दिल्ली में नाबालिगों से जुड़े हाल के रेप केस पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, कहा- ‘निर्भया केस जैसा दर्दनाक’

Delhi rape cases: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में नाबालिगों और महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न के बढ़ते मामलों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा और कहा कि पार्क, बस और सड़कों सहित सार्वजनिक स्थानों को “ज़्यादा जोखिम वाले क्षेत्र” नहीं बनाया जा सकता.
जस्टिस जेबी पारदीवाला और के विनोद चंद्रन की बेंच ने लेडी श्री राम कॉलेज के पास आस्था कुंज पार्क में हाल ही में 17 साल की लड़की के साथ रेप, स्वरूप नगर में एक नाबालिग के साथ गैंगरेप और ग्रेटर नोएडा से दिल्ली जा रही बस में एक और नाबालिग के साथ सेक्सुअल असॉल्ट की खबरों पर ध्यान दिया.

Delhi rape cases: ‘निर्भया केस से दर्दनाक समानता’-सुप्रीम कोर्ट

नाबालिगों पर बार-बार हो रहे सेक्सुअल असॉल्ट की घटनाओं पर गंभीर एतराज़ जताते हुए बेंच ने कहा, “कोई भी 2012 के निर्भया केस से एक दर्दनाक समानता जोड़ने से खुद को रोक नहीं सकता और सोच सकता है कि क्या इससे कोई सबक सीखा गया है. पब्लिक सेफ्टी की गारंटी के बावजूद पूरे NCR में सेक्सुअल असॉल्ट की घटनाएं हो रही हैं. हिंसा से मुक्त सम्मान के साथ जीने का अधिकार संविधान के आर्टिकल 21 के तहत एक बुनियादी गारंटी है.”
यह देखते हुए कि ऊपर बताई गई घटनाएं एक पार्क, सड़क और बस के अंदर हुईं, बेंच ने कहा, “पब्लिक जगहों, जिसमें पार्क, सड़कें, बसें, मेट्रो स्टेशन, सबवे वगैरह शामिल हैं, को खराब पेट्रोलिंग और सर्विलांस की कमी के कारण हाई रिस्क ज़ोन नहीं बनाया जा सकता.”

पुलिस ने LSR कॉलेज की छात्राओं की शिकायतों को किया नज़रअंदाज

कोर्ट ने पुलिस को ज़िम्मेदार ठहराया क्योंकि उसने न्यूज़ रिपोर्ट में देखा कि आस्था कुंज की घटना में, यह बात सामने आई कि कैसे LSR कॉलेज के स्टूडेंट्स ने सेक्सुअल हैरेसमेंट के मामलों की शिकायत की थी, जिन पर ध्यान नहीं दिया गया. “अफसोस की बात है कि इन शिकायतों में एडवांस सर्विलांस के ज़रिए सुरक्षा की कमियों को ठीक नहीं किया जा सका.”
बेंच ने आगे कहा कि इन घटनाओं पर पब्लिक अथॉरिटीज़ और लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों के बयान समझ में आते हैं. हालांकि, उसने यह भी कहा, “ये घटनाएं लॉ एनफोर्समेंट और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेटिव अथॉरिटीज़ की तरफ से पब्लिक सेफ्टी की गारंटी देने में एक सिस्टमैटिक नाकामी को साफ तौर पर दिखाती हैं.”
इसमें कहा गया है, “कार्रवाई के बिना चिंता पर्याप्त नहीं है. जिस चीज की आवश्यकता है वह है कानून प्रवर्तन के लिए सौंपे गए व्यक्तियों की मापी गई प्रतिक्रिया और जवाबदेही.”

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