Mediator Pakistan:नई दिल्ली/वॉशिंगटन: मिडिल ईस्ट में जारी ईरान युद्ध के लगभग चार हफ्ते बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई फोन कॉल ने वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है. यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की पेशकश की है और ट्रंप ने इस पर अपनी सहमति भी जताई .
भारत को साधने की कोशिश में किया कॉल?
जियो-पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप का अचानक पीएम मोदी को फोन करना और भारत से संपर्क बढ़ाना एक प्रकार का ‘डैमेज कंट्रोल’ है. दरअसल, पाकिस्तान का इस जंग में प्रमुख मध्यस्थ (Mediator) बनकर उभरना भारत के लिए कूटनीतिक रूप से असहज करने वाली स्थिति है. ट्रंप शायद यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि भारत इस घटनाक्रम को व्यक्तिगत रूप से न ले और दोनों देशों के रिश्तों में कोई दरार ना आए.
होर्मुज जलडमरूमध्य : दुनिया की लाइफलाइन पर खतरा
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि इस बातचीत का मुख्य केंद्र मिडिल ईस्ट की स्थिति और होर्मुज (Hormuz) के रास्ते को खुला रखना था. दुनिया की 20% तेल और गैस सप्लाई इसी रास्ते से होती है.भारत अपनी 90% ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है.युद्ध के कारण तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे भारत ‘पीड़ित’ और ‘भागीदार’ दोनों भूमिकाओं में है.
ईरान युद्ध और भारत की ‘बैलेंसिंग एक्ट’ नीति
भारत इस पूरे विवाद में बेहद संतुलित कूटनीति अपना रहा है. एक तरफ जहां भारत ने ईरान और खाड़ी देशों से संबंध बनाए रखे हैं, वहीं दूसरी तरफ इजराइल और अमेरिका के साथ भी कूटनीतिक तालमेल बिठाया है.
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ऊर्जा सुरक्षा: मोदी सरकार की प्राथमिकता कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति है।
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बैकचैनल डिप्लोमेसी: भारत ने मिस्र और ओमान जैसे देशों के साथ मिलकर पर्दे के पीछे से तनाव कम करने की कोशिश की है।
पाकिस्तान की ‘एंट्री’ और घरेलू राजनीति
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मध्यस्थता की इच्छा के पीछे उसकी अपनी मजबूरी और रणनीति है. पाकिस्तान अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारना चाहता है हालांकि, भारत में विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है. विपक्ष का आरोप है कि पाकिस्तान को कूटनीतिक बढ़त लेने दी गई, जबकि अमेरिकी रक्षा अधिकारी एल्ब्रिज कोल्बी लगातार भारत को इस क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण साझेदार बता रहे हैं.
कुल मिलाकर देखा जाये तो पीएम मोदी को किया गया ट्रंप का फोन कॉल सिर्फ एक औपचारिक बातचीत नहीं, बल्कि भारत को भरोसे में लेने की एक बड़ी कोशिश के रुप में दिखाई दे रही है. अमेरिका जानता है कि भले ही पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका में दिखे, लेकिन क्षेत्र में स्थिरता के लिए भारत का साथ उसके लिए अनिवार्य है.

