Mohan Bhagwat 3 Child Policy : राष्ट्रीय स्वंय सेवक प्रमुख मोहन भागवत ने भारत में जनसंख्या नीति पर एक बायन देकर नई बहस छेड़ दे ही है. एक तरफ जहां भारत दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाला देश (140 करोड़) बन चुका है, वहीं आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत लोगों से दो बच्चों की नीति छोड़ तीन बच्चों की नीति अपनाने की बात कह रहे हैं. आसएसएस की स्थापना के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान लोगों के संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने ये बात कही.
100 Years of Sangh Journey
Doctors tell me that having three children is ideal, because it helps them learn how to manage ego among themselves within the household: RSS Chief Mohan Bhagwat. pic.twitter.com/twFDU2shmG
— TIMES NOW (@TimesNow) August 28, 2025
Mohan Bhagwat 3 Child Policy : आरएसएस के सौ वर्ष पूरे होने पर आयोजित व्याख्यानमाला
आरएसएस के सौ वर्ष पूरे होने के अवसर पर राजधानी दिल्ली में आरएसएस ने एक व्याख्यानमाला का आयोजन किया जिसका विषय रखा गया – ‘100 वर्ष की संघ यात्रा: नए क्षितिज’
इसी कार्यक्रम के बीच तीसरे दिन संघ प्रमुख ने संवाददाता सम्मेलन के दौरान पत्रकारों के सवालों के जवाब दिये. इसी दौरान उन्होंने देश में नई जनसंख्या नीति पर भी बात की. संघ प्रमुख ने एक सवाल के जवाब में बड़ा बयान देते हुए कहा कि अब हामारे देश में ‘हम दो और हमारे तीन’ की पॉलिसी होनी चाहिए.
भागवत ने कहा कि शास्त्र कहते हैं कि जन्मदर 3 से कम हो तो वो प्रजाती धीरे-धीरे लुप्त हो जाती हैं. जन्मदर 3 को मेनटेन करना चाहिए. सारे समाज ऐसा करते हैं. भागवत ने कहा कि डॉक्टर कहते हैं कि “तीन संतान होने से संतान और उनके माता-पिता का स्वास्थ्य अच्छा रहता है.बच्चे आपस में ईगो मैनेजमेंट सीख लेते हैं, झगड़े नहीं होते.”
संघ प्रमुख ने अपना तर्क रखते हुए कहा कि देश का एवरेज 2.1 है. ये गणित में चल सकता है लेकिन मनुष्यों में 2.1 का मतलब तीन होता है . भारत के प्रत्येक नागरिक ये को सोचना चाहिए कि उसके घर में तीन बच्चे हों. हां लेकिन जब आपके तीन बच्चे होंगे तो उनका खर्च भी उठाना पड़ेगा, इस लिए तीन से आगे न बढ़ें. इसे सब लोगों को स्वीकार करना चाहिए.
मोहन भागवत ने कहा कि सभी में जन्मदर कम हो रहे हैं.हिंदुओं में जन्मदर पहले से ही कम था और अब और कम हो रहा है. तीन बच्चे से कम नहीं करना चाहिये. इसलिए जिन लोगों के हाथ में ये है,उन्हें नई पीढ़ी तो तैयार करनी ही चाहिये.