JPSC Paper Leak मामले में CID पूछताछ में बड़ा खुलासा- 12 अभ्यर्थियों के चयन का दबाव, 25 लाख कमीशन का खेल!

JPSC Paper Leak रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही CID के सामने पूछताछ में एक के बाद एक चौंकाने वाली बातें सामने आ रही हैं. अब जांच में 10 से 12 चुनिंदा अभ्यर्थियों के चयन के लिए दबाव बनाए जाने और 20 से 25 लाख रुपये कमीशन मांगने का दावा सामने आया है.

CID की पूछताछ में TDPL के निदेशक रामवीर सिंह के बयान के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, JPSC से जुड़े कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार पर कथित तौर पर कुछ अभ्यर्थियों के चयन और प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने को लेकर दबाव बनाने का आरोप है. यह मामला सामने आने के बाद तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल. खियांगते और तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता को इसकी जानकारी दिए जाने की बात भी जांच में सामने आई है.

JPSC Paper Leak:10 से 12 अभ्यर्थियों के चयन की मांग का आरोप

CID के सामने दिए गए बयान के अनुसार, सिविल जज पीटी परीक्षा की संशोधित मेरिट लिस्ट जारी होने के बाद जब FRO और PCF परीक्षा आयोजित की जानी थी, तब धर्मेंद्र कुमार ने कथित तौर पर 10 से 12 चुनिंदा अभ्यर्थियों के चयन और प्रश्नपत्र लीक करने की मांग की.

हालांकि, TDPL की ओर से इस कथित मांग को स्वीकार नहीं किया गया और परीक्षा प्रक्रिया को नियमों के अनुसार पूरा करने की बात कही गई.

जांच में सामने आए बयान के मुताबिक, इस कथित मांग की जानकारी उस समय JPSC के शीर्ष अधिकारियों को भी दी गई थी.

OMR और एडमिट कार्ड के काम के बदले 20-25 लाख कमीशन?

मामले में एक दूसरा महत्वपूर्ण आरोप कमीशन से जुड़ा है. जांच में सामने आए बयानों के अनुसार, धर्मेंद्र कुमार ने TDPL को JPSC से जुड़े OMR शीट, एडमिट कार्ड और प्रिंटिंग जैसे काम दिलाने के बदले कथित तौर पर 20 से 25 लाख रुपये कमीशन की मांग की थी.

इससे पहले भी CID की जांच से जुड़ी रिपोर्टों में TDPL के कर्मचारियों के बयानों के हवाले से धर्मेंद्र पर परीक्षा से जुड़े काम दिलाने और कुछ अभ्यर्थियों को पास कराने का आश्वासन देने के आरोप सामने आ चुके हैं.

2 करोड़ की कथित डील का भी जिक्र

JPSC मामले की जांच में इससे भी गंभीर आरोप सामने आ चुके हैं. पूर्व में सामने आए CID से जुड़े बयानों में TDPL से संबंधित लोगों ने दावा किया था कि परीक्षा से जुड़ा काम दिलाने के बदले तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल. खियांगते के नाम पर 2 करोड़ रुपये की कथित मांग की गई थी.

रिपोर्टों के अनुसार, TDPL के अधिकारियों और JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष के बीच रांची के एक होटल में मुलाकात तथा बाद में मोरहाबादी मैदान में बातचीत का भी जिक्र जांच में सामने आया है. इन दावों की जांच CID कर रही है.

धर्मेंद्र कुमार की 11 अगस्त को हुई गिरफ्तारी

CID ने TDPL से जुड़े पूर्व अधिकारियों से मिली जानकारी और पूछताछ के आधार पर 11 अगस्त को धर्मेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया था. उस पर JPSC की परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े संवेदनशील कामों में कथित हस्तक्षेप और अभ्यर्थियों के चयन को लेकर दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोपों की जांच चल रही है.

JPSC मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है और कई अधिकारियों, कर्मचारियों तथा निजी एजेंसी से जुड़े लोगों से पूछताछ एवं गिरफ्तारी हो चुकी है. पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते से भी CID पूछताछ कर चुकी है.

JPSC विवाद में आगे क्या?

JPSC परीक्षा विवाद अब केवल पेपर लीक के आरोप तक सीमित नहीं रह गया है. CID की जांच में परीक्षा संचालन की निजी एजेंसी, आयोग के कर्मचारियों, कथित बिचौलियों और अभ्यर्थियों के बीच संभावित नेटवर्क की भी जांच की जा रही है.

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