‘महीनों तक धमकाने में लगे रहे, अब भीख मांग रहे हैं’, ईरान ने भारत को रूसी तेल खरीदने की अमेरिकी छूट पर दिया बयान

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शनिवार को ईरान के साथ वॉशिंगटन के युद्ध के बीच रूसी तेल Russian oil पर अमेरिका के बदलते रुख का मज़ाक उड़ाया.
एक सोशल मीडिया पोस्ट में, अराघची ने दावा किया कि डोनाल्ड ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन अब भारत और दुनिया भर के दूसरे देशों से रूस का क्रूड ऑयल खरीदने के लिए “भीख” मांग रहा है, जबकि पहले भी ऐसे इंपोर्ट रोकने का दबाव था.

अराघची ने एक्स पर पोस्ट लिख उड़ाया मज़ाक

अराघची ने X पर लिखा, “US ने भारत को रूस से तेल इंपोर्ट बंद करने के लिए महीनों तक धमकाया. ईरान के साथ दो हफ़्ते की लड़ाई के बाद, व्हाइट हाउस अब दुनिया से – जिसमें भारत भी शामिल है – रूस से कच्चा तेल खरीदने की भीख मांग रहा है.”

ईरानी विदेश मंत्री ने ईरान के खिलाफ “गैर-कानूनी युद्ध” का समर्थन करने के लिए यूरोपीय देशों की भी आलोचना की, और दावा किया कि उन्हें बदले में रूस के खिलाफ अमेरिकी समर्थन की उम्मीद थी.
उन्होंने कहा, “यूरोप ने सोचा था कि ईरान पर गैर-कानूनी युद्ध का समर्थन करने से रूस के खिलाफ अमेरिकी समर्थन मिल जाएगा. यह बहुत बुरा है.”

ईरान ने 2 भारतीय LPG कैरियर को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी

इस बीच, रॉयटर्स ने इस मामले की सीधी जानकारी रखने वाले चार सूत्रों के हवाले से बताया कि ईरान ने मिडिल ईस्ट क्षेत्र में संघर्ष के बीच भारत के झंडे वाले दो लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) कैरियर को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी है.
रॉयटर्स ने दो सोर्स और लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस शिपिंग डेटा का हवाला देते हुए आगे बताया कि सऊदी अरब का तेल ले जाने वाला एक क्रूड ऑयल टैंकर शनिवार को भारत आने की उम्मीद है, जो 1 मार्च के आसपास होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रेगा.

भारत के Russian oil खरीदने पर US ने क्या कहा

US के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भारत की रूसी तेल की लगातार खरीद को “ज़रूरी” बताया है, और कहा है कि भारतीय रिफाइनर को 30 दिन की टेम्पररी छूट देने का फ़ैसला पश्चिम एशिया संघर्ष से पैदा हुई एनर्जी में रुकावट के बीच तुरंत सप्लाई की ज़रूरतों की वजह से लिया गया था.
स्काई न्यूज़ के पत्रकार विल्फ्रेड फ्रॉस्ट के साथ एक इंटरव्यू में, बेसेंट ने कहा कि US एडमिनिस्ट्रेशन ने भारतीय रिफाइनर को 30-दिन की छूट दी, जिन्हें पहले रूसी तेल खरीदने से रोका गया था। इस फैसले के बारे में बताते हुए, उन्होंने कहा कि यह छूट ज़रूरी थी क्योंकि रूसी तेल शिपमेंट पहले से ही ट्रांज़िट में थे.

बेसेंट ने आगे कहा, “ठीक है, मुझे लगता है कि यह ज़रूरी है, और इसीलिए हमने 30-दिन की छूट दी—क्योंकि रूसी बैरल पानी पर हैं और यह भारतीय रिफाइनरियों के लिए एक तेज़ सोर्स है. इसे दूसरे तरीके से सोचने पर वे बैरल वैसे भी चीन में ही जाने वाले थे.”

ये भी पढ़ें-राज्यसभा के लिए मतदान से पहले कांग्रेस को सता रहा है डर, हार्सट्रेडिंग से बचने के लिए विधायकों को भेजा हिमाचल

Latest news

Related news