Monday, March 9, 2026

Parliament session: ‘नेहरू जी के योगदान पर नहीं लगा पाओगे काला दाग’, वंदे मातरम बहस में कांग्रेस ने पीएम मोदी दिया करारा जवाब

Parliament session: संसद के शीतकालीन सत्र के छठे दिन लोकसभा में वंदे मांतरम बहस में कांग्रेस और बीजेपी में जमकर आरोप प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं. लोकसभा में चर्चा की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस और आज़ादी के बड़े नेता और पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू पर जिन्ना के सामने घुटने टेक दिए और वंदे मातरम के साथ छेड़-छाड़ की. इसके जवाब में कांग्रेस MP गौरव गोगोई ने पीएम के करारा जवाब देते हुए कहा कि, ‘नेहरू जी के योगदान पर नहीं लगा पाओगे काला दाग’

‘नेहरू जी के योगदान पर नहीं लगा पाओगे काला दाग’-गौरव गोगोगई

लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोगई ने पंडित नेहरू को लेकर पीएम मोदी के बयान के जवाब में कहा कि पीएम हर बहस में नेहरू का नाम लेकर उनपर दाग लगाने की कोशिश करते है. उन्होंने कहा, “

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी विषय पर बोलने के समय पंडित नेहरू जी और कांग्रेस का नाम कितनी बार लेते हैं. ऑपरेशन सिंदूर- पंडित नेहरू जी का नाम 14 बार और कांग्रेस का नाम 50 बार
संविधान की 75वीं वर्षगांठ- पंडित नेहरू जी का नाम 10 बार और कांग्रेस का नाम 26 बार
2022 में राष्ट्रपति अभिभाषण- पंडित नेहरू जी का नाम 15 बार
2020 में राष्ट्रपति अभिभाषण- पंडित नेहरू जी का नाम 20 बार मैं बड़ी विनम्रता से नरेंद्र मोदी जी और उनके पूरे सिस्टम से कहना चाहता हूं.
आप जितनी भी कोशिश कर लें- पंडित नेहरू जी के योगदान पर एक भी काला दाग नहीं लगा पाएंगे”

Parliament session: इकलाब जिंदाबाद समेत कई नारों ने भारत को दी ताकत – गौरव गोगोगई

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने वंदे मातरम पर कहा, ‘झंडा ऊंचा रहे हमारा, इंकलाब जिंदाबाद, जय हिंद, सत्यमेव जयते, भारत छोड़ो जैसे कई गीत और नारे थे, जिन शब्दों ने हमारे स्वतंत्रता संग्राम में भारत के समाज को ताकत दी. मंगल पांडेय का जो विद्रोह था, उसकी विफलता के बाद भारत में एक बेचैनी थी और अंग्रेजों का जुल्म बढ़ गया था.’

लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता बताया की वंदे मातरम गीत असल में एक बार में नहीं बल्कि दो बार में लिखा और पूरा किया गया. उन्होंने कहा “ बंगाल की इस पवित्र भूमि में एक अद्भुत ताकत है. जिस भूमि ने हमारे देश को ना सिर्फ हमारा राष्ट्रगान दिया, बल्कि राष्ट्रगीत भी दिया. उस समय के कवि, लेखकों ने ऐसे शब्दों का प्रयोग किया, ऐसी कविताएं रची, ऐसे गीत रचे, जिनके शब्दों से लाखों स्वतंत्रता सेनानियों को अंग्रेजों का जुल्म सहने की ताकत मिली. वंदे मातरम्, रवींद्रनाथ टैगोर जी के Where the mind is without fear, झंडा ऊंचा रहे हमारा, सरफ़रोशी की तमन्ना, इंकलाब जिंदाबाद, करो या मरो, जय हिंद, सत्यमेव जयते और भारत छोड़ो जैसे नारों, गीतों ने देश और समाज को ताकत दी. मंगल पांडे जी के विद्रोह की असफलता के बाद भारत में एक बेचैनी थी. देश में अंग्रेजों का जुल्म बढ़ गया था. ऐसे में, बंकिम चंद्र चटर्जी जी ने 1872 में पहली दो पंक्तियां लिखीं, जो आज हमारे राष्ट्रगीत का भाग हैं. फिर बंकिम चंद्र चटर्जी जी ने करीब 9-10 साल बाद आनंदमठ लिखा, जहां पर उन दो पंक्तियों में उन्होंने कई और पंक्तियां जोड़ीं. आनंदमठ जब लिखा गया, तब ईस्ट इंडिया कंपनी हमारे किसानों पर ऐसे टैक्स लगा रही थी, जिसके कारण जीना बहुत मुश्किल हो गया था. “

