Sunday, January 25, 2026

Waqf Bill पर जेडीयू में दो फाड़ की खबरों के बीच बोले ललन सिंह, ‘वक्फ विधेयक मुस्लिम विरोधी नहीं है’

Waqf Bill: बुधवार को केंद्रीय मंत्री और जनता दल (यूनाइटेड) के नेता राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक ‘मुस्लिम विरोधी’ नहीं है. इससे पहले जेडीयू सांसद संजय झा के बिल को समर्थन देने या नहीं देने को लेकर दिए बयान ने इन खबरों को हवा दी थी कि वक्फ बिल को लेकर जनता दल यूनाइटेड में एक राय नहीं है.

Waqf Bill: यह विधेयक मुस्लिम विरोधी नहीं है…-ललन सिंह

एएनआई ने सिंह के हवाले से कहा, “वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा हो रही है. चर्चा की शुरुआत से ही यह माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है कि विधेयक मुस्लिम विरोधी है… लेकिन यह विधेयक मुस्लिम विरोधी नहीं है… वक्फ एक तरह का ट्रस्ट है जो मुसलमानों के हित में काम करने के लिए बनाया गया है.” सिंह की पार्टी 12 सांसदों के साथ नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार का समर्थन करती है.
जेडी(यू) नेता ने कहा, “यह कोई धार्मिक संगठन नहीं है…ट्रस्ट को मुसलमानों के सभी वर्गों के साथ न्याय करने का अधिकार है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है…आज एक कहानी गढ़ी जा रही है. पीएम मोदी की आलोचना की जा रही है, अगर आप उन्हें पसंद करते हैं तो उनकी तरफ न देखें. लेकिन उनके अच्छे काम की सराहना करें.”

हमारी चिंताओं को शामिल किया जाता है, तो हम समर्थन करेंगे-संजय झा

इससे पहले दिन में जेडी(यू) सांसद संजय झा ने अपनी पार्टी की चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विधेयक को पूर्वव्यापी नहीं होना चाहिए. झा ने एएनआई से कहा, “हमारी चिंता यह है कि इसे (विधेयक को) पूर्वव्यापी नहीं होना चाहिए. विधेयक आने दीजिए, अगर इसमें हमारी चिंताओं को शामिल किया जाता है, तो हम निश्चित रूप से विधेयक का समर्थन करेंगे.”

लोकसभा में वक्फ विधेयक पेश किया गया

केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया.
विपक्ष के विरोध के बीच पीटीआई ने रिजिजू के हवाले से कहा, “सरकार किसी भी धार्मिक संस्था में हस्तक्षेप नहीं करने जा रही है. यूपीए सरकार द्वारा वक्फ कानून में किए गए बदलावों ने इसे अन्य कानूनों पर हावी कर दिया, इसलिए नए संशोधनों की आवश्यकता थी.”
वक्फ (संशोधन) विधेयक के अनुसार, वक्फ न्यायाधिकरणों को मजबूत किया जाएगा, एक संरचित चयन प्रक्रिया को बनाए रखा जाएगा, और कुशल विवाद समाधान सुनिश्चित करने के लिए कार्यकाल तय किया जाएगा.
विधेयक के अनुसार, वक्फ बोर्डों में वक्फ संस्थाओं का अनिवार्य अंशदान 7 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है, तथा 1 लाख रुपये से अधिक आय वाली वक्फ संस्थाओं का राज्य प्रायोजित लेखा परीक्षकों द्वारा लेखा परीक्षण किया जाएगा.

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