Tuesday, January 13, 2026

Asaduddin Owaisi का चुनाव आयोग पर आरोप, “चुनाव से पहले बिहार में चुपचाप NRC लागू किया जा रहा है”

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी Asaduddin Owaisi ने चुनाव आयोग पर आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बिहार में गुप्त रूप से राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू करने का आरोप लगाया.
ओवैसी ने चेतावनी दी कि इससे कई सही भारतीय नागरिक मतदान करने से वंचित हो सकते हैं और चुनाव से पहले चुनाव आयोग में जनता का विश्वास कम हो सकता है.
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि नए नियमों के तहत लोगों को अपने और अपने माता-पिता के जन्म के विवरण को दस्तावेजों के माध्यम से साबित करना होगा, जो कई गरीब नागरिकों, खासकर बाढ़ प्रभावित सीमांचल के लोगों के पास नहीं है.

“निर्वाचन आयोग बिहार में गुप्त तरीक़े से एनआरसी लागू कर रहा है”

एक्स पर एक पोस्ट में असदुद्दीन ओवैसी ने लिखा, “निर्वाचन आयोग बिहार में गुप्त तरीक़े से एनआरसी लागू कर रहा है. वोटर लिस्ट में नाम दर्ज करवाने के लिए अब हर नागरिक को दस्तावेज़ों के ज़रिए साबित करना होगा कि वह कब और कहाँ पैदा हुए थे, और साथ ही यह भी कि उनके माता-पिता कब और कहाँ पैदा हुए थे. विश्वसनीय अनुमानों के अनुसार भी केवल तीन-चौथाई जन्म ही पंजीकृत होते हैं. ज़्यादातर सरकारी कागज़ों में भारी ग़लतियाँ होती हैं. बाढ़ प्रभावित सीमांचल क्षेत्र के लोग सबसे ग़रीब हैं, वे मुश्किल से दिन में दो बार खाना खा पाते हैं. ऐसे में उनसे यह अपेक्षा करना कि उनके पास अपने माता-पिता के दस्तावेज़ होंगे, एक क्रूर मज़ाक़ है.”
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 1995 में ही ऐसी प्रक्रियाओं पर सख्त सवाल उठाए थे.

पोस्ट में लिखा है, ” इस प्रक्रिया का परिणाम यह होगा कि बिहार के ग़रीबों की बड़ी संख्या को वोटर लिस्ट से बाहर कर दिया जाएगा. वोटर लिस्ट में अपना नाम भर्ती करना हर भारतीय का संवैधानिक अधिकार है. सुप्रीम कोर्ट ने 1995 में ही ऐसी मनमानी प्रक्रियाओं पर सख़्त सवाल उठाए थे. चुनाव के इतने क़रीब इस तरह की कार्रवाई शुरू करने से लोगों का निर्वाचन आयोग पर भरोसा कमज़ोर हो जाएगा.”

Asaduddin Owaisi ने विस्तार से बताया की किसे देने होंगे कौन से दस्तावेज

उन्होंने कहा कि बिहार में लोगों को मतदाता सूची में बने रहने के लिए विस्तृत जन्म दस्तावेज दिखाने होंगे, जो इस बात पर निर्भर करता है कि वे कब पैदा हुए हैं.
पोस्ट में आगे लिखा है, “अगर आपकी जन्मतिथि जुलाई 1987 से पहले की है, तो आपको जन्म की तारीख और/या जन्म स्थान दिखाने वाला कोई एक दस्तावेज़ देना होगा (11 में से एक). अगर आपका जन्म 01.07.1987 और 02.12.2004 के बीच हुआ है, तो आपको अपना जन्म प्रमाण (तारीख और स्थान) दिखाने वाला एक दस्तावेज़ देना होगा, और साथ ही अपने माता या पिता में से किसी एक की जन्म तारीख और जन्म स्थान का दस्तावेज़ भी देना होगा. अगर आपका जन्म 02.12.2004 के बाद हुआ है, तो आपको अपनी जन्म तारीख और स्थान के दस्तावेज़ के साथ-साथ, दोनों माता-पिता के जन्म की तारीख और स्थान को साबित करने वाले दस्तावेज़ भी देने होंगे. अगर माता या पिता में से कोई भारतीय नागरिक नहीं है, तो उस समय के उनका पासपोर्ट और वीज़ा भी देना होगा.”

लाल बाबू हुसैन केस (1995) में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

ओवैसी ने कहा कि चुनाव आयोग एक महीने के भीतर बिहार में घर-घर जाकर मतदाताओं की जांच पूरी करने की योजना बना रहा है, लेकिन खराब कनेक्टिविटी और अधिक आबादी वाले राज्य में यह अनुचित है.
उन्होंने 1995 के सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि मतदाताओं को बिना नोटिस और उचित प्रक्रिया के हटाया नहीं जा सकता. कोर्ट ने यह भी कहा कि नागरिकता का आकलन केवल कुछ दस्तावेजों के आधार पर नहीं किया जा सकता है, और सभी तरह के वैध सबूतों को स्वीकार किया जाना चाहिए.

पोस्ट में लिखा गया है, ” चुनाव आयोग (ECI) हर वोटर की जानकारी एक महीने (जून-जुलाई) में घर-घर जाकर इकट्ठा करना चाहता है. बिहार जैसे राज्य, जो बहुत बड़ी आबादी और कम कनेक्टिविटी वाला है, वहां इस तरह की प्रक्रिया को निष्पक्ष तरीके से करना लगभग असंभव है.
लाल बाबू हुसैन केस (1995) में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि किसी व्यक्ति को, जो पहले से वोटर लिस्ट में दर्ज है, बिना सूचना और उचित प्रक्रिया के हटाया नहीं जा सकता. ये चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह दिखाए कि किसी व्यक्ति को विदेशी क्यों माना जा रहा है. सबसे अहम बात, कोर्ट ने ये भी कहा कि नागरिकता साबित करने के लिए दस्तावेज़ों की एक सीमित सूची नहीं हो सकती—हर तरह के सबूत को स्वीकार किया जाना चाहिए.”
बिहार में इस वर्ष अक्टूबर या नवम्बर में चुनाव होने की उम्मीद है; हालांकि, भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) ने अभी तक आधिकारिक तारीख की घोषणा नहीं की है.

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