गौरव गोगोइ ने दिया पीएम मोदी के आरोपों का विस्तरित जवाब

कांग्रेस के उपनेता ने पीएम मोदी पर राष्ट्रगीत के जरिए देश को बंटने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए कहा कि, ‘वंदे मातरम्’ एक नारा कैसे बना? असल में ये एक गीत था, जिसका उल्लेख आनंदमठ में मिलता है, लेकिन 1905 में ये एक राजनीतिक नारा बनकर सामने आया. 1905 में वायसराय कर्जन ने बंगाल के दो भाग कर दिए. कर्जन ने सोचा कि ऐसा कर वो बंगाल और पूरे देश पर एक गहरी चोट करेगा, लेकिन यही उसकी गलती थी. यही वो पल था, जब स्वतंत्रता संग्राम को स्वदेशी आंदोलन के जरिए एक गहरी ताकत मिली. जिसमें ये संदेश गया कि भारत को एक नई दृष्टि के साथ विद्रोह करना है. आने वाले समय में ‘वंदे मातरम्’ पूरे देश में बड़े व्यापक रूप से फैला. इसके पूरे देश में फैलने में कई माध्यमों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. पैम्फ्लेट और पब्लिकेशन के द्वारा बंगाल से निकला ये नारा पंजाब, महाराष्ट्र और मद्रास पहुंचा. ट्रांसलेशन के जरिए ‘वंदे मातरम्’ और आनंदमठ की व्याख्या और मूल भावना पूरे देश में पहुंची. धीरे-धीरे ‘वंदे मातरम्’ का ये नारा सिर्फ स्वतंत्रता सेनानियों तक नहीं रहा, छात्रों के बीच भी पहुंच गया.
उन्होंने पीएम मोदी के राष्ट्रगीत के साथ छेड़छाड़ के आरोप का जवाब देते हुए कहा, “साल 1937 में कांग्रेस वर्किंग कमेटी में यह निर्णय लिया गया था कि जहां पर भी नेशनल गैदरिंग होगी, वहां पर हम ‘वंदे मातरम’ की पंक्तियों को गाएंगे. मुस्लिम लीग और हिंदू महासभा ने इस निर्णय की खूब आलोचना की. इतना ही नहीं, मुस्लिम लीग और हिंदू महासभा ने इसे राजनीतिक रूप से देखा और कांग्रेस पार्टी की निंदा की. लेकिन अगर कांग्रेस पार्टी चलेगी तो वह किसी मुस्लिम लीग व हिंदू महासभा के द्वारा नहीं, बल्कि भारत की जनता के साथ चलेगी.”

कांग्रेस ने दिलाई बीजेपी को आज़ादी की लड़ाई में उसकी भूमिका

कांग्रेस नेता ने बीजेपी पर पलट वार करते हुए कहा, ‘वंदे मातरम्’ का नारा ब्रिटिश हुकूमत के विरोध में लगाया जाता था। हम ‘वंदे मातरम्’ का नारा अंग्रेजी हुकूमत के दिल में खौफ पैदा करने के लिए लगाते थे- ये इसका मूल भाव था. मैं पूछना चाहता हूं
⦁ आपके (BJP-RSS) राजनीतिक पूर्वजों ने ‘वंदे मातरम्’ की इस मंशा को कब पूरा किया?
⦁ आपके (BJP-RSS) राजनीतिक पूर्वजों ने ब्रिटिश हुकूमत का कब विरोध किया?

ये भी पढ़ें-Parliament session: वंदे मातरम पर चर्चा में बोले पीएम-वंदे मातरम में कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के दबाव में बदलाव किए

Latest news

Related news