अब दिल्ली से पटना पहुंचना होगा आसान,जानें 120kmph की रफ्तार वाले इस एक्सप्रेसवे की हर खूबी

Ganga Expressway : दिल्ली से पटना का नाम सुनते ही दिमाग में ट्रकों की लंबी लाइन, भारी ट्रैफिक और 15-20 घंटों की थकान वाला सफर याद आता है लेकिन अब यह तस्वीर बदलने वाली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल यानी 29 अप्रैल 2026 को देश के महत्वाकांक्षी ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ का उद्घाटन करने जा रहे हैं. इस एक्सप्रेसवे के शुरू होते ही न सिर्फ यूपी बल्कि बिहार जाने वाले यात्रियों के लिए भी सफर का अनुभव पूरी तरह बदल जाएगा.

 Ganga Expressway: मेरठ से प्रयागराज तक 594 किमी का ‘ग्रीनफील्ड’ कॉरिडोर

उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) द्वारा तैयार किया गया यह एक्सप्रेसवे यूपी का सबसे लंबा हाई-स्पीड कॉरिडोर है. करीब 594 किलोमीटर लंबा यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे मेरठ से शुरू होकर प्रयागराज तक जाता है और राज्य के 12 महत्वपूर्ण जिलों को आपस में जोड़ता है. इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह सीधे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से कनेक्ट होता है, जिससे दिल्ली-NCR के लोग बिना शहर के ट्रैफिक में फंसे सीधे इस पर चढ़ सकेंगे.

क्या दिल्ली से पटना की दूरी होगी कम?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इससे बिहार की राजधानी पटना नजदीक आएगी? जी हां, अब तक दिल्ली से पटना जाने के लिए लोग लखनऊ के रास्ते जाते थे लेकिन गंगा एक्सप्रेसवे प्रयागराज तक सीधी और हाई-स्पीड कनेक्टिविटी देगा. प्रयागराज से पटना की दूरी पहले के मुकाबले बेहतर सड़कों के जरिए कम समय में तय की जा सकेगी. 120 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड के कारण, दिल्ली से प्रयागराज और फिर वहां से बिहार की सीमा तक पहुंचना अब घंटों का समय बचाएगा. अनुमान लगाया जा रहा है कि इस एक्सप्रेसवे के शुरु हो जाने से  12 घंटों का सफर अब सिमटकर सिर्फ 6 घंटों हो सकता है.

सुविधाएं ऐसी जो देंगी एयरपोर्ट जैसा अहसास

गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि एक आधुनिक सुविधाओं वाला हब है. यात्रियों की सहूलियत के लिए यहां निम्नलिखित सुविधाएं दी गई हैं:

  • फूड प्लाजा और कैफेटेरिया: सफर के बीच विश्वस्तरीय खान-पान की सुविधा.

  • EV चार्जिंग स्टेशन: इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए हर कुछ दूरी पर चार्जिंग पॉइंट्स.

  • सुरक्षा के इंतजाम: सड़क सुरक्षा के लिए अलर्ट स्ट्रिप्स और 24×7 सीसीटीवी निगरानी.

  • आधुनिक होटल्स: लंबी दूरी के यात्रियों के लिए ठहरने के लिए डॉरमेट्री और होटल.

37,000 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट

इस मेगा प्रोजेक्ट को बनाने में करीब 37,000 करोड़ रुपये की लागत आई है. पश्चिमी यूपी को पूर्वांचल से सीधे जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे व्यापार और पर्यटन के लिहाज से गेमचेंजर साबित होगा. एक्सप्रेसवे पर जगह-जगह इंटरचेंज बनाए गए हैं ताकि लोग अन्य स्टेट और नेशनल हाईवे पर आसानी से आवाजाही कर सकें.

हाई-टेक टोल सिस्टम और रफ्तार का जादू

गंगा एक्सप्रेसवे पर रुकने की झंझट कम होगी, क्योंकि यहां हाई-टेक टोल सिस्टम लगाया गया है. मेरठ और प्रयागराज के पास मुख्य टोल प्लाजा बनाए गए हैं. हालांकि टोल की दरें अभी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं हुई हैं लेकिन माना जा रहा है कि यह दूरी के आधार पर (पे-पर-यूज़) तय की जाएंगी. कुल मिलाकर, यह एक्सप्रेसवे दिल्ली और पटना के बीच ‘आधे दिन से ज्यादा’ लगने वाले वक्त को काफी हद तक कम करने की क्षमता रखता है.

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