Tuesday, December 9, 2025

भारतीय मूल की पहली मुस्लिम महिला बनी वर्जिनिया की लेफ्टिनेंट गवर्नर,गजाला हाशमी ने रचा इतिहास

Ghazala Hashmi : अमेरिकी में भारतीय मूल की गजाला हाशमी ने इतिहास रच दिया है. भारत के हैदराबाद में जन्मीं गजाला अमेरिकी राज्य वर्जीनिया की पहली दक्षिण एशियाई मूल की मुस्लिम लेफ्टिनेंट गवर्नर बन गई हैं. गलाजा की जीत पर भारत में खुशी की लहर है.

Ghazala Hashmi और जोहरान ममदानी ने लिखी नई इबारत

पिथले कुछ समय में पूरी दुनिया में मुस्लिम विरोधी लहर रही है. अमेरिका में भी कई बार मुस्लिम विरोधी आवाजें सुनाई दी हैं लेकिन बीते दिनों यहां राज्यों के चुनाव में अलग ही लहर देखने के लिए मिली. लोग धर्म के आधार पर नहीं बल्कि असली मुद्दों पर वोट करते नजर आये.

गलाजा हाशमी से पहले जोहरान ममदानी नाम के भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक ने न्यूयार्क सिटी में मेयर का चुनाव जीता. अमेरिका के सबसे बड़े शहर न्यूयार्क सिटी में ये पहले मौका है जब कोई मुस्लिम व्यक्ति शहर का मेयर बना . यहां ममदानी ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान कई तरह के सुविधाओं बात की, जिसने लोगों का दिल जीत लिया. अब गजाला हाशमी ने भी अपने वादों और इरादों से आम अमेरिकी नागरिकों में भावनाएं जगाई हैं.

गजाला हाशमी ने बड़े अंतर से रिपब्लिकन उम्मीदवार को हराया

61 साल की गजाला हाशमी सहित्य की छात्रा रही है .ये पहला मौका है जब किसी दक्षिण एशियाई मूल के भारतीय नागरिक ने अमेरिकी उम्मीदवार को हराकर वर्जिनिया राज्य के लेफ्टिनेंट गवर्नर का पद जीता हो . गजाला हाशमी ने रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉन रीड को बड़े अंतर से हराया.वर्जिनिया में 4 नवंबर को राज्य के नये लेफ्टिनेंट गवर्नर के लिए मतदान हुआ था.

गजाला का हैदराबाद से अमेरिका तक का सफर

भारतीय मूल की गजाला हाशमी का जन्म भारत के हैदराबाद शहर में 1964 में हुआ था. उनके पिता तनवीर हाशमी और मां जिया हाशमी दोनों शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े थे. गजाला हाशमी जब केवल 4 साल की थी, तब माता पिता परिवार के साथ अमेरिका चले गये. पिता तनवीर हाशमी ने अमेरिकी के  जॉर्जिया विश्वविद्यालय में इंटरनेशनल रिलेशन में पीएचडी किया और फिर वहीं बस गये.

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से भी रहा जुड़ाव

 गजाला के पिता तनवीर हाशमी का उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) से गहरा रिश्ता रहा. इसी विश्वविद्यालय से उन्होंने एमए और एलएलबी की पढ़ाई की थी. उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गये और फिर वहीं यूनिवर्सिटी में पढाने लगे. आगे चलकर उन्होंने इंटरनेशनल एजुकेशन सेंटर की स्थापना की और बतौर डायरेक्टर वहां से रिटायर हुए.

अमेरिकी में ही गजाला ने की पढाई लिखाई

गजाला भले ही भारतीय मूल की हों लेकिन उनकी पूरी शिक्षा-दीक्षा अमेरिका में ही हुई. उन्होने जॉर्जिया सदर्न यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और एमोरी यूनिवर्सिटी  अटलांटा से अमेरिकी साहित्य में पीएचडी किया. पति रफीक और दो बच्चो के साथ वो पिछले करीब 30 वर्षों से एक प्रोफेसर के रूप में पढा रही हैं.

अमेरिका की राजनीतिक में गजाला का प्रवेश

61 वर्षीय गजाला हाशमी के राजनीतिक जीवन की यात्रा 2019 में शुरू हुई, जब उन्होंने एक रिपब्लिकन उम्मीदवार को हराने और डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार को वर्जीनिया सीनेट में बहुमत दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई. गजाला की लोकप्रियता की वजह उनकी शिक्षा दीक्षा और साफ-सुथरी छवि रही.उनकी साफ सुथरी छवि ने उन्हें लोकप्रिय बनाने में काफी मदद की.

पिछले साल अमेरिकी सीनेट में सदस्य बनीं थी गजाला

गजाला हाशमी के शैक्षिक प्रभाव को देखते हुए अमेरिकी सीनेट ने उन्हें 2024 में सीनेट की शिक्षा और स्वास्थ्य समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया. समय के साथ गाजाला की शोहरत बढ़ी और उन्हें ये ऐतिहासिक जीत मिली. उनकी ये जीत न केवल अमेरिका में प्रवासी समुदाय के लिए प्रेरणा है, बल्कि भारत के लिए भी गौरव का क्षण बन गया है.

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