US-Iran War : तेहरान/वाशिंगटन: मध्य पूर्व (Middle East) में लंबे समय से जारी तनाव और युद्ध के बीच एक बड़ी राहत वाली खबर सामने आ रही है. ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई गुप्त बातचीत के बाद ईरान ने एक ऐसा प्रस्ताव पेश किया है, जिससे न केवल युद्ध के बादल छंट सकते हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में भी कमी आ सकती है.
US-Iran War के बीच क्या है ईरान का नया प्रस्ताव?
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक , ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत के दौरान यह संकेत दिया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के ओमान वाले हिस्से से जहाजों को बिना किसी हमले के डर के स्वतंत्र रूप से गुजरने की अनुमति दे सकता है.
ईरान का यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में फिर से छिड़ने वाली जंग को रोकना है. हालांकि, अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि ईरान अपने द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाएगा या नहीं, और क्या इसमें इजरायल से जुड़े जहाजों को भी बिना किसी रोक-टोक के जाने की अनुमति मिलेगी.
तेल की कीमतों पर पड़ेगा सीधा असर
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। आंकड़ों के अनुसार:
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दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है.
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यह मार्ग मध्य पूर्व से ऊर्जा आपूर्ति और उर्वरकों के निर्यात के लिए ‘लाइफलाइन’ माना जाता है.
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यदि यह रास्ता पूरी तरह खुलता है, तो सप्लाई चेन सुचारू होगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से कमी आएगी।
20 हजार नाविकों और सैकड़ों जहाजों की सुरक्षा का सवाल
बता दें कि 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से खाड़ी क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. इस दौरान लगभग 20,000 नाविक और सैकड़ों तेल टैंकर खाड़ी में फंसे हुए हैं. हालांकि 8 अप्रैल को सीजफायर लागू हुआ था, लेकिन असुरक्षा के कारण जहाजों की आवाजाही सामान्य नहीं हो पाई है. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी दावा किया था कि अब यह जंग खत्म होने की कगार पर है.
“ओमान के जलक्षेत्र से जहाजों को बिना किसी प्रतिबंध के गुजरने देने का प्रस्ताव अभी विचाराधीन है। हालांकि, व्हाइट हाउस और ईरान के विदेश मंत्रालय ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है।” — पश्चिमी सुरक्षा सूत्र (रॉयटर्स के अनुसार)
टोल वसूली पर छिड़ा विवाद
ईरान ने पहले इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर ‘टोल टैक्स’ लगाने का विचार रखा था, जिसका संयुक्त राष्ट्र के अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने कड़ा विरोध किया है. IMO का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर इस तरह की वसूली एक खतरनाक मिसाल कायम करेगी.
क्यों खास है होर्मुज जलडमरूमध्य?
यह ईरान और ओमान के बीच स्थित महज 34 किलोमीटर चौड़ा एक संकरा जलमार्ग है. यह फारस की खाड़ी को हिंद महासागर से जोड़ता है. भौगोलिक और आर्थिक रूप से यह दुनिया का सबसे संवेदनशील ‘चोक पॉइंट’ है, जिसकी घेराबंदी पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाने की ताकत रखती है.

