भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने बुधवार को उस खबर को गलत बताया जिसमें कहा गया था कि विवादित स्पेशल इंटेंसिव रेगुलेशन (SIR) प्रोसेस पर लिए गए फैसलों पर तीन में से दो पोल कमिश्नरों ने आपत्ति जताई थी. आयोग ने कहा कि कई सदस्यों वाली संवैधानिक संस्था में “अंदरूनी जांच-पड़ताल आम बात है”.
ये बयान इंडियन एक्सप्रेस अखबार में छपे एक लेख के बाद आया जिसमें दावा किया गया था कि SIR प्रोसेस पर लिए गए फैसलों पर तीन में से दो पोल कमिश्नरों ने आपत्ति जताई थी. इस लेख पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य विपक्षी दलों ने जहां SIR प्रक्रिया रोकने, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और गिरफ्तार करने जैसी मांग की. विपक्ष ने आरोप लगाया की ECI ने चुनावी प्रोसेस को हाईजैक किया और डेमोक्रेसी को खतरे में डाला.
ECI ने अपने बयान में क्या सफाई दी
वहीं, चुनाव आयोग ने इंडियन एक्सप्रेस अखबार में छपे एक लेख पर प्रतिक्रिया देते हुए एक बयान जारी किया जिसमें कहागया कि, “ECI के सभी एक्शन कमीशन के कानूनों और निर्देशों के अनुसार रहे हैं.”
चुनाव आयोग ने कहा कि उसके तीन सदस्यों के विचार-विमर्श के दौरान अपने-अपने विचार, ऑब्जर्वेशन या सुझाव हो सकते हैं, लेकिन पोल बॉडी के सभी आखिरी फैसले एकमत से लिए जाते हैं.
इसमें यह भी कहा गया कि ड्राफ्ट स्टेज पर कमिश्नरों द्वारा उठाए गए ऑपरेशनल सवालों या इनपुट को आखिरी फैसला नहीं माना जाना चाहिए.
बयान में कहा गया, “अलग-अलग विचार और ऑब्जर्वेशन किसी भी संस्था में विचार-विमर्श का एक नॉर्मल हिस्सा हैं. आखिरी फैसला लेने से पहले वे फैसला लेने की प्रोसेस का हिस्सा होते हैं. सिर्फ तीन कमिश्नर ही नहीं, बल्कि कमीशन का हर अधिकारी चुनावी सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए कमीशन को अपने सुझाव देने के लिए पूरी तरह से ऑथराइज्ड है.”
इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी खबर में क्या छापा
इंडियन एक्सप्रेस ने बुधवार को रिपोर्ट किया कि इलेक्शन कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार इलेक्शन कमीशन के फैसलों और ऑर्डर पर ऑफिशियली आपत्ति जताई थी, जिसमें वोटर्स के नाम जोड़ने, हटाने और वापस लाने और वोटर रजिस्ट्रेशन प्रोसेस में बदलाव शामिल थे.
रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों कमिश्नरों ने कथित तौर पर उनकी जानकारी के बिना लिए गए फैसलों पर सवाल उठाए थे और एक मामले में, नए वोटर्स के लिए फॉर्म 6 से जुड़े बदलाव को “अनऑथराइज्ड और गैर-कानूनी” बताया था. उन्होंने इलेक्टोरल रोल के IT सिस्टम की निगरानी में बदलाव को लेकर कैबिनेट सेक्रेटरी से भी अलग से संपर्क किया था.
विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की
इस रिपोर्ट पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया, कांग्रेस ने कहा कि चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार को ऑफिस में रहने का कोई हक नहीं है और उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए. लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और इलेक्शन कमीशन, जिन्होंने “वोट चोरी” ऑर्गनाइज़ की, उन्होंने देशद्रोह का काम किया है.
वहीं, CPI(M) MP जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि CEC कुमार के अंडर इलेक्शन कमीशन “एक आदमी की तानाशाही” है.
उन्होंने कहा, “दो इलेक्शन कमिश्नरों ने 10 महीनों में 14 बार ऑफिशियली आपत्ति जताई है. उन्होंने नए वोटर्स को जोड़ने और बड़े पैमाने पर नाम हटाने को ‘अनऑथराइज़्ड और गैर-कानूनी’ बताया. उन्होंने सीक्रेट नाम हटाने, फिर से नाम वापस लेने और फॉर्म 6 में बदलावों पर आपत्ति दर्ज की, जो पहली बार वोट देने वाले युवाओं को परेशान करते हैं – और यह सब अंधेरे में रखा गया.”
उन्होंने आगे कहा कि यह EC और हमारी डेमोक्रेसी का भी खुला नुकसान है.
तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा लीडर डेरेक ओ’ब्रायन ने X पर कहा, “पांच महीने पहले, 60 राज्यसभा MPs (50 की ज़रूरत थी) ने CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए चेयरमैन RS को लिखा था. आज बड़ी खबर आने के बाद कि दो इलेक्शन कमिश्नरों ने CEC के कई कामों पर आपत्ति जताई है, आज RS मोशन लाने का समय आ गया है. डेमोक्रेसी बचाने के लिए CEC पर इंपीच करें.”
शिवसेना (UBT) चीफ उद्धव ठाकरे ने भी पोल बॉडी पर हमला करते हुए कहा: “मैं इलेक्शन कमिश्नर (ECs) सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को ज्ञानेश कुमार को एक्सपोज करने के लिए धन्यवाद देता हूं.”

