CWC में SIR पर जमकर बरसे मल्लिकार्जुन खड़गे, ‘वोट-नोटबंदी’ को लेकर PM मोदी से मांगा इस्तीफा

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) ड्राइव के तहत वोटर लिस्ट से नाम हटाने को “वोट-नोटबंदी” जैसा बताते हुए, कांग्रेस प्रेसिडेंट मल्लिकार्जुन खड़गे Mallikarjun Kharge ने मंगलवार को गड़बड़ियों को लेकर चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की और इलेक्शन प्रोसेस में ट्रांसपेरेंसी पक्का करने के लिए मांगों की पांच-पॉइंट लिस्ट जारी की.
खड़गे ने यह भी मांग की कि CEC पर “दबाव” डालने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए.

जिन वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं, उन्हें पूरी जानकारी दी जानी चाहिए- खड़गे

मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए, खड़गे ने यह भी मांग की कि जिन वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं, उन्हें पूरी जानकारी दी जानी चाहिए और अपील करने का मौका दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि राजनीतिक पार्टियों को समय पर एक आसान फॉर्मेट में वोटर लिस्ट और ज़रूरी डेटा दिया जाना चाहिए.
ज्ञानेश कुमार की अगुवाई वाली ECI पर कांग्रेस के तीखे हमले SIR प्रोसेस के लेकर किए गए हैं. जिसकी वजह से करीब 130 मिलियन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद विपक्ष ने यह हमला और तेज़ कर दिया है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में ECI के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार ऑफिशियली आपत्ति जताई है. इसमें वोटरों के नाम जोड़ने, हटाने और वापस लाने और वोटर रजिस्ट्रेशन प्रोसेस में बदलाव शामिल हैं.

ज्ञानेश कुमार सत्ता की “कठपुतली” – Mallikarjun Kharge

खड़गे ने चुनाव प्रोसेस से जुड़े ज़रूरी डेटा और फैसलों में ट्रांसपेरेंसी की भी मांग की ताकि किसी भी पार्टी को यह न लगे कि जानकारी छिपाई जा रही है.
अपनी शुरुआती स्पीच में, खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार दोनों पर तीखा हमला किया और उन्हें सत्ताधारी सरकार की “कठपुतली” कहा.

पीएम “वोट-डीमोनेटाइजेशन” के जरिए हमारी मज़बूत डेमोक्रेसी को खत्म कर रहे हैं-खड़गे

खड़गे ने कहा, “इतिहास गवाह है कि दस साल पहले, इसी प्रधानमंत्री ने “डीमोनेटाइजेशन” के फैसले से भारत की इकॉनमी को तबाह कर दिया था. और अब, दस साल बाद, वह “वोट-डीमोनेटाइजेशन” (मताधिकार छीनने) की साज़िश के ज़रिए हमारी मज़बूत डेमोक्रेसी को खत्म कर रहे हैं.”
कांग्रेस प्रेसिडेंट ने कहा, “उनकी सभी गलत पॉलिसी का खामियाजा गरीबों को भुगतना पड़ रहा है. डीमोनेटाइजेशन के दौरान, गरीब लाइनों में खड़े थे; वोटरों को वोट देने से वंचित करने के इस कदम से, गरीबों को पूरी तरह से लाइन से बाहर कर दिया जा रहा है. मुझे पता है कि गरीबों के पास ताकत का सिर्फ़ एक ही ज़रिया है: उनका वोट. हम इसे किसी भी हालत में छीनने नहीं देंगे,”

“मोदी जी यह अधिकार छीनना चाहते हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे.”

खड़गे ने कहा कि वोट गरीबों, दलितों, वंचितों और समाज के शोषित तबकों के लिए सबसे बड़ा हथियार है. इसीलिए “मोदी जी यह अधिकार छीनना चाहते हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे.”
CEC के गरीबों को वोट देने से रोकने की कोशिश पर खड़गे ने कहा, “रक्षक ही शिकारी बन गया है.”
उन्होंने कहा, “संविधान से मिली ताकत—जिसका काम लोगों के वोट का रखवाला होना है—वो वोटों का लुटेरा बन गया है। देश ऐसे चीफ इलेक्शन कमिश्नर पर कैसे भरोसा कर सकता है जिस पर उसके अपने साथी भी भरोसा नहीं करते?”
CWC की मीटिंग बुधवार को ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष की बड़ी मीटिंग से पहले हो रही है, जिसमें CEC के खिलाफ अगले राजनीतिक कदम का फैसला किया जाएगा.

Gen Z को पहले नौकरी नहीं दी अब वोट छीनने की साजिश कर रहे हैं मोदी- खड़गे

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के वोट देने की उम्र 21 से घटाकर 18 करने के फैसले को याद करते हुए खड़गे ने कहा, “इसके उलट, हमारे पास प्रधानमंत्री मोदी हैं, जो Gen Z से इतने नाराज़ हैं कि उन्होंने युवाओं को वोट देने से रोकने की साज़िश रची है. उन्होंने चुपचाप ‘फॉर्म 6’ से जुड़े नियम बदल दिए. यह पूरी तरह से गैर-कानूनी है.”
खड़गे ने कहा, “वे नौकरियां देने में नाकाम रहे, और अब वे वोट देने के अधिकार को भी छीनना चाहते हैं. उन्हें डर है कि युवा सवाल पूछेंगे और आखिरकार उन्हें सत्ता से हटा देंगे. हालांकि, यह अधिकार किसी दान में नहीं मिला; लाखों लोगों ने इसके लिए कुर्बानी दी है. मोदी और शाह जैसे लोग चाहे कितनी भी साज़िशें रच लें, कांग्रेस उन्हें कामयाब नहीं होने देगी. डेमोक्रेसी और वोट देने का अधिकार हमारी विरासत है—जिसे हमने अपने खून-पसीने से सींचा है. हम किसी भी तानाशाह को इसे खत्म नहीं करने देंगे.”

हमारे सवालों का मकसद इन इंस्टीट्यूशन को कमज़ोर करना नहीं है- खड़गे

कांग्रेस अध्यक्ष ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की भी तारीफ़ की कि उन्होंने “वोट चोरी” का मुद्दा सबसे आगे लाया, और कहा कि पार्टी की आलोचना का मकसद इंस्टीट्यूशनल क्रेडिबिलिटी वापस लाना है. उन्होंने कहा, “हमारे सवालों का मकसद इन इंस्टीट्यूशन को कमज़ोर करना नहीं है; बल्कि, हम चाहते हैं कि इलेक्शन कमीशन इतना मज़बूत और भरोसेमंद हो कि रूलिंग पार्टी और अपोज़िशन दोनों उसके फ़ैसलों पर बराबर भरोसा करें.”

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