CBSE Three Language Policy: नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत लागू किए जा रहे थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच चल रही तमाम आशंकाओं पर CBSE ने बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है. बोर्ड ने साफ कर दिया है कि वर्तमान 7वीं, 8वीं, 9वीं और 10वीं के छात्रों पर नया भाषा नियम तत्काल प्रभाव से लागू नहीं होगा. खास बात यह है कि मौजूदा 10वीं के छात्रों को तीसरी भाषा की CBSE बोर्ड परीक्षा नहीं देनी पड़ेगी.
CBSE issues guidelines on the three-language policy.
•The current batch of class X will not have to follow the new language policy.
• For the current batches studying in class VII, VIII and IX would not be required to give board examination in third language when they… pic.twitter.com/EbfmnPiIDw— Press Trust of India (@PTI_News) June 29, 2026
CBSE Three Language Policy:मौजूदा 10वीं के छात्रों के लिए नहीं होगा कोई बदलाव
CBSE की नई गाइडलाइंस के अनुसार सत्र 2026-27 की 10वीं बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्रों की पढ़ाई और परीक्षा प्रणाली पहले की तरह ही रहेगी. उन्हें केवल दो भाषाओं की परीक्षा देनी होगी और तीसरी भाषा का कोई अतिरिक्त बोझ नहीं होगा.
इस फैसले से लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है.
9वीं के छात्रों के लिए क्या रहेगा नियम?
सत्र 2026-27 में 9वीं कक्षा के छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य रहेगा.
उदाहरण के तौर पर—
यदि कोई छात्र हिंदी और तमिल पढ़ रहा है, तो तीसरी भाषा के रूप में अंग्रेजी, फ्रेंच या कोई अन्य भाषा चुन सकता है.
यदि छात्र अंग्रेजी और तमिल पढ़ रहा है, तो उसे एक अतिरिक्त भारतीय भाषा पढ़नी होगी.
जिन छात्रों ने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हैं, उन्हें विशेष छूट के तहत वे भाषाएं जारी रखने की अनुमति होगी, लेकिन साथ में एक भारतीय भाषा भी पढ़नी होगी.
सबसे बड़ी राहत
CBSE ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा 9वीं के छात्रों को तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी. इस विषय का मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर किया जाएगा.
7वीं और 8वीं के छात्रों के लिए क्या होगा?
वर्तमान 7वीं और 8वीं के छात्र जब 9वीं और 10वीं में पहुंचेंगे, तब उन्हें भी तीन भाषाएं पढ़नी होंगी. यदि उन्होंने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हैं तो केवल एक भारतीय भाषा अतिरिक्त जोड़नी होगी.
इन छात्रों के लिए भी तीसरी भाषा की CBSE बोर्ड परीक्षा अनिवार्य नहीं होगी. इसका मूल्यांकन स्कूल ही करेगा.
पूरी तरह कब लागू होगी नई भाषा नीति?
नई भाषा नीति का पूर्ण प्रभाव सत्र 2026-27 की कक्षा 6 और उसके बाद के बैच पर दिखाई देगा.
इन छात्रों के लिए—
तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा.
इनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होंगी.
जब ये छात्र 10वीं कक्षा में पहुंचेंगे, तब तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा भी देनी होगी.
इसके लिए NCERT 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में नई पाठ्यपुस्तकें तैयार कर रहा है.
किन छात्रों को मिलेगी छूट?
CBSE ने कुछ विशेष श्रेणियों के छात्रों को राहत भी दी है.
दिव्यांग (CwSN) छात्रों को कानून के अनुसार आवश्यक छूट मिलेगी.
भारत के बाहर स्थित CBSE स्कूलों के छात्रों के लिए भारतीय भाषा अनिवार्य नहीं होगी.
विदेश से भारत आने वाले विदेशी छात्रों को भी तीसरी भारतीय भाषा से छूट दी जाएगी.
अगर परिवार दूसरे राज्य में चला जाए तो?
यदि किसी छात्र के माता-पिता का दूसरे राज्य में तबादला हो जाता है, तो छात्र अपनी पहले से चुनी गई तीसरी भाषा को जारी रख सकेगा. ऐसे मामलों में संबंधित स्कूल को पढ़ाई की व्यवस्था करनी होगी.
भाषा शिक्षक की कमी कैसे होगी दूर?
CBSE ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर वे—
मौजूदा शिक्षकों,सेवानिवृत्त शिक्षकों,पोस्टग्रेजुएट शिक्षकों,ऑनलाइन एवं हाइब्रिड शिक्षण व्यवस्था का उपयोग कर सकते हैं, ताकि भाषा शिक्षा प्रभावित न हो.
चरणबद्ध तरीके से लागू होगी नई नीति
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि नई भाषा नीति को एक साथ लागू नहीं किया जाएगा, बल्कि इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. साथ ही छात्रों के लिए आवश्यक अध्ययन सामग्री भी समय पर उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि किसी पर अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव न पड़े.
CBSE ने क्या कहा?
CBSE के अनुसार यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप किया जा रहा है. इसका उद्देश्य छात्रों पर परीक्षा का बोझ बढ़ाना नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना और भाषा सीखने की प्रक्रिया को अधिक सरल, रोचक और उपयोगी बनाना है. बोर्ड ने भरोसा दिलाया है कि इस बदलाव से किसी भी छात्र के हितों को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा.





