Thursday, February 12, 2026

भारत को 48 घंटों में घुटनों पर लाने की हसरत पाले बैठा था पाकिस्तान,8 घंटे में ही हसरत हो गई हवा – अनिल चौहान,सीडीएस

CDS  General Anil Chauhan :  भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने “भविष्य के युद्ध और युद्धकला” विषय पर  पुणे विश्वविद्यालय में आयोजित एक व्याख्यान के दौरान ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें की. सीडीएस ने कहा कि भारत ने 48 घंटे की लड़ाई को केवल 8 घंटे में ही पूरा कर लिया. भारत के हमलों से घबराये पाकिस्तान ने 10 मई की रात को बातचीत का प्रस्ताव पेश कर दिया. 10 मई को पाकिस्तान युद्ध हार गया था, इसलिए बातचीत का प्रस्ताव लेकर आया. उन्होंने बताया कि सेना का ये ऑपरेशन दर्शाता है कि आज के समय में युद्ध केवल हमला भर नहीं, बल्कि राजनीति का भी हिस्सा होता है.

CDS  General Anil Chauhan- हमें अपने बेहतर काउंटर ड्रोन सिस्टम का सपोर्ट मिला 

अपने भाषण के दौरान सीडीएस ने कहा कि हमारे ऑपरेशन सिंदूर में एक तरफ जहां युद्ध  और राजनीति एक दूसरे के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे थे, वहीं हमें अपने बेहतर काउंटर ड्रोन सिस्टम का भी फायदा मिला. 10 मई की रात पाकिस्तान युद्ध हार गया था. 48 घंटो की लड़ाई को हमने 8 घंटे में खत्म कर दिया, फिर रात एक बजे उनका फोन आया और उन्होंने कहा कि वो बात करना चाहते हैं.

युद्ध ‘नुकसान’ से नहीं ‘हासिल’ से तय होते हैं – जनरल अनिल चौहान

ऑपरेशन सिंदूर पर बात करते हुए सीडीएस ने कहा कि एक प्रोफेशनल फोर्स हैं और प्रोफेशनल फोर्सेस नुकसान और झटकों से प्रभावित नहीं होते हैं. हां हमें अपनी गलतियों को समझकर उन्हें सुधारना चाहिए. पीछे नहीं मुड़ना चाहिए. सीडीएस ने कहा कि युद्ध  में ये नहीं देखा जाना चाहिये कि नुकसान कितना हुआ, ये ज्यादा जरुरी है कि देखें कि क्या नतीजा निकला है. सीडीएस ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर वर्तमान समय में एक ऐसी युद्ध नीति का उदाहरण है, जिसमें काइनेटिक और नॉन-काइनेटिक दोनों तरह के युद्ध कौशलों का प्रयोग हुआ.

ऑपरेशन सिंदूर को सफल बनाने में ब्रह्मोस जैसी तकनीकों का अहम योगदान

सीडीएस चौहान ने कहा कि भारत के सेंसर तकनीक का इस युद्ध के दौरान अहम रोल रहा. हमारे पास नेचुरल और ह्युमन मेड दोनो तरह के सेंसर्स हैं, जिसकी तैनाती अलग अलग जरुरतों को पूरा करने के लिए किया गया.

ब्रह्मोस जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलें और स्टील्थ टेक्नोलॉजी का युद्ध में अहम योगदान रहा. ड्रोन्स के साथ मिलकर इस तकनीक ने ऐसे अटेक किये जिसका पहले से पता नहीं लगाया जा सकता.

मानव रहित टैंक ने भी इस युद्ध में अहम लोर निभाया. आने वाले समय में इस तरह के रोबोटिक और तकनीक ये लैश हथियारों से ताकत बढ़ेगी और मानवीय जोखिम कम होगा.

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