New Criminal Law : देश भर में बीती आधी रात से नए आपराधिक कानून लागू कर दिये गए हैं. भारतीय न्याय संहिता(BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता(BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) बनाये गये हैं जो अंग्रेजी शासन काल के भारतीय दंड संहिता, आपराधिक प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह पर लागू हुए हैं. नये कानूनों के तहत 6 तरह के अपराधों में सजा के तौर पर कम्युनिटी सर्विस /समाज सेवा का प्रावधान किया गया है.
New Criminal Law : आइये आपको बताते है नये कानून में क्या है खास :
- देश भर में एक जुलाई से पहले जो भी केस दर्ज हुए हैं, उनपर नये कानून का असर नहीं होगा. यैनी एक जुलाई से पहले दर्ज हुए मामले में कार्रवाई पुराने कानून के हिसाब से ही होगा.
- नये कानू के तहत जो FIR एक जुलाई से दर्ज होंगे केवल उनपर ही नये कानून के तहत कार्रवाई होगी.जांच से लेकर पूरा ट्रायल नये कानू के नियमों के तहत होगा.
- BNSS यानी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में 531 धाराएं हैं. जिनमें 177 प्रावधानों को संशोधित किया गया है.14 धाराएं हटा दी गई हैं. इसमें 9 नई और 39 उप धाराएं जोड़ी गई हैं.नये कानून से पहले CrPC में 484 धाराएं थीं.
- भारतीय न्याय संहिता (BNS) में 357 धाराएं हैं, जबकि IPC में 511 धाराएं हुआ करती थीं.
- इसी तरह भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) में 170 धाराएं हैं. BSA में 6 पुरानी धाराओं को हटा कर 2 नई धाराएं और 6 उप धाराएं जोड़ी गई हैं. पहले पहले भारतीय साक्ष्य अधिनियम (इंडियन एविडेंस एक्ट) में कुल 167 धाराएं थीं.
- नए कानून में विजुएल साक्ष्य यानी ऑडियो-वीडियो या कोई भी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को मान्यता दी गई है.नये कानून में फॉरेंसिंक जांच को प्रमुखता से जोड़ा गया है.
- देश भर में कहीं भी, कोई भी नागरिक किसी अपराध के सिलसिले में जीरो FIR दर्ज करा सकेगा. FIR के बाद मामले को संबंधित थाने में भेजा जाएगा.अगर ZERO FIR किसी ऐसे अपराध से जुड़ा है, जिसमें 3 से 7 साल तक की सजा का प्रावधान है तो फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई होगी.
- नये आपराधिक कानून में ई-सूचना ( E-Enformetion) य़ानी इमेल के जरिये भी FIR दर्ज हो सकेगी. हत्या,लूट , बलात्कार जैसे गंभीर अपराधो के लिए भी E-FIR दर्होज हो सकेगी.याची वॉइस रिकॉर्डिंग करके भी पुलिस को सूचना दे सकते हैं. E-FIR के मामले में याची को को 3 दिन के अंदर संबंधित थाने में पहुंचकर FIR की प्रति पर हस्ताक्षर लेना जरूरी होगा.
- शिकायतकर्ता को FIR और बयान से जुड़े दस्तावेज भी देने अनिवार्य होंगे . शिकायतकर्ता आगर चाहे तो पुलिस से आरेपी की हुई पूछताछ को भी साक्ष्य के तौर पर ले सकता है.
- नये कानून के तहच FIR करने के तीन हीने या 90 दिन के भीतर चार्जशीट दर्ज करनी जरूरी होगा. चार्जशीट दाखिल होने के 60 दिन के भीतर कोर्ट को भी आरोप तय करने होंगे.
- नये कानू के तहत न्यायालय के व्यवस्था में भी ताजी लाने का प्रयास शामिल है. अदलत को मामले में सुनवाई पूरी होने के एक महीने या 30 दिन के भीतर फैसला देना होगा.जजमेंट दिए जाने के बाद 7 दिनों के अंदर जजमेंट की कॉपी भी फरियादी को मुहैया करानी होगी.
- नये कानून के तहत पुलिस अगर किसी को हिरासत मेे लेती है तो उसे व्यक्ति के बारे में परिवार को लिखित में जानकारी देनी होगी. पुलिस को आन लाईन और ऑफलाइन दोनों तरह से सूचना पहुंचानी होगी.
- बच्चों और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के लिए भारतीय न्याय संहिता(BNS) में 36 धाराओं के अंदर प्रावधान किये गये हैं. बलात्कार का केस अब धारा 63 के अंदर दर्ज होगा. धारा 64 मके तहत दोषी को अधिकतम उम्र कैद और न्यूनतम 10 साल की कैद का प्रावधान है.
- 16 साल से कम आयु के व्यक्ति से दुष्कर्म के मामले मे दोषी पाये जाने पर धारा 65 के तहत 20 साल का कठोर कारावास, आजवीन कारावास और जुर्माने का प्रावधान है. गैंगरेप के मामले को सख्त बनाा गया है , इस में पीड़िता अगर बालिग है तो अपराधी को उम्र कैद का प्रावधान है.
- 12 साल से कम उम्र की पीड़िता के साथ ब’लात्कार के मामले में दोषी को कम से कम 20 साल की सजा, उम्र कैद या फिर मृत्युदंड का प्रावधान है. नये कानून में शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने जैसे अपराध को बला’त्कार से अलग अपराध की श्रेणी में रखा गया है.यानी अब इस मामले को अब रेप की तरह अपराध नहीं मान गया है.
- पीड़ितों को उसके केस से जुड़ी हर अपडेट की जानकारी उसके मोबाइल नंबर पर SMS के माध्यम से दी जाएगी.मामले में अपडेट देने की सीमा 90 दिन रखी गई है.
- नये कानून में राज्य सरकारें राजनीतिक मामलों में हुए केस को एकतरफा बंद नहीं कर पायेगी. अगर धरना-प्रदर्शनया किसी तरह के उपद्रव में आम नागरिक की क्षति हुई है तो उसकी मंजूरी लेनी जरुरी होगी.
- गवाहों की सुरक्षा के लिए भी नये कानू के तहत प्रावधा किये गये है. इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को भी कोर्ट में कागजी दस्तवेज की तरह मान्यता मिलेगी, और ये साक्ष्य की तरह कोर्ट में मान्य होंगे.
- नये कानू में मॉब लिंचिंग को अपराध के दायरे में रखा गया है. किसी को शरीरिक चोट पहुंचाने वाले अपराध को धारा 100-146 के अंतर्गत रखा गया है. मॉब लिंचिंग के अपराध में 7 साल की जेल या आजीवन कारावास या फांसी तक की सजा का प्रावधान है. हत्या के मामले में धारा 103 के तहत मामला दर्ज होगा.संगठित अपराध के लिए धारा 111, टेरर एक्ट के लिए धारा 113 बनाया गया है.
- चुनावी में हुए अपराध को धारा 169-177के अंतर्गत रखा गया है. चोरी, लूट और डकैती, संपत्ति को नुकसान आदि मामले को धारा 303 से लेकर 334 तक की धाराओं में रखा गया है. मानहानि को धारा 356 के अंतर्गत रखा गया है.
- दहेज हत्या के लिए धारा 79 में और दहेज के कारण प्रताड़ना के लिए धारा 84 बनाया गया है.

