Donald Trump warns Iran : अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है. अमेरिका अब युद्ध में हुए खर्चे की भरपाई के लिए अरब देशों को धमकी देने पर उतर आये हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक तरफ जहां ईरान को उसके ऊर्जा संसाधनों को नष्ट करने की धमकी दी है, वहीं इस सैन्य कार्रवाई में खर्च हुए पैसों का बोझ अरब देशों पर डालने के संकेत भी दिए हैं.
“The United States of America is in serious discussions with A NEW, AND MORE REASONABLE, REGIME to end our Military Operations in Iran.” – President Donald J. Trump 🇺🇸 pic.twitter.com/0MWL2hSNmK
— The White House (@WhiteHouse) March 30, 2026
Donald Trump warns Iran : अरब देशों की जेब ढीली करा सकते हैं ट्रंप
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने एक प्रेस ब्रीफिंग में एक बड़ा संकेत दिया है. जब उनसे पूछा गया कि क्या अरब देश युद्ध के खर्च में अमेरिका की मदद करेंगे, तो उन्होंने कहा, “मैं राष्ट्रपति ट्रंप से पहले कुछ नहीं कहूंगी, लेकिन मुझे लगता है कि राष्ट्रपति उन्हें ऐसा करने के लिए कहने में काफी दिलचस्पी लेंगे. यह विचार उनके मन में है और जल्द ही आप इस बारे में और सुनेंगे.”
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत वे अब खाड़ी देशों से उस सुरक्षा की कीमत वसूलना चाहते हैं, जो अमेरिका इस क्षेत्र में प्रदान कर रहा है.
ईरान को धमकी: ‘बिजली और तेल के कुएं कर देंगे नेस्तनाबूद’
रविवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को कड़ा अल्टीमेटम दिय. उन्होंने कहा कि उनका प्रशासन शांति के लिए ‘गंभीर बातचीत’ कर रहा है, लेकिन अगर ईरान जल्द ही समझौते के लिए तैयार नहीं हुआ, तो परिणाम घातक होंगे.
ट्रंप की चेतावनी के मुख्य बिंदु
ट्रंप ने ईरान को धमकीते हुए मुख्य रुप से तीन बातों पर सहमति करने के लिए कहा है.
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ऊर्जा ठिकानों पर हमला: यदि समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों और तेल के कुओं को पूरी तरह नष्ट कर देगा।
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खार्ग द्वीप पर निशाना: ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र ‘खार्ग द्वीप’ को नेस्तनाबूद करने की धमकी दी गई है।
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: ट्रंप ने मांग की है कि व्यापार के लिए इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को तुरंत खोला जाए।
मध्यस्थों का प्रस्ताव ठुकराया
बता दें कि 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध को एक महीने से अधिक समय बीत चुका है. इस दौरान अमेरिका ने मध्यस्थों के जरिए ईरान को शांति का प्रस्ताव भेजा था, जिसे ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है. ईरान के इस कड़े रुख के बाद अब ट्रंप प्रशासन सैन्य कार्रवाई को और आक्रामक बनाने और इसका वित्तीय बोझ सहयोगियों पर डालने की रणनीति बना रहा है.

