दिल्ली अपनी स्थापना के सौ साल पूरे कर रही गीता प्रेस (GEETA PRESS) को 2021 का गांधी शांति पुरस्कार देने की घोषणा की गई है,लेकिन पुरस्कार की घोषणा के साथ ही विवाद की शुरुआत हो गई है.

जयराम रमेश के ट्वीट से शुरु हुआ विवाद
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश के एक ट्टीट ने विवाद खड़ा कर दिया है. जयराम रमेश ने गीता प्रेस (GEETA PRESS) को अवार्ड देने की बात पर ट्टीट करते हुए कहा कि गीता प्रेस (GEETA PRESS) को पुरस्कार देना गोडसे और सावरकर को सम्मान देने के जैसा है.
The Gandhi Peace Prize for 2021 has been conferred on the Gita Press at Gorakhpur which is celebrating its centenary this year. There is a very fine biography from 2015 of this organisation by Akshaya Mukul in which he unearths the stormy relations it had with the Mahatma and the… pic.twitter.com/PqoOXa90e6
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) June 18, 2023
ट्वीट में जयराम रमेश ने क्या लिखा है?
जयराम रमेश ने अपने ट्टीट में लिखा है कि “2021 के लिए गांधी शांति पुरस्कार गोरखपुर में गीता प्रेस को प्रदान किया गया है जो इस वर्ष अपनी शताब्दी मना रहा है. अक्षय मुकुल द्वारा इस संगठन की 2015 की एक बहुत ही बेहतरीन जीवनी है जिसमें वह महात्मा के साथ इसके तूफानी संबंधों और उनके राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक एजेंडे पर उनके साथ चल रही लड़ाइयों का पता लगाता है. यह फैसला वास्तव में एक उपहास है और सावरकर और गोडसे को पुरस्कार देने जैसा है.”
सौ साल पुराने और भारत के सबसे प्रसिद्ध प्रेस के लिए वरिष्ठ कांग्रेसी नेता जयराम रमेश द्वारा दिये गये इस बयान पर कांग्रेस का नेता भी नाराज है. खबर है कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने जयराम रमेश की इस आलोचना पर नाराजगी जताई है.
गीता प्रेस का इतिहास
भारत की आजादी से भी पहले 1923 में स्थापित गीता प्रेस दुनिया के सबसे बड़े प्रकाशकों में से एक है. गीता प्रेस ने अब तक 14 भाषाओं में 4.7 करोड़ से ज्यादा किताबों का प्रकाशन किया है. खास बात ये है कि इस प्रेस ने आज तक पैसा कमाने के लिए कभी भी विज्ञापन का सहारा नहीं लिया है.
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गांधी शांति पुरस्कार की स्थापना
आपको बता दें कि भारत में गांधी शांति पुरस्कार की स्थापना 1995 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 125 वीं जयंती पर शुरु की गई थी.हर साल ये पुरस्कार राष्ट्रपिता के आदर्शों के प्रति श्रद्धांजलि के तौर दिया जाता है. ये पुरस्कार किसी व्यक्ति या संस्था को दिया जाता है. इसके तहत एक करोड़ रुपये की राशि पुरस्कार स्वरुप दी जाती है. भारत सरकार ने 2021 का गांधी शांति पुरस्कार गीता प्रेस को देने का निर्णय लिया है.
हिंदु धर्म के प्रचार प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान
सरकार के इस फैसले पर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता द्वारा की गई टिप्पणी से कांग्रेस के लोग भी नाराज है. कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक जयराम रमेश का ये बयान गैर जरुरी है. गीता प्रेस का सनातन धर्म के प्रचार प्रसार में बड़ा योगदान रहा है. इसलिए अगर गीताप्रेस के ये पुरस्कार दिया जाता है तो कोई बड़ी बात नही है.
हलांकि इस विवाद के सामने आने से पहले ही गीता प्रेस ने इस पुरस्कार को लेने से मना कर दिया है.इस बात की जानकारी गीता प्रेस के प्रबंधक लालमणि तिवारी ने दी है.

