Wednesday, February 18, 2026

चीनी रोबोडॉग विवाद, कांग्रेस ने कहा- सरकार ने AI को मज़ाक बना दिया है, गलगोटिया यूनिवर्सिटी स्टाफ ने खाली किया AI समिट में स्टॉल

चीनी रोबोडॉग विवाद Chinese robodog row को जन्म देने वाले गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्टाफ और स्टूडेंट्स ने बुधवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में हो रहे इंडिया AI इम्पैक्ट समिट से अपना स्टॉल खाली कर दिया. हलांकि इस बीच कांग्रेस ने सरकार पर इस विवाद को लेकर हमला बोला है और कहा कि, “उन्होंने AI को मज़ाक बना दिया है – एक ऐसा फील्ड जिसमें हम अपनी डेटा पावर के दम पर दुनिया के लीडर बन सकते थे”

ANI ने जारी की स्टॉल खाली करने की वीडियो

ANI न्यूज़ एजेंसी ने एक वीडियो जारी किया है जिसमें स्टाफ और स्टूडेंट्स अपने स्टॉल से निकलते हुए दिख रहे हैं. एक स्टाफ मेंबर ने रिपोर्टर्स को बताया कि सभी शक दूर करने के लिए बाद में एक ऑफिशियल प्रेस रिलीज़ जारी की जाएगी. विजुअल्स में स्टॉल की बिजली भी कटी हुई दिख रही है.

मोदी सरकार ने दुनिया भर में भारत का मज़ाक उड़ाया है-कांग्रेस

उधर कांग्रेस ने अपनी साइट पर चाइनीज़ मीडिया की एक तस्वीर शेयर कर लिखा है कि मोदी सरकार ने भारत का मज़ाक बना दिया है. कांग्रेस ने अपनी पोस्ट में लिखा, “AI को लेकर मोदी सरकार ने दुनिया भर में भारत का मज़ाक उड़ाया है.
अभी चल रहे AI समिट में, चीनी रोबोट को हमारे अपने रोबोट के तौर पर दिखाया जा रहा है. चीनी मीडिया ने हमारा मज़ाक उड़ाया है. यह सच में भारत के लिए शर्मनाक है.
इससे भी ज़्यादा शर्मनाक बात यह है कि मोदी के मंत्री अश्विनी वैष्णव भी इसी झूठ में शामिल हैं, भारतीय समिट में चीन के रोबोट को प्रमोट कर रहे हैं.
मोदी सरकार ने देश की इमेज को ऐसा नुकसान पहुंचाया है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती – उन्होंने AI को मज़ाक बना दिया है – एक ऐसा फील्ड जिसमें हम अपनी डेटा पावर के दम पर दुनिया के लीडर बन सकते थे, बेशर्मी से”

Chinese robodog row क्या है? गलगोटिया यूनिवर्सिटी का जवाब

वायरल क्लिप जिससे यह विवाद शुरू हुआ, उसमें प्रोफेसर नेहा सिंह रोबोडॉग का ज़िक्र करते हुए कहती हैं, “आपको ओरियन से मिलना चाहिए. इसे गलगोटिया यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस ने बनाया है.”
उन्होंने कहा कि मशीन सर्विलांस और मॉनिटरिंग कर सकती है, और यह कैंपस में आसानी से घूमती है. हालांकि, देखने वालों ने जल्द ही मशीन को ऑनलाइन देखा, और दावा किया कि रोबोट डॉग असल में चीनी रोबोटिक्स फर्म यूनिट्री से लिया गया था.
इसके बाद, गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने सोशल मीडिया पर एक बयान में साफ किया कि उसने कभी रोबोट बनाने का दावा नहीं किया. यूनिवर्सिटी ने कहा, “गलगोटिया ने यह रोबोडॉग नहीं बनाया है, न ही हमने ऐसा करने का दावा किया है.”
उन्होंने आगे कहा, “हम ऐसे दिमाग बना रहे हैं जो जल्द ही भारत में ऐसी टेक्नोलॉजी डिजाइन, इंजीनियर और मैन्युफैक्चर करेंगे.”
मंगलवार देर रात एक और बयान में, यूनिवर्सिटी ने कहा कि उसके फैकल्टी और स्टूडेंट्स “प्रोपेगैंडा कैंपेन” से बहुत दुखी हैं. इसमें कहा गया कि यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स को प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस पाने के लिए मॉडर्न टेक्नोलॉजी तक पहुंच देती है. यूनिवर्सिटी ने कहा, “नेगेटिविटी फैलाने से स्टूडेंट्स का हौसला टूट सकता है, जो ग्लोबल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके इनोवेट करने, सीखने और अपनी स्किल बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं.”

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