Ladakh ‘Gen Z’ protest: भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि राज्य की मांग को लेकर लद्दाख में बुधवार को हुई हिंसा बांग्लादेश, नेपाल और फिलीपींस जैसी स्थिति पैदा करने की कांग्रेस की “नापाक साजिश” का हिस्सा थी.
Gen Z का नहीं, कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन था- संबित पात्रा
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, भाजपा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्षद स्टैनज़िन त्सेपांग लद्दाख हिंसा के मुख्य भड़काने वाले हैं. भाजपा सांसद ने कहा कि यह “दिखाने” की कोशिश की गई कि विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व जेन ज़ी (Gen Z) कर रहे हैं.
संबित पात्रा ने नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा, “आज लद्दाख में कुछ विरोध प्रदर्शनों को ‘जेन ज़ी (Gen Z)’ के नेतृत्व में होने का दिखावा करने की कोशिश की गई, लेकिन जब जाँच की गई, तो पता चला कि यह जेन ज़ी (Gen Z) का विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन था.”
#WATCH | Delhi | On protests in Leh, BJP MP Sambit Patra says, “Today, in Ladakh, attempts were made to portray some protests as being led by Gen Z. However, when investigated, it was discovered that these protests were not led by Gen Z, but by Congress. Congress councillor… pic.twitter.com/BTED6PRMfQ
— ANI (@ANI) September 24, 2025
Ladakh ‘Gen Z’ protest: पुलिस ने एफआईआर में दर्ज किया कांग्रेस पार्षद का नाम
वहीं, पुलिस ने बताया कि जब पुलिस ने लेह में प्रदर्शनकारियों को मार्च करने से रोकने की कोशिश की, तो कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस अधिकारियों पर पत्थर फेंके. अन्य प्रदर्शनकारियों ने एक अर्धसैनिक वाहन और भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय कार्यालय में आग लगा दी.
पुलिस और स्थानीय निवासियों ने बताया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां और आंसू गैस के गोले दागे और लाठियाँ बरसाईं, जिससे दर्जनों लोग घायल हो गए. उन्होंने बताया कि गंभीर रूप से घायल हुए कुछ लोगों में से चार की बाद में मौत हो गई.
लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने झड़पों को एक साज़िश बताया और हिंसा में शामिल सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का वादा किया. एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने जल्द ही एक प्राथमिकी दर्ज की और हिंसा और आगजनी में कथित संलिप्तता के लिए कांग्रेस पार्षद का नाम दर्ज किया.
“कांग्रेस का यहाँ इतना प्रभाव नहीं है”- सोनम वांगचुक
हालांकि, जल-वायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इन आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि उन्हें नहीं लगता कि कांग्रेस का लद्दाख के युवाओं पर इतना प्रभाव है कि वह उन्हें विरोध प्रदर्शनों के लिए प्रेरित कर सके.
वांगचुक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “कांग्रेस का यहाँ इतना प्रभाव नहीं है कि वह 5,000 युवाओं को सड़कों पर ला सके.”
वांगचुक ने आगे कहा कि पार्षद ने गुस्से में यह टिप्पणी की थी क्योंकि मंगलवार को अस्पताल में भर्ती हुए दो लोग उनके गाँव के थे, लेकिन उनका मानना था कि कांग्रेस का युवाओं को प्रभावित करने लायक प्रभाव नहीं है. उन्होंने कहा, “कल एक कांग्रेस पार्षद गुस्से में अस्पताल पहुँचे क्योंकि उनके गाँव के दो लोग अस्पताल में भर्ती थे, लेकिन कांग्रेस का इतना प्रभाव नहीं है.”
वांगचुक ने हिंसा के लिए “जेन जेड” के बीच पनप रही हताशा को ज़िम्मेदार ठहराया
उन्होंने लेह में राज्य का दर्जा और लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की माँग को लेकर हुए संघर्ष के बाद अपनी 15 दिनों की भूख हड़ताल भी समाप्त कर दी.
वांगचुक ने लेह में हुई हिंसा की घटनाओं पर दुख व्यक्त किया और चार युवकों की मौत के लिए “जेन जेड” के बीच पनप रही हताशा को ज़िम्मेदार ठहराया.
वांगचुक ने कहा कि दो प्रदर्शनकारियों, एक 72 वर्षीय पुरुष और एक 62 वर्षीय महिला, को मंगलवार को अस्पताल ले जाया गया था, और उन्होंने दावा किया कि संभवतः यही हिंसक विरोध प्रदर्शन का तत्काल कारण था. घटनाक्रम की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि बुधवार को बड़ी संख्या में ‘जेन जेड’ युवा धरना स्थल पर आए, जहाँ नमाज़ पढ़ी जा रही थी. उन्होंने कहा कि इसके बाद 2,000-5,000 युवा सड़कों पर उतर आए.
गृह मंत्रालय के वार्ता के लिए 6 अक्टूबर की तारीख़ तय करने से भी असंतोष पैदा हुआ- वांगचुक
जल वायु कार्यकर्ता ने ज़ोर देकर कहा कि हिंसा का अप्रत्यक्ष कारण युवाओं में बढ़ती निराशा थी क्योंकि पिछले पाँच वर्षों से उनके शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों का कोई नतीजा नहीं निकला था. उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय द्वारा लद्दाख के समूहों के साथ बैठक के लिए 6 अक्टूबर की तारीख़ तय करने से भी लोगों में असंतोष पैदा हुआ.
जो युवा सड़कों पर उतरे हमने उन्हें प्रदर्शन में नहीं देखा- वांगचुक
उन्होंने कहा, “किसी को नहीं पता था कि ऐसा कुछ होगा. हज़ारों लोग सड़कों पर उतर आए और यह स्थिति पैदा हो गई”. उन्होंने आगे कहा, “जेन ज़ी (‘Gen Z), जो सड़कों पर उतरे थे, हमने उन्हें विरोध प्रदर्शन में देखा तक नहीं था. यहाँ यह एक आम शिकायत थी कि युवा विरोध प्रदर्शन में हिस्सा नहीं ले रहे हैं.”
अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य का दर्जा देने की मांग की जा रही है.
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