JNU Protest :जवाहर लाल यूनिवर्सिटी (JNU) के कैंपस के छात्र उमर खालिद और शरजिल इमाम की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज होने के बाद 5 जनवरी की रात कैंपस में हुए नारेबाजी से राजनीति गर्मा गई है. एक बार फिर छात्रों के विरोध प्रदर्शन का ये मामला राष्ट्रीय राजनीति से जुड़ गया है. अपनी अपनी विचारधारा के मुताबिक सभी राजनीतिक पार्टियां और संगठन इसको भुनाने में लग गये हैं. इस मुद्दे को लेकर लेफ्ट संगठन और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के आरोप-प्रत्यारोप के बीच मामला राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है. इस बीच जेएनयू प्रशासन ने दिल्ली पुलिस से इस मामले में FIR दर्ज करने का मांग की है.
The Chief Security Officer of Jawaharlal Nehru University (JNU) writes to the Vasant Kunj Police Station SHO requesting registration of an FIR for raising objectionable and provocative slogans outside Sabarmati Hostel in JNU.
“The raising of such slogans is wholly inconsistent… pic.twitter.com/zW3qbjK9ST
— ANI (@ANI) January 6, 2026
JNU Protest को लेकर राजनीतिक बयानबाजियो से गर्माई सियासत
जेएनयू में हुई नारेबाजी को लेकर दिल्ली और उत्तर प्रदेश के नेता बयान दे रहे हैं. दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री दयाशंकर सिंह ने नारे लगाने वाले छात्रों की नीयत पर सवाल उठाया इसके बाद इस मामले पर कांग्रेस की तरफ से भी बयानबाजी हुई है.
‘इस हरकत से बीजेपी को सियासी फायदा…’
इस पूरे प्रकरण पर कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने केंद्र और दिल्ली सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है. राशिद अल्वी का कहना है कि वो इस तरह के कृत्य और नारों का विरोध करते हैं, भर्तस्ना करते हैं लेकिन इस तरह से स्लोगन और हंगामें से आखिरकार किसे फायदा होने वाला है ? उन्होने कहा कि जाहिर तौर से बीजेपी को ही फायदा होना है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब सब को पता था कि जेएनयू में कुछ होने वाला है, फिर प्रशासन और पुलिस क्यों खामोश बैठी थी. क्यों वो सब कुछ होने दिया गया. दूसरे शब्दों में अल्वी ने बीजेपी और संघ पर आरोप लगाया कि उनकी जानकारी मे सब कुछ हुआ, फिर “दिल्ली पुलिस क्यों ख़ामोश थी? अमित शाह जी क्यों ख़ामोश थे?”
अब तक क्यों नहीं हुई पुलिस कार्रवाई ?
कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि जिन लोगों ने नारे लगाए उनके खिलाफ कोई एक्शन क्यों नहीं हुआ, पुलिस ने अभी तक किसी को गिरफ्तार क्यों नहीं किया ? फिर अल्वी ने कहा कि “ ऐसा भी तो हो सकता है कि नारे आप ने (बीजेपी) खुद ही लगवाए हों. इसका सियासी फ़ायदा तो आप को ही होगा.’
कांग्रेस नेता ने कहा कि -ऐसा कहा जा रहा है कि पाकिस्तान का झंडा भी फहरा दिया गया. ऐसी खबरें पिछले 11 साल से आ रही हैं लेकिन इससे पहले इस तरह की खबरें क्यों नहीं आती थीं? अल्वी ने तनाशाह हिटलर का नाम लेते हुए कहा कि इस तरह का काम तो हिटलर करता था..अपने लोगों को भेजकर इस तरह का काम कराता था. बीजेपी और आरएसएस ने केवल पॉलिटिकल फ़ायदा उठाने के लिए ये काम किया है.
कपिल मिश्रा का बयान -‘सपोलें बिलबिला रहें हैं…’
दिल्ली सरकार में मंत्री और भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने इस पूरे प्रकऱण पर कहा कि “सांपों के फ़न कुचले जा रहें हैं, तो सपोलें बिलबिला रहें हैं.JNU में नक्सलियों, आतंकियों, दंगाइयों के समर्थन में भद्दे नारें लगाने वाले हताश हैं क्योंकि नक्सली खत्म किए जा रहें हैं, आतंकी निपटाए जा रहें हैं और दंगाइयों को कोर्ट पहचान चुकी है.”
योगी सरकार क मंत्री दयाशंकर सिंह का कहना है कि “JNU में छात्र भारत के पैसे से पढ़ते हैं और विदेशी मानसिकता रखते हैं, ऐसे लोगों से देश को सावधान रहना चाहिए.”
5 जनवरी को जेएनयू कैंपस में हुए हंगामा की थी छठी बरसी
आपको बता दें कि सोमवार को जेएनयू के छात्रों ने 5 जनवरी 2020 को यूनिवर्सिटी कैंपस में हुए हमले की छठी बरसी के मौके पर एक विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया था. कैंपस के साबरमती हॉस्टल के बाहर कहा गया कि वामपंथी छात्र संगठनों के छात्रों ने कथित तौर पर विवादित नारेबाजी की, जिसे लेकर विवाद हो रहा है. NUSU और SFI छात्र संघ ने इसे वैचारिक विरोध बताया वहीं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने इन नारों को ‘हिंदू विरोधी मानसिकता’ से प्रेरित करार दिया है और अब ये मामला एक बार फिर से सरकार विरोध की मानसिकता के आरोप की तरफ बढ़ता दिखाई दे रहा है.

