Thursday, February 19, 2026

AI Summit के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैंक्रों को आया गुस्सा, कहा – Free speech bull….न्यूट्रल नहीं होते हैं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ….

Emmanuel Macron : भारत में चल रहे ग्लोबल AI Summit के दौरान अपने भाषण में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैंक्रों सोशल मीडिया प्लेसफार्म्स को लेकर बिफर पड़े. उन्होने कहा कि “कोई भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म न्यूट्रल नहीं हैं,ये सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स न्यूट्रल नहीं होते हैं. ये जानबूझकर ऐसे चरमपंथी और नफरती कंटेंटट को यूजर्स तक पहुंचाते हैं, इनका एल्गोरिदम कंटेंट को फिल्टर करके रैंक करता है.” राष्ट्रपति मैंक्रों ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के सिस्टम को एल्गोरिदम फ्री और ट्रांसपेरेंट होना चाहिए. अगर ऐसा नहीं होता है तो ये लोकतांत्रिक तंत्र के लिए गंभीर खतरा हो सकते हैं.

(दिल्ली: #IndiaAIImpactSummit2026 में, फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों ने कहा, “AI, GPU, चिप्स अब सीधे जियोपॉलिटिकल और मैक्रोइकोनॉमिक टर्म्स में ट्रांसलेट हो रहे हैं। मुझे कहना होगा कि कभी अच्छा होता है, कभी बुरा। एक साल पहले, हमने कुछ और दिखाया था… भारत ने सोच-समझकर सॉवरेन चॉइस बनाई, SML, स्मॉल लैंग्वेज मॉडल्स। टास्क-स्पेसिफिक, स्मार्टफोन पर चलने के लिए डिज़ाइन किया गया, भारत ने पहला गवर्नमेंट-फंडेड AI बनाया और देश के हर स्टार्टअप को सबसे सस्ते रेट्स पर 38,000 GPUs डिप्लॉय किए, जैसा कि आपने बिल्कुल सही बताया, मिस्टर मिनिस्टर…”)

Emmanuel Macron ने AI Summit में बताई अपनी चिंताएं 

आपको बता दें कि इस समय दिल्ली में चल रहे  AI Summit के लिए दुनिया भर की बड़ी टेक कंपनियों को सीइओ और मालिक आये हुए हैं. इसी समिट में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति मैंक्रों भी भारत की यात्रा पर हैं. मैंक्रों 17 से 20 फरवरी तक भारत में हैं. ये ग्लोबल AI Summit भी 16 फरवरी से 20 फरवरी तक चलेगा.

सोशल मीडिया के एल्गोरिदम पर मैक्रों ने जताई नाराजगी

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक मैक्रों ने अपने भाषण के दौरान कहा कि फ्री ऑफ स्पीच बुलशिट (Free speech bullshit) है. समस्या अभिव्यक्ति की आजादी में नहीं है बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिदम में हो जो अपारदर्शी हैं. इनके अल्गोरिदम कंटेंट को फिल्टर करते हैं, उसे लिस्ट करतें हैं, फिर उसे बड़े यूजर्स तक पहुंचाते हैं.

सोशल मीडिया पर कंट्रोल जरुरी नहीं तो लोकतंत्र को खतरा …

राष्ट्रपति मैक्रों ने दुनिया को चेतावनी दी कि अगर सोशल मीडिया में एल्गोरिदम बनाने, उसका  प्रशिक्षण देने और परीक्षण में ट्रांसपेरेसी की कमी होती है तो ये लोकतांत्रिक तंत्र के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं.

राष्ट्रपति मैक्रों ने आम तौर पर किये जाने वाले दावों को भी खारिज कर दिया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स न्यूट्रल (तटस्थ) होते हैं. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आरोप लगाया कि ये लोग जानबूझकर चुपचाप नफरत फैलाने वाले और चरमपंथी कंटेंट को यूजर्स के सामने लाते हैं.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का सिस्टम होना चाहिये पारदर्शी- मैक्रों

मैंक्रों ने अपनी अपनी बात पर जोर देते हुए कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिदम सिस्टम को पूरी तरह से पारदर्शी और फ्री होना चाहिए. चरमपंथ और नफरत फैलाने वाले कंटेंट पर रोक लगनी चाहिए.

अपने भाषण के दौरान मैंक्रों ने कहा कि भारत और फ्रांस अपने-अपने देश में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) के जरिये भरोसेमंद एआई प्रणाली बनाने के लिए जरूरी कंप्यूटिंग कपैसिटी और प्रतिभा को विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं  क्योंकि हम अपनी जरुरतों के लिए कहीं और विकसित की गई और प्रबंधित टेक्नोलॉजी पर निर्भर नहीं रह सकते.

इस समिट में प्रधानमंत्री मोदी ने भी भाषण दिया जिसमें उन्होने कहा कि इस सम्मेलन का मकसद यही पता लगाना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिसेंज (AI) का इस्तेमाल सभी के फायदे के लिए कैसे किया जा सकता है. पीएम मोदी ने कहा कि आज AI को जिस तरफ हम लेकर जाएंगे, हमारा भविष्य वैसा ही होगा.

100 से अधिक देशों ने समिट में लिया हिस्सा-पीएम मोदी  

पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा कि इस AI Summit में दुनिया भर के कम से कम 100 देशों के लोगों ने हिस्सा लिया, जिसमे बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए. ये समिट जिस भारत में हो रहा है, वो वन सिक्स्थ ऑफ ह्यूमेनिटी को दर्शाता है. भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी का देश है और सबसे बड़े टेक टैलेंट पूल का केंद्र भी है. सबसे बड़े टेक इनेबल्ड इकोसिस्टम का उदाहरण है.

आपको बता दें कि इससे पहले AI Summit पिछले साल 10-11 फरवरी को पेरिस में हुआ था, जिसमें पीएम मोदी भी शामिल हुए थे.

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