Saturday, August 30, 2025

पहलगाम आतंकी हमले के तीन संदिग्ध ढ़ेर,96 दिन बाद पूरा हूआ ऑपरेशन महादेव

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Operation Mahadev : जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए बर्बर आतंकी हमले के बाद हमलावर आतंकियों को लेकर सेना को बड़ी सफलता मिली है. आतंकी हमले के 96 दिन बाद सेना का वो ऑपरेशन पूरा हुआ है, जिसमें पहलगाम के आतंकियों को ढूंढने और उन्हें मौत के घाट उतारने का काम शुरु हुआ था. पहलगाम हमले में 26 लोगों की बर्बर हत्या के जवाब में भारतीय सेना ने ऑपरेशन महादेव शुरु किया था, जिसका आज समापन बताया जा रहा है.

Operation Mahadev को कैसे दिया गया अंजाम 

सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि सेना ने उन तीन संदिग्ध आतंकियों को मार गिराया है जिन्होंने पहलगाम हमले को अंजाम दिया था.

बताया जा रहा है कि 22 अप्रैल के हमले के बाद से ही सेना ने इन आतंकियों को पकड़ने के लिए एक ऑपरेशन शुरु किया था. हमले के बाद प्रतिबंधित आतंकी संगठन टीआरएफ (TRF) ने हमले की जिम्मदारी ली थी. हमले के बाद लगातार हो रही जांच के दौरान ये बात सामने आई थी कि आतंकी यहां जम्मू कश्मीर के घने जंगलों मे कही छुपे हैं.पहलगाम में हमले के दौरान इन आतंकवादियों ने M4 कार्बाइन और AK-47 जैसे एडवांस्ड वेपन का इस्तेमाल किया था. टीआरएफ के ये आतंकी पाकिस्तानी संगठन लश्करे ए तैयबा के निशाने पर भारत मे काम कर रहे थे. इन आतंकियों ने पहलगाम में धर्म के आधार पर चुन-चुन कर उन हिंदुओं को मार डाला था, जिन्हें कुरान की आयतें पढ़नी नहीं आती थी. इस घटना ने पूरे जहां पूरे देश के हिलाकर रख दिया वहीं जम्मू-कश्मीर में पर्यटन का पूरा कारोबार ठप्प पड़ गया.

कब हुई ऑपरेशन महादेव की शुरुआत

22  अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत ने 7 मई 2025 को पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरु किया, जिसमें पीओके में मौजूद आतंकी ठिकानों को चुन चुन कर उडाया गया.सेना ने जम्मू-कश्मीर से आतंक के जड़ों को खत्म करने के लिए लंबी रणनीति बनाई.सेना ने इसे नाम दिया-ऑपरेशन महादेव. इस ऑपरेशन का मकसद उन आतंकियो और उनके मददगारों को पकड़ना था,जो 96 दिन तक चला.

सेना ने कैसे चलाया आपरेशन

सेना ने इस ऑपरेशन के लिए ड्रोन कैमरों का सहारा लिया. ड्रोन से पहले ट्रैक किया, फिर घेरा और फिर वहीं गेम फिनिश कर दिया. तीन संदिग्धों को सेना ने घेरकर उनका काम तमाम कर दिया.

सेना के इस ऑपरेशन में SOG और भारतीय सेना की 12 सिख लाइट इन्फैंट्री शामिल थी. इस टीम का काम आतंकियों के छिपने के ठिकानों को पहचाना और नष्ट करना था. इस मिशन के लिए सेना ने ड्रोन के साथ साथ खुफिया लोगों को भी तैनात किया जिन्होंने आतंकियों की लोकेशन ट्रैक करने में काफी मदद की. खुफिया जानकारियों के आधार पर दाचीगाम के जंगलों में आतंकियों के छिपे होने की खबर आई और 28 जुलाई को सेना ने यहां धावा बोल दिया. तीन आतंकी ढेर कर दिये गये हैं. वहीं अब सेना ड्रोन से मिले फुटेज की जांच कर रही है.

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