Pakistan PM Shehbaz sharif : पड़ोसी देश पाकिस्तान भले ही गीदड़भवकियां देने में आगे हो लेकिन देश की आर्थिक बदहाली किसी से छिपी नहीं है. अब तक पाकिस्तान की आवाम ये कहती आ रही थी कि उनका देश केवल कर्ज के पैसों से चलता है लेकिन इस बार तो देश के प्रधानमंत्री ने ही मान लया है कि उनका देश आर्थिक रुप से बदहाल हो गया है और उनका देश अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और मित्र देशों से मिलने वाली आर्थिक मदद से की चल रहा है.
#Shehbaz_Sharif‘s Historic Surrender !!!!
I and Field Marshal went to beg for a loan! When you take a loan, you have to compromise; in such a situation, if any such wish arises, you have to concede it, no matter how unjustified it may be! pic.twitter.com/qkURNxshqe— Jawaira Khan 🇵🇰 (@jawaira_khan) January 31, 2026
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद एक सार्वजनिक मंच से बताया कि उनका देश कितना लाचार है. उन्होंने सार्वजनिक तौर से ये स्वीकार किया कि पाकिस्तान इस समय पूरी तरह से विदेशी आर्थिक मदद और बेलआउट पैकेज के भरोसे है. यही कारण है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान का सम्मान कम हुआ है.
Pakistan PM Shehbaz sharif ने क्या कहा ?
“मैं और फील्ड मार्शल लोन मांगने गए थे! जब आप लोन लेते हैं, तो आपको समझौता करना पड़ता है; ऐसी स्थिति में, अगर कोई ऐसी इच्छा होती है, तो आपको उसे मानना ही पड़ता है, चाहे वह कितनी भी गलत क्यों न हो!”
शहबाज शरीफ ने एक कार्यक्रम को दौरान कहा कि किस तरह से उन्हें अपना देश चलाने के लिए आईएमएफ और मित्र देशों के आगे आर्थिक मदद मांगनी पड़ती है. इस तरह से कर्ज मांगने के कारण उनके देश का सिर शर्म से झुक जाता है. उन्होंने कहा कि आईएमएफ और अपने मित्र देशों से कर्ज मांगने के लिए पाकिस्तान को अपने आत्मसम्मान और नीतियों से समझौता करना पड़ा है.
पीएम शहबाज ने लोगों के आगे भावुक होते हुए कहा, ‘मैं आपको कैसे बताऊं कि हमने किन-किन दोस्त मुल्कों के दर पर जाकर कर्ज की दरखास्तें दीं. उन मुल्कों ने हमें मायूस तो नहीं किया, लेकिन जो कर्ज लेने जाता है, उसका सिर हमेशा झुका रहता है.’
पीएम शहबाज ने कहा कि ‘जब कोई देश आर्थिक मदद मांगता है, तो उसे अपनी ‘इज्जत-ए-नफ्स’ (आत्मसम्मान) के साथ समझौता करना पड़ता है और कर्ज देने वालों की ऐसी शर्तें (Obligations) माननी पड़ती हैं, जिनका बोझ उठाना नामुमकिन होता है.’
आईएमएफ और दोस्त मुल्कों से मांगा कर्ज
पीएम शहबाज ने कहा कि कई बार वो खुद अधिकारियों के साथ अपने देश के कार्यक्रमों को बचाने के लिए आईएमएफ (IMF) और अन्य देशों के आगे बिलियन डॉलर्स की मदद मांगी है. ये बात तो जगजाहिर है कि आतंकवादियों के भरोसे चलाने वाली पाकिस्तान सरकार की अर्थव्यवस्था फिलहाल उधार के पैसे पर टिकी है. कर्ज में डूबे पाकिस्तान का हालत ये है कि उन्हें अंतराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) की शर्ते पूरी करने के लिए अपनी जनता पर भारी टैक्स लगाना पड़ रहा है और देश में महंगाई आसमान छू रही है.
पाकिस्तान ने किस-किस से लिया है कर्ज ?
अगर पाकिस्तान के कर्ज के आकड़े के बात करें तो ये देश ना केवल आईएमएफ और विश्व बैंक का कर्जदार है,बल्कि इन्होने चीन और सऊदी अरब से भी भारी कर्ज लिया हुआ है. आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तान के उपर दिसंबर 2025 तक कुल विदेशी ऋण लगभग 52.366 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है.
जानकारों को मानना है कि अब पीएम शहबाज दुनिया के सामने इसलिए अपने देश के कर्ज की बात कर रहे हैं, क्योंकि वो जानते हैं कि उनका देश अब पूरी तरह से कर्ज के जाल मे फंस चुका है और अपने राष्ट्र को जिंदा रखने के लिए उनके पास अब अपनी संप्रभुता से समझौता करने के सिवा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है.

