Bangladesh Tariq Rehman : बांग्लादेश में हुई 13वें आम चुनाव के परिणाम अब साफ हो चुके हैं. देश में मोहम्मद यूनूस की अंतरिम सरकार की जगह पर नई और स्थायी सरकार बनने जा रही है. 12 फरवरी को बंग्लादेश में हुए आम चुनाव के परिणाम पूरी तरह से Bangladesh Nationalist Party (BNP) के पक्ष में आये हैं. बीएनपी के नेता तारिक रहमान (Tarique Rahman) ने इस चुनाव में प्रचंड( landslide victory) बहुमत हासिल किया है और देश के नये प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं. भारत की तरफ से प्रधानमंत्री मोदी और कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे तारिक रहमान को बढ़ाई दी है.
#WATCH | Dhaka, Bangladesh: After the Friday prayers and after making the supplication, BNP chairman Tarique Rahman leaves from a mosque.
BNP has won the Parliamentary elections in Bangladesh.
(ANI)#BangladeshElections2026 #TariqueRahman #BNP pic.twitter.com/5RRVj4NZGs
— Prameya English (@PrameyaEnglish) February 13, 2026
Bangladesh Tariq Rehman:बीएनपी को 299 में से 200+ सीटें मिली
बंग्लादेश में कुल 300 सीटों में से 299 सीटों पर चुनाव हुए ,जिसमें बंग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को 200 से अधिक सीटों पर जीत मिली है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तारिक रहमान (पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के बेटे) के नेतृत्व में आम चुनाव लड़ने वाली बीएनपी को 209 से लेकर 211 सीटें तक आने की खबर है.यानी कि बीएनपी को मो. यूनूस ने नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को हटाने के लिए पूरे देश की लगभग 60 प्रतिशत जनता का समर्थन हासिल मिला है.
बीएनपी के मुकाबले में मुख्य विपक्षी पार्टी Jamaat-e-Islami को करीब 60-70 सीटों पर जीत मिली है, ऐसे में माना जा रहा है कि अब बंग्लादेश में अब एक मजबूत विपक्ष भी मौजूद रहेगा.
आपको बता दें कि इस चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी आवामी पार्टी को हिस्सा नहीं लेने दिया गया था.2024 में बंग्लादेश में शेख हसीना सरकार के खिलाफ आंदोलन और फिर देश से निष्कासन के बाद अंतरिम सरकार के मुखिया मो. यूनूस ने आवामी पार्टी के चुनाव लड़ने के अधिकार पर रोक लगा दी थी.इसलिए इस बार के आम चुनाव में मुख्य रुप से केवल दो पार्टियों बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी ने हिस्सा लिया.
तारिक रहमान बनेंगे बंग्लादेश के नये प्रधानमंत्री !
आम चुनाव में प्रचंड बहुमत पाने के बाद अब बीएनपी के प्रमुख तारिक रहमान देश के अगले प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं. मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक शनिवार को वो देश ने नये प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ले सकते हैं.
भारत के लिए बंग्लादेश की नई सरकार के मायने
स्थिरता का फायदा
जानकारों का मानना है कि बंग्लादेश में पिछले 18 महीनों से चली रही मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के दौरान देश में काफी अस्थिरता रही. खासकर हिंदु अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े और दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव बढ़ा . अब जब बंग्लादेश में तारिक रहमान के नेतृत्व में BNP की मजबूत सरकार बनने जा रही है, तब उम्मीद की जा रही है कि देश में राजनीतिक स्थिरता लौटेगी और अगर ऐसा हुआ तो ये पड़ोसी होने के नाते भारत के लिए भी अच्छा रहेगा. जानकरों का मानना है कि पड़ोसी देश की अस्थिरता भारत में पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा को प्रभावित करती है.
शेख हसीना का मुद्दा
बंग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना इस समय भारत की शरण में हैं. 2024 में देश में छात्र आंदोलन के दौरान अपदस्थ किये जाने के बाद से वो लगातार भारत में ही हैं. BNP ने शेख हसीना के भारत में रहने को लेकर नाराजगी भी जताई थी लेकिन चुनाव के बाद पीएम मोदी ने तारिक रहमान को बधाई दी और संबंध मजबूत करने की बात कही है. यह इस बात का संकेत है कि भारत व्यावहारिक (pragmatic) तरीके से संबंधो को ठीक करने के लिए आगे बढ़ेगा.
Jamaat-e-Islami की मजबूती
कट्टरपंथी संगठन जमात-ए- इस्लामी को बंग्लादेश में पहली बार इतनी अधिक (60-70) सीटें मिली है. पहले कभी 18 से ज्यादा नहीं मिली थीं. कट्टरपंथी संगठन का इस तरह से मजबूत होना भारत के लिए चिंता का विषय हो सकता है, क्योंकि ये संगठन ऐतिहासिक रूप से भारत-विरोधी और पाकिस्तान-समर्थक रहे हैं.हलांकि जमात ए इस्लामी मुख्य रुप से विपक्ष में है, सरकार नहीं. वहीं बंग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी(BNP) खुद को अधिक उदार (liberal) और व्यवहारिक (Pragmatic) दिखाती है. भारत को उम्मीद है कि नई सरकार के साथ उनके संबध बेहतर रहेंगे.
चीन और पाकिस्तान का प्रभाव
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल में बंग्लादेश में भारत का प्रभाव ज्यादा था. भारत को लेकर एक सकारात्मक सोच थी. BNP के आने से चीन के साथ संतुलन बनाने की कोशिश हो सकती है. भारत के साथ व्यापार, बिजली, कनेक्टिविटी (जैसे जल-बंटवारा, सीमा समझौते) पर सहयोग जारी रहने की संभावना ज्यादा है.
अल्पसंख्यक सुरक्षा
भारत लगातार बंग्लादेश में अलपसंख्यक हिंदुओं पर हुए हमलों की निंदा करता रहा है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि तारिक रहमान की नई सरकार इसे संबोधित करेगी क्योंकि अंतरराष्ट्रीय छवि और भारत के साथ संबंध सुधारने के लिए यह जरूरी है.
कुल मिलाकर देखा जाये तो बंग्लादेश में बीएनपी के नेतृत्व मे बनने वाली नई सरकार “golden phase” जैसी तो नहीं होगी , जैसी हसीना के समय हुआ करती थी लेकिन मो. यूनूस की वाकल्पिक सरकार से बेहतर विकल्प होगी. माना जा रहा है कि भारत अब तारिक रहमान सरकार के साथ जुड़कर सुरक्षा, व्यापार और कनेक्टिविटी पर फोकस करेगा. अगर BNP भारत-विरोधी रुख नहीं अपनाती है तो दोनों देशो के बीच संबंध स्थिर और सुधर भी सकते हैं.

