Iran New Strategy : मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने अब एक बेहद खतरनाक मोड़ ले लिया है, जहां अब युद्ध का केंद्र सैन्य ठिकानों से हटकर आम जनता की बुनियादी जरूरतों यानी पानी और ऊर्जा संसाधनों की ओर शिफ्ट हो गया है.
Iran New Strategy :ईरान ने सबसे कमजोर नस पर रखा हाथ
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़ा यह युद्ध अब अपने पांचवें हफ्ते में प्रवेश कर चुका है, लेकिन इस बार ईरान ने अपनी रणनीति बदलते हुए अपने सीधे अपने दुश्मनों के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना शुरू कर दिया है. ताजा हमलों ने कुवैत और अबू धाबी जैसे सुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्रों में भी हड़कंप मचा दिया है,जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
अबू धाबी में मिसाइल इंटरसेप्ट
अबू धाबी में हबशन गैस फैसिलिटी के पास स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई, जब एयर डिफेंस सिस्टम ने एक बड़े हमले को हवा में ही इंटरसेप्ट किया. हालांकि, मिसाइल या ड्रोन के मलबे के गिरने से प्लांट परिसर में भीषण आग लग गई, जिसके चलते प्रशासन को एहतियात के तौर पर गैस प्लांट का संचालन अस्थायी रूप से रोकना पड़ा. हालांकि इस घटना में कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन इसने यूएई की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं. स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से शांति बनाए रखने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने की अपील की है.
कुवैत में स्थिति चिंताजनक
वहीं, कुवैत में स्थिति और भी ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है. देश के जीवन रक्षक माने जाने वाले वॉटर डिसेलिनेशन प्लांट पर ईरानी हमले की पुष्टि हुई है. कुवैत जैसे देश के लिए यह हमला किसी आपदा से कम नहीं है, क्योंकि वहां की 90 प्रतिशत पेयजल आपूर्ति इन्हीं प्लांट्स पर टिकी है. इसके साथ ही कुवैत की मीना अल-अहमदी ऑयल रिफाइनरी को भी ड्रोन के जरिए निशाना बनाया गया, जिससे वहां भीषण आग लग गई और दमकल विभाग को घंटों मशक्कत करनी पड़ी. यह साफ संकेत है कि अब युद्ध सीधे तौर पर आम नागरिकों की रसोई और उनके अस्तित्व से जुड़ी चीजों को प्रभावित करने लगा है.
बहरीन में गिराये गये संदिग्ध ड्रोन
इस संघर्ष की तपिश केवल यहीं तक सीमित नहीं है. बहरीन में युद्ध के सायरन गूंज रहे हैं, तो वहीं सऊदी अरब ने अपनी सीमाओं के भीतर कई संदिग्ध ड्रोन्स को मार गिराने का दावा किया है. पूरे खाड़ी क्षेत्र में एयर डिफेंस सिस्टम को हाई अलर्ट पर रखा गया है लेकिन सबसे बड़ा खतरा ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को लेकर मंडरा रहा है. दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है और ईरान की बढ़ती आक्रामकता ने इस वैश्विक ट्रेड रूट को असुरक्षित बना दिया है.
ईरान की इस जवाबी कार्रवाई का असर अब वैश्विक बाजारों में साफ दिखने लगा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़े झटके के समान है. सप्लाई चेन टूटने और ऊर्जा संकट गहराने की आशंका के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई है. इस बैठक में मुख्य रूप से होर्मुज की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुनिश्चित करने पर चर्चा की जाएगी. पश्चिमी देशों के लगातार हमलों के बावजूद ईरान के तेवर नरम पड़ते नहीं दिख रहे हैं, जिसने दुनिया को एक बड़े आर्थिक और मानवीय संकट के मुहाने पर खड़ा कर दिया है.

