ईरान-अमेरिका युद्ध का असर:सरकार ने घटाई एक्साइज ड्यूटी, फिर भी सस्ता नहीं होगा पेट्रोल-डीजल!

Excise Duty Cut: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है.संभावित वैश्विक ऊर्जा संकट को देखते हुए भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में भारी कटौती की है. सरकार के इस फैसले का उद्देश्य बढ़ती ईंधन कीमतों को नियंत्रित करना और आम जनता को राहत देना है, हालांकि इसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं को तुरंत मिलता नजर नहीं आ रहा है.

Excise Duty Cut: : कितनी घटाई गई एक्साइज ड्यूटी?

सरकारी आदेश के अनुसार:

  • पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है
  • डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दी गई है

यह कटौती ऐसे समय में की गई है जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।

होर्मुज जलमार्ग बना संकट की जड़

ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट पर नाकाबंदी के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है. यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से:

  • प्रतिदिन 20-25 मिलियन बैरल कच्चा तेल
  • लगभग 10 अरब घन फुट गैस आपूर्ति की जाती थी

इस बाधा ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया है।

ATF पर नया टैक्स, हवाई सफर महंगा होने के आसार

सरकार ने पहली बार एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी लागू की है।

  • ATF पर ₹50 प्रति लीटर टैक्स तय किया गया
  • राहत के बाद प्रभावी दर ₹29.5 प्रति लीटर

इससे एयरलाइंस कंपनियों की लागत बढ़ेगी और आने वाले समय में हवाई टिकट महंगे हो सकते हैं।

तेल कंपनियों को राहत, लेकिन जनता को नहीं

सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर टैक्स में राहत देकर तेल कंपनियों को बड़ी राहत दी है। साथ ही:

  • विंडफॉल टैक्स समाप्त कर दिया गया है
  • निर्यात पर कई शुल्कों में छूट दी गई है

इससे कंपनियों के घाटे को कम करने में मदद मिलेगी.

क्या सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस कटौती के बाद पेट्रोल और डीजल सस्ते होंगे?

जवाब: अभी नहीं।

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है
  • तेल कंपनियां हर लीटर पर करीब ₹48.8 का नुकसान झेल रही हैं

ऐसे में सरकार द्वारा दी गई राहत का उपयोग कंपनियां अपने घाटे को कम करने में करेंगी, न कि कीमतें घटाने में।

सरकार का यह कदम तेल कंपनियों के लिए राहत भरा जरूर है, लेकिन आम जनता को तत्काल राहत मिलने की संभावना कम है। जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम नहीं होतीं, तब तक पेट्रोल-डीजल के दाम में गिरावट की उम्मीद करना मुश्किल है.

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