ममता बैनर्जी की मांग-गिरफ्तार हों ज्ञानेश कुमार,जहां-जहां चुनाव कराये हैं वहां दोबारा हो चुनाव

Mamata Banerjee Gyanesh Kumar  कोलकाता : चुनाव आयोग को लेकर अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद देशभर में विपक्ष ने मोर्चा खोल दिया है. चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने, मामले की जांच कराने और SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग उठाई है.

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला करते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की है. उन्होंने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में जहां-जहां चुनाव कराए गए हैं, वहां दोबारा चुनाव कराया जाना चाहिए. 

Mamata Banerjee Gyanesh Kumar:’ज्ञानेश कुमार की हो गिरफ्तारी’ 

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उनके कार्यकाल में हुए चुनावों को दोबारा कराया जाना चाहिए.

उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पर बीजेपी के आईटी सेल का प्रभाव है और मुख्य चुनाव आयुक्त का काम बीजेपी को खुश करना रह गया है. ममता ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर विपक्षी दल एकजुट हैं.

विपक्ष की यह प्रतिक्रिया उस रिपोर्ट के बाद सामने आई, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की. रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे भी शामिल थे.

ममता बैनर्जी ने एक्स पर लिखा –  

“यह एक बहुत ही चौंकाने वाली और शर्मनाक बात है। हमने अपनी ज़िंदगी में ऐसा कभी नहीं देखा। इस चुनाव आयुक्त को गिरफ़्तार किया जाना चाहिए। उन्हें पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है, और BJP को यह समझना चाहिए कि वे हमारे संविधान को नष्ट नहीं कर सकते। वे लोकतंत्र को खत्म नहीं कर सकते… वे BJP IT टीम के नाम पर अपने EROs को तैनात नहीं कर सकते… हमने जो पहले कहा था, वह अब सच साबित हो गया है… ज्ञानेश कुमार ने पुलिस का गलत इस्तेमाल किया है और BJP के साथ मिलकर अपने ही BJP-समर्थक लोगों को तैनात किया है। ऐसा घोटाला पहले कभी नहीं हुआ। अगर आपमें थोड़ी भी शर्म-लिहाज़ है, तो आप खुद ही गिरफ़्तारी की मांग करेंगे। आपको गिरफ़्तार किया जाना चाहिए…”

चुनाव आयोग ने कहा- SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से हुए

वहीं, चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने इन रिपोर्टों के बीच स्पष्ट किया है कि SIR समेत आयोग के सभी फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी और फैसले सर्वसम्मति से लिए गए. आयोग के इस पक्ष के मुताबिक, रिपोर्टों में सामने आए मतभेदों को फैसलों की असहमति के रूप में पेश करना सही नहीं है.

यानी SIR को लेकर विपक्ष के आरोपों और चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के बीच अब राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

संबित पात्रा ने विपक्ष पर साधा निशाना

बीजेपी प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा ने विपक्ष के आरोपों पर पलटवार किया. उन्होंने कहा कि बीजेपी किसी व्यक्ति को बचाने के बजाय देश के लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थानों की रक्षा की कोशिश कर रही है.

पात्रा ने कहा कि विपक्ष पहले ही सुप्रीम कोर्ट का रुख कर चुका है और अदालत में अपनी बात रखने का अवसर सभी को मिला है. उन्होंने विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को लेकर दुष्प्रचार करने का आरोप लगाया.

बीजेपी नेता ने कहा कि यदि विपक्षी दल चुनाव आयोग, ईवीएम और सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा नहीं करते तो उन्हें जनता पर भरोसा करना चाहिए, क्योंकि अंतिम फैसला मतदाता ही करते हैं.

SIR पर सुप्रीम कोर्ट का क्या फैसला आया था?

SIR को लेकर बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के फैसले का भी हवाला दिया. सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में की गई SIR की वैधता को बरकरार रखा था. अदालत ने माना था कि चुनाव आयोग के पास SIR कराने की शक्ति है और प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाना है.

हालांकि, यह फैसला बिहार में चुनावी मतदाता सूची की SIR प्रक्रिया से संबंधित था. इसलिए पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों में SIR के क्रियान्वयन से जुड़े प्रत्येक अलग विवाद को उसी फैसले का स्वतः समाधान मानना उचित नहीं होगा.

बंगाल की 20 सीटों का बीजेपी ने दिया आंकड़ा

संबित पात्रा ने विपक्ष के ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के आंकड़ों का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि जिन 20 विधानसभा सीटों पर सबसे ज्यादा मतदाता नाम हटाए गए, उनमें से 13 सीटों पर तृणमूल कांग्रेस ने जीत दर्ज की, जबकि बीजेपी को छह सीटों पर जीत मिली.

पात्रा ने इसी आंकड़े के आधार पर विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर मतदाता सूची से नाम हटाने का फायदा बीजेपी को मिला होता तो इन सीटों के चुनाव नतीजे अलग होने चाहिए थे.

पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?

पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने और फिर अपीलों का मुद्दा भी विवाद के केंद्र में है. हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 27.16 लाख नाम हटाए गए, जिनमें से 22 लाख से ज्यादा लोगों ने नाम बहाल कराने के लिए अपील की है. चुनाव आयोग ने इन हटाए गए नामों में मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित और डुप्लीकेट मतदाताओं समेत विभिन्न श्रेणियों का उल्लेख किया है.

वहीं, विपक्ष इन आंकड़ों और SIR की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है. यही विवाद अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली तक पहुंच गया है.

फिलहाल चुनाव आयोग ने विपक्ष के विरोध के बीच अपनी सफाई देते हुए साफ किया है कि  SIR से जुड़े फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया है, जबकि विपक्ष अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक उजागर खुलासों को लेकर स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है.

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