रुस से भी सस्ता तेल देने के लिए तैयार है ये देश,लेकिन भारत को सामने खड़ी है बड़ी चुनौती

Iraq Oil Discount Offer : मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. रूस के बाद अब इराक ने दुनिया को, विशेषकर भारत जैसे बड़े खरीदारों को भारी छूट पर कच्चा तेल देने का प्रस्ताव दिया है. इराक अपनी सरकारी कंपनी SOMO के जरिए 33.40 डॉलर प्रति बैरल तक की बड़ी कटौती कर रहा है, हालांकि, यह ‘डिस्काउंट’ एक ऐसी शर्त के साथ आया है जिसे पूरा करना जान जोखिम में डालने जैसा है.

Iraq Oil Discount Offer:सस्ते तेल के पीछे बड़ा खतरा

इराक ने यह ऑफर तो दे दिया है, लेकिन पेंच यह है कि खरीदार को तेल उठाने के लिए फारस की खाड़ी के अंदर स्थित टर्मिनलों तक आना होगा. इसके लिए जहाजों को ‘होर्मुज स्ट्रेट’ से होकर गुजरना होगा. वर्तमान में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण यह समुद्री रास्ता एक ‘डेथ ट्रैप’ बना हुआ है. यहाँ जहाजों और क्रू पर हमले का खतरा इतना ज्यादा है कि सप्लाई चेन बुरी तरह बाधित हो गई है.

33 डॉलर से ज्यादा की छूट: इराक का बड़ा दांव

इराक की सरकारी तेल कंपनी SOMO के दस्तावेजों के अनुसार, ओपेक सदस्य इराक अपने ‘बसरा मीडियम’ ग्रेड पर प्रति बैरल $33.40 तक की छूट दे रहा है

  • 1 से 10 मई के बीच: $33.40 की अधिकतम छूट.

  • बाकी मई महीने के लिए: $26 की छूट.

  • बसरा हेवी ग्रेड: आधिकारिक कीमत से $30 कम पर उपलब्ध.

इराक ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि निर्यात रुकने के कारण उसके स्टोरेज टैंक तेजी से भर रहे हैं और उसे उत्पादन घटाने पर मजबूर होना पड़ा है.

ठप पड़ा है बसरा बंदरगाह, सिर्फ 2 टैंकर हुए लोड

आंकड़े बताते हैं कि संकट कितना गहरा है. सामान्य दिनों में इराक के दक्षिणी बसरा बंदरगाह से हर महीने लगभग 80 टैंकर तेल लोड करते हैं लेकिन होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी के कारण मार्च में यह संख्या गिरकर 12 रह गई और अप्रैल में केवल 2 टैंकर ही यहाँ से तेल उठा सके. खाली जहाजों के लिए खाड़ी में प्रवेश करना नामुमकिन जैसा हो गया है.

भारत के लिए ‘धर्मसंकट’: इराक है सबसे बड़ा सप्लायर

भारत के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण है. रूस पर अमेरिकी प्रतिबंध कड़े होने के बाद भारत ने इराक से अपनी खरीदारी बढ़ा दी थी.

  • फरवरी 2026 में: भारत ने इराक से रिकॉर्ड 11.8 लाख बैरल प्रतिदिन तेल खरीदा.

  • बाजार हिस्सेदारी: भारत की कुल तेल खरीद में इराक की हिस्सेदारी लगभग 26% रही है.

  • वर्तमान स्थिति: अप्रैल 2026 में होर्मुज की नाकेबंदी के बाद से भारत का इराक से आयात लगभग शून्य हो गया है.

क्या जोखिम उठाएगा भारत?

इराक हालांकि तुर्की के रास्ते पाइपलाइन से तेल भेज रहा है, लेकिन उसकी मात्रा समुद्री मार्ग के मुकाबले बहुत कम है। अब सवाल यह है कि क्या भारत की तेल कंपनियां इतने भारी जोखिम के बीच होर्मुज स्ट्रेट में अपने जहाज भेजेंगी? $33 की छूट आकर्षक तो है, लेकिन युद्ध जैसे हालातों में जहाजों का बीमा और क्रू की सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती है.

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