लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और राज्यसभा (RS) के चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार Gyanesh Kumar को हटाने की मांग वाले मोशन नोटिस को “ध्यान से और ऑब्जेक्टिव असेसमेंट” के बाद रिजेक्ट कर दिया है, RS और लोकसभा सेक्रेटेरिएट ने सोमवार को एक कम्युनिकेशन में ये जानकारी दी.
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंपीचमेंट मोशन को खारिज कर दिया। pic.twitter.com/nTWBQJcItC
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 6, 2026
12 मार्च को दिया गया था Gyanesh Kumar के खिलाफ नोटिस
10 पेज का यह नोटिस 12 मार्च को जमा किया गया था और इस पर राज्यसभा के 63 सदस्यों ने साइन किए थे. इसमें CEC पर दूसरे आरोपों के साथ-साथ एग्जीक्यूटिव के “अधीन” होने और “सोच समझकर और जानबूझकर एक संवैधानिक पद की शक्तियों और पद का गलत इस्तेमाल” करने का आरोप लगाया गया था.
RS स्पीकर ने नोटिस खारीज करने की क्या वजह बताई गई
ऊपरी सदन के सेक्रेटेरिएट की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि “सभी ज़रूरी पहलुओं और मुद्दों का ध्यान से और निष्पक्ष तरीके से मूल्यांकन करने के बाद, माननीय सभापति, राज्यसभा ने जज (जांच) एक्ट, 1968 के सेक्शन 3 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, मोशन के उस नोटिस को स्वीकार करने से मना कर दिया है.”
इसमें कहा गया है कि निष्कासन भारत के संविधान के अनुच्छेद 324 (5) के तहत अनुच्छेद 124 (4), मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और पद की अवधि) अधिनियम, 2023 की धारा 11 (2) और न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के साथ किया गया था.
संविधान के आर्टिकल 324(5) और आर्टिकल 124(4) के तहत, CEC को सिर्फ़ सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह ही पद से हटाया जा सकता है.
इसके लिए राज्यसभा में कम से कम 50 सदस्यों या लोकसभा में 100 सदस्यों के सपोर्ट वाले मोशन की ज़रूरत होती है, जिसके बाद ज्यूडिशियल जांच और साबित हुए गलत व्यवहार या नाकाबिलियत के आधार पर दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से वोटिंग होनी चाहिए.
ओम बिरला की ओर से क्या कहा गया
लोकसभा के सेक्रेटरी जनरल उत्पल कुमार सिंह कि ओर से जारी नोटिस में कहा गया कि, “मेंबर्स को बताया जाता है कि 12 मार्च, 2026 का एक मोशन नोटिस, जिस पर लोकसभा के 130 मेंबर्स ने साइन किए थे, भारत के संविधान के आर्टिकल 324(5) के साथ, उसके आर्टिकल 124(4), चीफ इलेक्शन कमिश्नर और दूसरे इलेक्शन कमिश्नर (अपॉइंटमेंट, कंडीशंस ऑफ़ सर्विस एंड टर्म ऑफ़ ऑफिस) एक्ट, 2023 के सेक्शन 11(2) और जजेज़ (इन्क्वायरी) एक्ट, 1968 के तहत, जिसमें चीफ इलेक्शन कमिश्नर श्री ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की गई थी, माननीय स्पीकर, लोकसभा को दिया गया था.
मोशन के नोटिस पर ठीक से विचार करने और उससे जुड़े सभी ज़रूरी पहलुओं और मुद्दों का ध्यान से और निष्पक्ष मूल्यांकन करने के बाद, माननीय लोकसभा स्पीकर ने जज (इन्क्वायरी) एक्ट, 1968 के सेक्शन 3 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, मोशन के उस नोटिस को स्वीकार करने से मना कर दिया है.
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