‘सिस्टम ने उन्हें अपने आप जेनरेट कर दिया’, कर्नाटक चुनाव अधिकारियों ने 61,059 फॉर्म 7 फाइल किए जाने पर दी सफाई

Karnataka SIR: कर्नाटक में इलेक्शन कमीशन के अधिकारियों ने कहा है कि जब अनमैप्ड रिकॉर्ड या लॉजिकल गड़बड़ियों को लेकर जारी नोटिस पर सुनवाई के दौरान वोटर्स से संपर्क नहीं हो पा रहा था, तो इलेक्टोरल सिस्टम ने इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (EROs) और असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (AEROs) के डिजिटल सिग्नेचर वाले 61,059 Form 7 एप्लीकेशन अपने आप जेनरेट कर दिए.
यह सफाई इस विवाद के बीच आई है कि किसी भी एप्लीकेशन में वोटर्स के नाम हटाने की वजह क्यों नहीं बताई गई.

Karnataka SIR: फॉर्म 7 कब और क्यों इस्तेमाल होता है

एप्लीकेशन में ऑब्जेक्शन करने वालों के तौर पर लिस्टेड अधिकारियों ने कहा कि ये फॉर्म स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रोसेस के दौरान बनाए गए थे, जिसमें संबंधित वोटर्स को “इनएलिजिबल” मार्क किया गया था, क्योंकि सुनवाई के दौरान उनसे कॉन्टैक्ट नहीं हो पाया था.
सभी 61,059 एप्लीकेशन में कारण वाला फील्ड खाली छोड़ दिया गया था. फॉर्म 7 का इस्तेमाल इलेक्टोरल रोल में नाम शामिल होने पर ऑब्जेक्शन करने या मौत, परमानेंट शिफ्टिंग और डुप्लीकेट एंट्री जैसे तय आधारों पर उसे हटाने की मांग करने के लिए किया जाता है.
61,059 एप्लीकेशन पर विवाद कर्नाटक की फाइनल इलेक्टोरल रोल मंगलवार को पब्लिश होने से एक दिन पहले हुआ है.

वोटर्स से कॉन्टैक्ट नहीं हो पाने के बाद भी फॉर्म जेनरेट हुए: अधिकारी

इस प्रोसेस से वाकिफ एक अधिकारी के मुताबिक, ऐसा लगता है कि ये एप्लीकेशन उन मामलों में जेनरेट हुए थे जहां वोटर्स की डिटेल्स पिछली वोटर लिस्ट से मैच नहीं हो पाई थीं या उनमें लॉजिकल अंतर दिख रहे थे.
अधिकारी ने कहा, “ये एप्लीकेशन उन वोटर्स के वेरिफिकेशन प्रोसेस के हिस्से के तौर पर जेनरेट हुए लगते हैं जिनके रिकॉर्ड मैप नहीं हो पाए थे या जिनकी डिटेल्स में अंतर था. जब फील्ड वेरिफिकेशन प्रोसेस किसी वोटर से कॉन्टैक्ट नहीं कर पाया, तो हो सकता है कि सिस्टम के ज़रिए मामला आगे बढ़ाया गया हो, जिसने बिना कोई कारण बताए फॉर्म 7 जेनरेट किया हो.”

अधिकारी ने कहा कि रिकॉर्ड में अंतर या किसी वोटर से कॉन्टैक्ट करने की नाकाम कोशिश को इस बात का सबूत नहीं माना जाना चाहिए कि वह व्यक्ति वोटर लिस्ट में बने रहने के लायक नहीं था.
अधिकारी ने कहा, “ज़रूरी फ़र्क यह है कि आगे वेरिफ़िकेशन के लिए फ़्लैग किए गए केस और वोटर का नाम हटाने के लिए फ़ॉर्मल एप्लीकेशन के बीच क्या फ़र्क है.”

फ़ॉर्म 7 से वोटर का नाम नहीं हटता- अधिकारी

इस वजह से यह पता नहीं चलता कि हर एप्लीकेशन में वजह बताने वाली जगह खाली क्यों रही और बाद में फ़ॉर्म को कैसे हैंडल किया गया.
इलेक्टर्स रजिस्ट्रेशन रूल्स, 1960, इलेक्टोरल रोल एंट्री पर ऑब्ज़ेक्शन फ़ाइल करने का तरीका बताते हैं. इसलिए, चुनाव अधिकारियों द्वारा बताए गए कारण और अपनाए गए कदम यह तय करने में ज़रूरी हैं कि एप्लीकेशन नियमों के अनुसार प्रोसेस किए गए थे या नहीं.
ये एप्लीकेशन बेंगलुरु में ज़्यादातर थे, जिसमें BBMP साउथ में 10,374 फ़ॉर्म थे. कम से कम 26 विधानसभा सीटों पर, चुनाव अधिकारियों ने वोटरों या दूसरे एप्लिकेंट्स की तुलना में ज़्यादा फ़ॉर्म 7 एप्लीकेशन फ़ाइल किए.
कर्नाटक के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर वी अंबुककुमार ने पहले कहा था कि फॉर्म 7 एप्लीकेशन फाइल करने से वोटर का नाम अपने आप डिलीट नहीं होता.

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