अंतर्राष्ट्रीय उडानों के लिए ईरान ने खोला अपना आसमान,लेकिन पायलटों को अब भी सता रहा है डर

Iranian Airspace Open : मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के बाद ईरान ने अंतराष्ट्रीय विमानों को लेकर एक  बड़ा फैसला किया है.  ईरान ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपने एयरस्पेस को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए आंशिक रूप से खोल दिया है. ईरान की सिविल एविएशन अथॉरिटी ने पुष्टि की है कि देश के पूर्वी हिस्से का एयरस्पेस अब ट्रांजिट फ्लाइट्स के लिए उपलब्ध है. इसके साथ ही, स्थानीय समयानुसार सुबह 7 बजे से कुछ प्रमुख एयरपोर्ट्स पर ऑपरेशंस दोबारा शुरू करने की अनुमति दे दी गई है, जिससे वैश्विक हवाई यातायात को सीमित राहत मिलने की उम्मीद है.

Iranian Airspace Open:कागजों पर राहत,जमीन पर अब भी सन्नाटा

ईरान के इस आधिकारिक ऐलान के बावजूद हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. घोषणा के कई घंटों बाद भी फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट्स के डेटा से पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय विमान अब भी ईरान के ऊपर से उड़ान भरने में हिचकिचा रहे हैं. अधिकांश एयरलाइंस जोखिम कम करने के लिए लंबे और घुमावदार रास्तों (डिटूर) का चुनाव कर रही हैं. सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक युद्ध जैसी स्थिति पूरी तरह शांत नहीं हो जाती, तब तक एयरलाइंस अपने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कोई कोताही नहीं बरतेंगी.

होर्मुज स्ट्रेट: तेल की सप्लाई और ईरान की पकड़

हवाई मार्ग के साथ-साथ ईरान ने वैश्विक तेल व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को भी कमर्शियल जहाजों के लिए खोलने का दावा किया है. दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से गुजरता है. हालांकि, ईरान ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मार्ग पर अपनी निगरानी और पकड़ कमजोर नहीं होने देगा. ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति बिगड़ती है, तो वह किसी भी समय इस रास्ते को फिर से बंद करने का अधिकार सुरक्षित रखता है.

अमेरिका का रुख: ब्लॉकेड हटने के आसार कम

दूसरी तरफ, अमेरिका ने ईरान की इन कोशिशों के बावजूद अपने कड़े रुख में कोई नरमी नहीं दिखाई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अमेरिकी नौसेना द्वारा लगाया गया ब्लॉकेड फिलहाल जारी रहेगा. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि जब तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अन्य विवादित मुद्दों पर कोई ठोस और स्थायी समझौता नहीं हो जाता, तब तक पाबंदियों में ढील नहीं दी जाएगी. ऐसे में ईरान की कोशिशों के बावजूद वैश्विक व्यापार और उड़ानों के लिए चुनौतियां बरकरार हैं.

ईंधन और समय का बढ़ता बोझ

ईरान का एयरस्पेस बंद होने या एयरलाइंस द्वारा इसे नजरअंदाज करने का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की लागत पर पड़ रहा है. वैकल्पिक रास्तों के इस्तेमाल से न केवल उड़ान का समय बढ़ रहा है, बल्कि ईंधन की खपत में भी भारी इजाफा हुआ है. एयरलाइंस इस बढ़ते आर्थिक बोझ को झेल रही हैं, लेकिन सुरक्षा उनकी पहली प्राथमिकता बनी हुई है. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ईरान का यह ‘सकारात्मक संकेत’ एयरलाइंस और वैश्विक शक्तियों का भरोसा जीतने में कामयाब हो पाता है या नहीं.

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