Indus Water Treaty : भारत के रास्ते आने वाले सिंधु का पानी पीकर जिंदा रहने वाला पाकिस्तान भारत की ही धरती को दशकों से लाल करता रहा है. बार बार पाकिस्तान के पाले आतंकी भारत की सरजमीं पर आकर कत्लेआम मचाते हैं और भारत सरकार हर बार पड़ोसी धर्म के पालन के नाम पर उन्हें छोड़ देती है लेकिन इस बार भारत की मोदी सरकार ने पाकिस्तान के साथ साथ दुनिया को भी बता दिया है कि अब भारत की तरक्की और सकून के रास्ते में जो कोई भी आयेगा , उसे उसका परिणाम भी भुगतना होगा.
Indus Water Treaty टूटा, फिर पानी पाकिस्तान नहीं तो कहां जायेगा ?
पहलगाम हमले के बाद ही भारत ने सिधु जल समझौते को तोड़ने का ऐलान करके अपने इरादे बता दे दिये हैं. सिंधु जल समझौते को तोड़ने का ऐलान करना एक बात है लेकिन दरिया के पानी को रोकना या उसकी धार को एकदम से मोड देना दूसरी बात है. अब भारत सरकार ने इस कठिन काम को पूरा करने के लिए योजना बना ली है कि जब सिधु के पानी को पाकिस्तान जाने से रोका जायेगा तो उस पानी का इस्तेमाल कहां होगा.
जल शक्ति मंत्रालय की बैठक मे बनी बड़ी रणनीति
9 मई को दिल्ली में जल में जल शक्ति मंत्रालय की बडी बैठक हुई, जिसमें सरकार ने सिंधु के पानी को अपने देश में ही इस्तेमाल करने की योजना बनाई है. खबर है कि सरकार ने सिंधु चेनाब और झेलम के पानी को अपने ही 4 राज्यों में बांटने की योजना बनाई है . भारत के ये चार राज्य राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल और दिल्ली है जहां इस पानी को पहुंचा कर यहां की पानी की कमी को पूरा किया जायेगा.
बैठक में पानी को डायवर्ट करने के लिए आधारभूत ढांचे पर हुई बात
9 मई की बैठक में राज्यों को इन तीन नदियों सिंधु, चेनाब और झेलम का पानी पहुंचाने के लिए आधारभूत ढांचे तैयार करने की कार्ययोजना बनी. जल शक्ति मंत्रालय की अहम बैठक में ये तय किया गया कि पाकिस्तान जाने वाले पानी को देश के अंदर कैसे डायवर्ट करना है और किन-किन राज्यों में इसका इस्तेमाल किया जाए. भारत सरकार ने इसे लेकर बड़ी रणनीति तैयार की है.
पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान के शामिल होने के सबूतों के सामने आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि पानी और ख़ून एक साथ नहीं बह सकता है. अब पीएम मोदी के उसी संकल्प को दिशा देने का काम जल शक्ति मंत्रालय काम कर रहा है. जल शक्त मंत्रालय ने इसे मिशन का नाम दिया है और इस मिशन का पूरा काम गृहमंत्री अमित शाह की निगरानी में पूरा किया जायेगा.

