Nimisha Priya Hanging Sentence Postponed : केरल की नर्स निमिषा प्रिया को लेकर एक बड़ी खबर आई है. खबर है कि निमिषा प्रिया की फांसी की सजा टल गई है. भारत सरकार के विदेश मंत्रालय से राहत भरी जानकारी सामने आई है कि राजनयिक प्रयासों और धार्मिक नेताओं की मध्यस्थता के परिणामस्वरुप आखिरी समय में भारतीय नागरिक निमिषा प्रिया को दी जाने वाली फांसी की सजा टाल दी गई है.
Sources
Indian govt which has since the beginning of the case been rendering all possible assistance in the matter, has made concerted efforts in recent days to seek more time for the family of Nimishapriya to reach a mutually agreeable solution with the other party.— Sidhant Sibal (@sidhant) July 15, 2025
Nimisha Priya Hanging Sentence Postponed
दरअसल निमिषा प्रिया को यमन के कानून के मुताबिक एक व्यक्ति की मौत का दोषी पाये जाने के बाद फांसी की सजा सुनाई गई थी. 16 जुलाई को निमिषा की फांसी की तारीख मुकर्रर की गई थी.
भारत के मुफ्ति यमन के स्कॉलर के जरिये बातचात की कर रहे थे कोशिश
निमिषा की फांसी की सजा रोकने के लिए भारत के एक मुफ्ती और सुन्नी मुस्लिम समुदाय से आने वाले नेता एपी अबू बकर मुसलियार ने दखल दिया था. उन्होंने यमन की सरकार से निमिषा को माफ करने की अपील की है. इसके साथ ही मुसलियार ने मृतक तलाल अबदो मेहदी के परिवार से भी संपर्क किया. मुसलियार ने कुछ अन्य मुस्लिम नेताओं के साथ मिलकर निमिषा प्रिया की जान बचाने के लिए मेहदी परिवार से बातचीत की पेशकश की थी.जिसे मानते हुए मेहदी परिवार सजा को तामील किये जाने के एक दिन पहले बातचीत के लिए आखिरकार तैयार हो गया.
मेहदी परिवार के साथ कैसे संभव हुई बैठक ?
दरअसल इस मामले में डिप्लोमेटिक तरीके से भारत सरकार के द्वारा की जा रही कोशिशें फेल हो जाने के बाद मुफ्ति अबू बकर मुसलियार ने यमन के मशहूर मुस्लिम स्कॉलर और दोस्त शेख हबीब उमर के माध्यम से परिवार तक पहुंचने की कोशिश कोशिश की थी.
इस बीच भारत का विदेश मंत्रालय भी लगातार कोशिशें कर रहा था. सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय अधिकारियों से कहा था कि सरकार को हर संभव कोशिश करनी चाहिये. ये मामला दुर्भाग्यपूर्ण है.
यमन के स्कॉलर शेख हबीब के अनुरोध पर मृतक तलाल अबदो मेहदी के परिजन और हुदैदा स्टेट कोर्ट के जस्टिस यमन की शहर दमार पहुंचे थे. यमन के स्कॉलर शेख हबीब यमन की शूरा काउंसिल में सदस्य के तौर पर जुड़े हुए हैं. इसलिए माना जा रहा है कि उनके राजनीति प्रभाव के कारण भी सजा को टालने में मदद मिली. शेख हबीब उमर की दखल के बाद ही पीड़ित तलाल परिवार अपनी मांगों पर दोबारा विचार के लिए तैयार हुआ था.
निमिषा प्रिया को क्यों मिली थी फांसी की सजा ?
केरल के पलक्कड़ जिले की रहने वाली वाली निमिषा प्रिया यमन में बातौर नर्स की काम करती थी. 2020 में प्रिया पर एक यमनी नागरिक की हत्या का आरोप लगा जिसके बाद उसे फांसी की सजा सुनाई गई.मारा गया व्यक्ति उसका बिजनेस साझेदार था. घटना जुलाई 2017 में घटी थी. फिर प्रिया का मामला अदालत में चलता रहा. आखिरकार 2024 में यमन की सर्वोच्च अदालत ने उसकी मांफी की अपील खारिज कर दी और मौत के बदले मौत सजा सुनाते हुए आदेश दिया कि उसे बुधवार 16 जुलाई को को फांसी दे दी जाए.