नए साल से ठीक एक दिन पहले, बुधवार, 31 दिसंबर को पूरे भारत में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स Gig and platform workers ने देशव्यापी हड़ताल की. तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) के प्रेसिडेंट शेख सलाउद्दीन ने न्यूज़ एजेंसी ANI को बताया कि इन वर्कर्स में Swiggy, Zomato, Zepto और Amazon जैसी कंपनियों से जुड़े लोग शामिल हैं, और उन्होंने अपनी मांगों को मनवाने के लिए इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) के तहत एकजुट होकर यह हड़ताल की है.
देशव्यापी हड़ताल में शामिल मज़दूर अपनी काम करने की स्थितियों और सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव की मांग कर रहे हैं, और इस हड़ताल की वजह से पॉपुलर ऐप्स की डिलीवरी सर्विस पर असर पड़ सकता है.
तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन ने किया हड़ताल का अह्वान
न्यूज़ एजेंसी ANI के मुताबिक विरोध प्रदर्शन का आह्वान तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) ने किया था. संगठन के संस्थापक और अध्यक्ष सलाउद्दीन ने कहा कि यह हड़ताल प्लेटफॉर्म-आधारित कंपनियों द्वारा अपनाई जा रही उन नीतियों के जवाब में आयोजित की जा रही है, जिन्हें मज़दूर अनुचित बताते हैं. उन्होंने कहा कि बार-बार अपील करने के बावजूद मज़दूरों द्वारा उठाई गई कई चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया गया है.
उन्होंने कहा कि मज़दूर लगातार प्लेटफॉर्म कंपनियों के सामने अपनी मांगें उठा रहे हैं, और पुरानी पेमेंट व्यवस्था को फिर से लागू करने की मांग कर रहे हैं. ANI के हवाले से सलाउद्दीन ने कहा, “पहले, दशहरा, दिवाली और बकरीद जैसे त्योहारों के दौरान सही पेमेंट किया जाता था. उस सिस्टम को फिर से नियमित रूप से लागू किया जाना चाहिए.”
Gig and platform workers यूनियन की 5 बड़ी मांगें
रिपोर्ट्स के मुताबिक, गिग वर्कर्स यूनियन ने प्लेटफॉर्म कंपनियों के सामने पांच मुख्य मांगें रखी हैं.
1-पहले के पेमेंट सिस्टम को वापस लाया जाए, जिसके बारे में वर्कर्स का कहना है कि यह मौजूदा मॉडल की तुलना में ज़्यादा स्थिर और पारदर्शी कमाई देता था.
2-10-मिनट डिलीवरी सिस्टम को वापस लिया जाए. वर्कर्स का दावा है कि यह मॉडल उन्हें जल्दबाजी करने पर मजबूर करता है, स्ट्रेस बढ़ाता है और सड़कों पर उनकी सुरक्षा को खतरे में डालता है.
3-वर्कर अकाउंट्स को ब्लॉक या डीएक्टिवेट करना: सलाउद्दीन ने आरोप लगाया कि IDs को अक्सर बिना किसी साफ़ कारण या सही कम्युनिकेशन के सस्पेंड कर दिया जाता है, जिससे वर्कर्स अचानक बिना इनकम के रह जाते हैं और उनके पास फैसले को चुनौती देने का कोई तरीका नहीं होता.
4-प्लेटफ़ॉर्म कंपनियों द्वारा एल्गोरिदम का इस्तेमाल: गिग वर्कर्स की संस्था के अनुसार, ये सिस्टम इंसेंटिव और कुल कमाई पर असर डाल रहे हैं, जिससे गिग वर्कर्स के लिए इनकम अनिश्चित और आर्थिक रूप से अस्थिर हो गई है.
5-आखिरी मांग सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स शुरू करने की है. यूनियन ने इंश्योरेंस कवरेज और वेलफेयर उपायों की मांग की है, यह बताते हुए कि वर्कफोर्स में अपनी बढ़ती मौजूदगी के बावजूद गिग वर्कर्स बेसिक सोशल प्रोटेक्शन से बाहर हैं.
शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील
सलाउद्दीन ने बताया कि इन मुद्दों पर कोई प्रगति न होने के कारण यूनियन ने 31 दिसंबर को अचानक हड़ताल करने का फैसला किया है.
उन्होंने देश भर के गिग और प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने की अपील की. उन्होंने कहा कि इस हड़ताल का मकसद कंपनियों और पॉलिसी बनाने वालों का ध्यान गिग वर्कर्स द्वारा सामना की जा रही ज़रूरी समस्याओं की ओर खींचना है.

