नाम हटाने की इंडिपेंडेंट जांच हो- याचिकाकर्ता

वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की फाइल की गई पिटीशन में कोर्ट से इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया (ECI) के फैसलों को गैर-कानूनी घोषित करने और SIR के दौरान वोटर लिस्ट से लाखों नाम हटाने की इंडिपेंडेंट जांच की भी मांग की गई है.
इसमें 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR प्रोसेस में इस्तेमाल किए गए ECINet और ERONet डेटाबेस का फोरेंसिक ऑडिट करने की भी मांग की गई है और टॉप कोर्ट से यह पक्का करने को कहा गया है कि एप्लीकेशन से जुड़े सर्वर लॉग, डेटाबेस, कम्युनिकेशन और मेटाडेटा 1 अक्टूबर, 2025 से सुरक्षित रखे जाएं.

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद शक के घेरे में ज्ञानेश कुमार

याचिका द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद आई है जिसमें कहा गया है कि कुमार के दो सहयोगियों, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव पैनल के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी, जिसमें मतदाता सूची के एसआईआर से संबंधित फैसले भी शामिल थे.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मतदाता सूची के प्रभारी राज्य अधिकारियों ने भारत के चुनाव आयोग द्वारा लागू की गई नई तकनीक के कारण डेटाबेस तक पहुंचने में खुद को असमर्थ पाया.

वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और ECI महानिदेशक सीमा खन्ना के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग

याचिका में सीईसी के अलावा वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और ईसीआई महानिदेशक (सूचना प्रौद्योगिकी) सीमा खन्ना के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है. याचिका में आरोप लगाया गया कि गर्ग ने आयोग को दरकिनार करते हुए 28 जुलाई को अनधिकृत कार्य पुनर्आबंटन आदेश जारी किए और “आईटी प्रभाग पर प्रशासनिक निगरानी को खत्म करने” का प्रयास किया, जिसके कारण दोनों ईसी ने कैबिनेट सचिव को याचिका दायर की.

ECI ने अपनी सफाई में क्या कहा

वहीं, ECI ने अपने काम करने के तरीके की आलोचना और अंदरूनी असहमति की खबरों को गलत बताया है, और साफ़ किया है कि अलग-अलग विचार और राय किसी भी संस्था में बातचीत का एक आम हिस्सा हैं; कि ECINet समेत इसके सभी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, बिना इजाज़त छेड़छाड़ या हेरफेर को रोकने के लिए सख़्त डेटा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं; और इसके सभी काम कानूनी थे.

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